बीकेटीसी के अस्थायी कर्मचारियों का आंदोलन तेज, अब प्रतिदिन पांच घंटे कार्य बहिष्कार
मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल नहीं होने से नाराज कर्मचारी, एकमुश्त समायोजन और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग
बदरीनाथ/ज्योतिर्मठ, 21 अक्टूबर (कपरुवाण)। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में वर्षों से कार्यरत अस्थायी एवं स्थिर वेतनभोगी कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। गत 14 अक्टूबर से कार्यबहिष्कार कर रहे कर्मचारियों ने अब इसकी अवधि दो घंटे से बढ़ाकर प्रतिदिन पांच घंटे कर दी है। इससे मंदिर समिति के कामकाज और व्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में एकमुश्त समायोजन (वन टाइम सेटलमेंट) तथा समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था लागू करना शामिल है। आंदोलनरत कर्मचारियों का कहना है कि जब तक इन मांगों के संबंध में शासनादेश जारी नहीं किया जाता, उनका कार्यबहिष्कार जारी रहेगा।
इस बीच मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी ने धरनास्थल पर पहुंचकर आंदोलनरत कर्मचारियों से बातचीत की और उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीकेटीसी में कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों के एकमुश्त समायोजन की घोषणा की थी। कर्मचारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री की घोषणा संख्या 428/2024 के अंतर्गत समायोजन की व्यवस्था लागू की जानी थी, लेकिन लगभग दो वर्ष बीतने के बावजूद इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
कर्मचारियों का कहना है कि आंदोलन शुरू करने से पहले उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत मंदिर समिति के उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र भेजकर मुख्यमंत्री की घोषणा पर शीघ्र कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद मांगों का समाधान नहीं होने पर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
इसी क्रम में कर्मचारियों ने 14 अक्टूबर से प्रतिदिन दो घंटे का कार्यबहिष्कार शुरू किया था, जिसे 19 अक्टूबर से बढ़ाकर पांच घंटे कर दिया गया है। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
बदरीनाथ और केदारनाथ धामों की यात्रा व्यवस्थाओं में मंदिर समिति की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए कर्मचारियों के आंदोलन का शीघ्र समाधान आवश्यक माना जा रहा है। हालांकि, कर्मचारियों की मांगों पर शासन स्तर से अब तक किसी अंतिम निर्णय की जानकारी नहीं मिली है।

