प्रधानमंत्री ने कोविड-19 के सम्बन्ध में मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की : प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ भी पढ़ें

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देहरादून, 27 अप्रैल (उहि ) ।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कोविड-19 के दृष्टिगत देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
बाद मे सचिवालय में अधिकारियो  की बैठक लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिये कि कोविड पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पूर्णतः अनुपालन करवाया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अस्पतालों का फायर सेफ्टी ऑडिट करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाय कि कोरोना की संभावित लहर के दृष्टिगत अस्पतालों में सभी व्यवस्थाएं हों और पर्याप्त मेनपॉवर हो। टेस्ट, ट्रैक एवं ट्रीट पर विशेष फोकस रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में टीकाकरण अभियान में और तेजी लाई जाए। 12 से 14 वर्ष के आयु के बच्चों में टीकाकरण की गति में और तेजी लाये जाने की आवश्यकता है। टीकाकरण के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों के साथ कोविड पर नियंत्रण रखना होगा।
इस अवसर पर मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.संधु, अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, सचिव श्रीमती राधिका झा, अपर सचिव श्रीमती सोनिका, प्रो. दुर्गेश पंत एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।


कोविड-19 स्थिति पर मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री के समापन भाषण का मूल पाठ

27 APR 2022 3:26PM by PIB Delhi

नमस्कार! मैं सबसे पहले तमिलनाडु के तंजावुर में आज जो हादसा हुआ उस पर अपना शोक प्रकट करता हूं। जिन नागरिकों की मृत्यु हुई है, उनके परिवारों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं। पीड़ित परिवारों की आर्थिक मदद भी की जा रही है।

साथियों,

बीते दो वर्षों में कोरोना को लेकर ये हमारी चौबीसवीं मीटिंग है। कोरोना काल में जिस तरह केंद्र और राज्यों ने मिलकर काम किया, उसने कोरोना के खिलाफ देश की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई है। मैं सभी मुख्यमंत्रियों, राज्य सरकारों और अधिकारियों के साथ सभी कोरोना वारीयर्स की प्रशंसा करता हूँ।

साथियों,

कुछ राज्यों में से कोरोना के फिर से बढ़ते केसेस को लेकर Health secretary ने अभी हमारे सामने विस्तार में जानकारी रखी है। आदरणीय गृहमंत्री जी ने भी कई महत्वपूर्ण आयामों को हमारे सामने रखा है। साथ ही, आपमें से कई मुख्यमंत्री साथियों ने भी कई जरूरी बिन्दुओं को सबके सामने प्रस्तुत किया है। ये स्पष्ट है कि कोरोना की चुनौती अभी पूरी तरह से टली नहीं है। Omicron और उसके sub-variants किस तरह गंभीर परिस्थिति पैदा कर सकते हैं, ये यूरोप के देशों में हम देख रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में कुछ देशों में इन sub-variants की वजह से कई surge आए हैं। हम भारतवासियों ने कई देशों की तुलना में अपने देश में हालात को काफी बेहतर और नियंत्रण में रखा है। इन सबके बावजूद, पिछले दो हफ़्तों से जिस तरह से कुछ राज्यों में केसेस बढ़ रहे हैं, उससे हमें अलर्ट रहने की जरूरत है। हमारे पास कुछ महीने पहले जो लहर आई, उस लहर ने, हमनें उसमें से बहुत कुछ सीखा भी है। सभी देशवासी omicron लहर से सफलतापूर्वक निपटे, बिना पैनिक किए देशवासियों ने मुकाबला भी किया।

साथियों,

दो साल के भीतर देश ने health infrastructure से लेकर oxygen supply तक, कोरोना से जुड़े हर पक्ष में जो भी आवश्यक है वहां मजबूती देने का काम किया है। तीसरी लहर में किसी भी राज्य से स्थितियाँ अनियंत्रित होने की खबर नहीं आई। इसको हमारे कोविड वैक्सीनेशन अभियान से भी काफी मदद मिली! देश के हर राज्य में, हर जिले में, हर क्षेत्र में, चाहे वहाँ की भौगोलिक परिस्थितियाँ कैसी भी रही हों, वैक्सीन जन-जन तक पहुंची है। प्रत्येक भारतीय के लिए ये गौरव की बात है कि, आज भारत की 96 प्रतिशत वयस्क आबादी को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज़ लग चुकी है। 15 साल के ऊपर उम्र के करीब 85 प्रतिशत नागरिकों को दूसरी डोज़ भी लग चुकी है।

साथियों,

आप भी समझते हैं और दुनिया के ज्यादातर experts का निष्कर्ष यही है कि कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन सबसे बड़ा कवच है। हमारे देश में लंबे समय बाद स्कूल्स खुले हैं, classes शुरू हुई हैं। ऐसे में कोरोना केसेस के बढ़ने से कहीं न कहीं parents के लिए चिंता बढ़ रही है। कुछ स्कूल्स में बच्चों के संक्रमित होने के मामले में भी कुछ न कुछ खबरें आ रही हैं। लेकिन संतोष का विषय है कि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को भी वैक्सीन का कवच मिल रहा है। मार्च में हमने 12 से 14 साल के बच्चों के लिए वैक्सीनेशन शुरू कर दिया था। अभी कल ही 6 से 12 साल के बच्चों के लिए भी कोवैक्सीन टीका की permission मिल गई है। सभी eligible बच्चों का जल्द से जल्द टीकाकरण हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए पहले की तरह स्कूलों में विशेष अभियान भी चलाने की जरूरत होगी। टीचर्स और माता-पिता इसे लेकर जागरूक रहें, हमें ये भी सुनिश्चित करना होगा। वैक्सीन सुरक्षा कवच की मजबूती के लिए देश में सभी वयस्कों के लिए precaution dose भी उपलब्ध है। टीचर्स, पैरेंट्स, और बाकी eligible लोग भी precaution dose ले सकते हैं, इस तरफ भी हमें उन्हें जागरूक करते रहना होगा।

साथियों,

तीसरी लहर के दौरान हमने हर दिन तीन लाख से ज्यादा केसेस देखे हैं। हमारे सभी राज्यों ने इन केसेस को हैंडल भी किया, और बाकी सामाजिक आर्थिक गतिविधियों को भी गति दी। यही balance आगे भी हमारी strategy का हिस्सा रहना चाहिए। हमारे scientists और experts, national और global situation को लगातार monitor कर रहे हैं। उनके सुझावों पर, हमें pre-emptive, pro-active और collective approach के साथ काम करना होगा। infections को शुरुआत में ही रोकना हमारी प्राथमिकता पहले भी थी और अब भी यही रहनी चाहिए। आप सबने भी जिस बात का उल्लेख किया Test, track और treat की हमारी strategy को भी हमें उतने ही प्रभावी तौर पर लागू करना है। आज कोरोना की जो स्थिति है, उसमें ये जरूरी है कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों में जो हमारे गंभीर इंफ्लूएंजा के केसेस हैं, उनका शत प्रतिशत आरटी-पीसीआर टेस्ट हो। इसमें जो भी पॉजिटिव आते हैं उनका सैंपल जीनोम सीक्वेन्सिंग के लिए जरूर भेजें। इससे हम वैरिएंट्स की समय – समय पर पहचान कर पाएंगे।

साथियों,

हमें सार्वजनिक स्थानों पर कोविड appropriate behaviour को promote करना है, साथ ही पब्लिक में panic न फैले ये भी सुनिश्चित करना है।

साथियों,

आज की इस चर्चा में हेल्थ इनफ्रास्ट्रक्चर को upgrade करने के लिए जो काम हो रहे हैं, उनकी भी बात हुई। इनफ्रास्ट्रक्चर के upgrade का काम तेजी से चलता रहे, ये सुनिश्चित किया जाना चाहिए। Beds, ventilators और PSA Oxygen plants जैसी सुविधाओं के मामले में हम काफी बेहतर स्थिति में हैं। लेकिन ये सारी सुविधाएं functional रहें, हमें ये भी सुनिश्चित करना होगा और उसको मॉनिटर किया जाये, जिम्मेवारी तय की जाये ताकि कभी जरूरत पड़े तो हमे संकट न आये। साथ ही, अगर कहीं कोई gap है तो मैं आग्रह करुंगा की टॉप लेवल पर उसको verify किया जाए, उसको भरने का प्रयास हो। मेडिकल कॉलेजेस, जिला अस्पताल इन सबमें हमें अपने मेडिकल इनफ्रास्ट्रक्चर को भी scale-up करना है, और manpower को भी scale-up करना है। मुझे विश्वास है, आपसी सहयोग और संवाद से हम लगातार best practices evolve करते रहेंगे, और मजबूती से कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ते भी रहेंगे और रास्ते भी निकालते रहेंगे।

साथियों,

कॉपरेटिव फेडरेलिज्म की जिस भावना को संविधान में व्यक्त किया गया है, उस पर चलते हुए भारत ने कोरोना के खिलाफ मजबूती से ये लंबी लड़ाई लड़ी है। वैश्विक परिस्थितियों की वजह से, बाहरी कारकों की वजह से देश की आंतरिक परिस्थितियों पर जो प्रभाव होता है, केंद्र और राज्यों ने मिलकर उसका मुकाबला किया भी है और आगे भी करना ही होगा। केंद्र और राज्यों के साझा प्रयासों से ही आज देश में बड़े स्तर पर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हो पाया है। लेकिन साथियों, आज इस चर्चा में, मैं एक और पक्ष का जिक्र करना चाहता हूं। आज की वैश्विक परिस्थितियों में भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए आर्थिक निर्णयों में केंद्र और राज्य सरकारों का तालमेल, उनके बीच सामंजस्य पहले से अधिक आवश्यक है। आप सभी इस बात से परिचित हैं कि जो युद्ध की परिस्थिति पैदा हुई है और जिस प्रकार से सपलाई चैन प्रभावित हुई है और ऐसे माहौल में दिनोदिन चुनौतियां बढ़ती जा रही है। ये संकट वैश्विक संकट अनेक चुनौतियां लेकर के आ रहा है। ऐसे संकट के समय में केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल को, कॉपरेटिव फेडरेलिज्म की भावना को और बढ़ाना अनिवार्य हो गया है। अब मैं एक छोटा सा उदाहरण देता हूं। जैसे पेट्रोल-डीजल की कीमतों का एक विषय हम सबके सामने है। देशवासियों पर पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत का बोझ कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कमी की थी। पिछले नवंबर महीने में कम की थी। केंद्र सरकार ने राज्यों से भी आग्रह किया था कि वो अपने यहां टैक्स कम करें और ये benefit नागरिकों को transfer करें।  इसके बाद कुछ राज्यों ने तो भारत सरकार की इस  भावना की अनुरूप  यहां टैक्स कम कर दिया लेकिन कुछ राज्यों द्वारा अपने राज्य के लोगों को इसका कोई लाभ नहीं दिया गया। इस वजह से पेट्रोल-डीजल की कीमतें इन राज्यों में अब भी दूसरों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। ये एक तरह से इन राज्यों के लोगों के साथ अन्याय तो है ही, साथ ही पड़ोसी राज्यों को भी नुकसान पहुंचाता है। स्वाभाविक है कि जो राज्य टैक्स में कटौती करते हैं, उन्हें राजस्व की हानि होती है। जैसे अगर कर्नाटका ने टैक्स में कटौती नहीं की होती तो उसे इन छह महीनों में 5 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का राजस्व और मिलता। गुजरात ने भी टैक्स कम नहीं किया होता तो उसे भी साढ़े तीन चार हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का राजस्व और मिलता। लेकिन ऐसे कुछ राज्यों ने, अपने नागरिकों की भलाई के लिए, अपने नागरिकों को तकलीफ न हो इसलिए अपने वेट में टैक्स में कमी की, पॉजिटिव कदम उठाए। वहीं गुजरात और कर्नाटका के पड़ोसी राज्य ने टैक्स में कमी ना करके इन छह महीनों में , साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए से लेकर के पांच- साढे पांच हजार करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राजस्व कमा लिया। जैसा हम जानते हैं कि पिछले साल नवंबर महीने में VAT कम करने की बात थी, सबको मेने प्रार्थना की थी। लेकिन कई राज्य, मैं यहां किसी की आलोचना नही कर रहा हूं, मैं सिर्फ आपसे प्रार्थना कर रहा हूं। आपके राज्य के नागरिकों की भलाई के लिए प्रार्थना कर रहा हूं। अब जैसे उस समय छह महीने पहले कुछ राज्यों ने बात को माना कुछ राज्यों ने नहीं मानामाना। अब कई राज जैसे महाराष्ट्र,  पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरेला, झारखंड, किसी ने किसी कारण से उन्होंने इस बात को नहीं माना और उनके राज्य के नागरिकों को बोझ continue रहा। मैं इस बात में नहीं जाऊंगा कि इस दौरान इन राज्यों ने कितना रेवेन्यू कमाया। लेकिन अब आपसे मेरी प्रार्थना है कि देशहित में आप पिछले नवंबर में जो करना था। छह महीने delay हो चुका है। अब भी आप अपने राज्य के नागरिकों को वेट कम करके इसका benefit  पहुंचाइये।  आप सब जानते हैं कि भारत सरकार के पास जो रेवेन्यू आता है, उसका 42 प्रतिशत तो राज्यों के ही पास चला जाता है। मेरा सभी राज्यों से आग्रह है कि वैश्विक संकट के इस समय में कॉपरेटिव फेडरेलिज्म की भावना पर चलते हुए एक टीम के रूप में हम सब मिलके काम करें, अब मैं कई विषय हैं बारीकी में नहीं जा रहा हूं। जैसे फर्टीलाइजर, आज हम तो फर्टीलाइजर पर दुनिया के देशों पर dependent हैं। कितना बड़ा संकट आया है। लगातार अनेक गुणा सब्सिडी बढ़ रही है। हम किसानों पर बोझ transfer नहीं करना चाहतें। अब ऐसे संकट झेलने पड़ रहे हैं तब मैं आप सबसे आग्रह करता हूं, प्रार्थना करता हूं कि आप अपने राज्य, अपने पड़ोसी राज्य, सभी देशवासियों के हित में उसकी सर्वोच्च प्राथमिक दें। मैं एक और उदाहरण देता हूं। अब नवंबर में जो करना था नहीं किया। इसलिए पिछले छह महीने में क्या हुआ है। आज चैन्नई में, तमिलनाडु में पेट्रोल करीब 111 रुपये के पास है। जयपुर में 118 से भी ज्यादा है। हैदराबाद में 119 से ज्यादा है। कोलकाता में 115 से ज्यादा है। मुंबई में 120 से ज्यादा है और जिन्होंने कटौती की, मुंबई के ही बगल में दीव दमन में 102 रुपया है। मुंबई में 120, बगल में दीव दमन में 102 रुपया। अब कोलकाता में 115, लखनऊ में 105। हैदराबार में 120 करीब – करीब, जम्मू में 106। जयपुर में 118, गुवाहाटी में 105। गुरुग्राम में 105 है, देहरादून में छोटा राज्य हमारा उत्तराखंड 103 रुपया है। मैं आपसे आग्रह करता हूं। कि आप छह महीने भले जो कुछ भी आपका रेवेन्यू बढ़ा। आपके राज्य के काम आएगा लेकिन अब पूरे देश में आप सहयोग कीजिए ये मेरी आपको विशेष प्रार्थना है आज।

साथियों,

एक विषय और जिस पर भी मैं अपनी बात आज कहना चाहता हूं। देश में गर्मी तेजी से बढ़ रही है और समय से पहले बहुत गर्मी बढ़ रही है  और ऐसे समय में हम अलग-अलग स्थानों पर आग की बढ़ती हुई घटनाएं भी देख रहे हैं। जंगलों में, महत्वपूर्ण इमारतों में, अस्पतालों में आग की गई घटनाएं बीते कुछ दिनों में हुई हैं। हम सबको याद है वो दिन कितने पीड़ादायक थे, जब पिछले साल कई हॉस्पिटलों में आग लगी और वो बड़ी दर्दनाक स्थिति थी। बहुत मुश्किली समय था वो। अनेकों लोगों को इन हादसों में अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

इसलिए मेरा सभी राज्यों से आग्रह है कि अभी से हम विशेषकर हॉस्पिटलों का सेफ्टी ऑडिट करवाएं, सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता करें और प्राथमिकता के आधार पर करें। ऐसी घटनाओं से हम बच सकें, ऐसी घटनाएं कम से कम हों, हमारा Response Time भी कम से कम हो, जान-माल की हानि ना हो, इसके लिए भी मैं आपको आग्रह करुंगा कि आप अपनी टीम को विशेष रूप से इस काम पर लगाइये और बिल्कुल मॉनिटरिंग कीजिए ताकि देश में कहीं हादसा न हो। हमारे निर्दोष नागरिकों को जान न गवानी पड़े।

साथियों,

आप सभी ने समय निकाला, इसके लिए मैं एक बार फिर आपका सबका आभार व्यक्त करता हूँ और हमेशा मैं आपके लिए उपलब्ध रहता हूं। कोई भी जरूरी सुझाव आपके होंगे तो मुझे अच्छा लगेगा। मैं फिर एक बार आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद करता हूं।

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