प्रधानमंत्री स्मृति चिन्ह ई-नीलामी 2026: उपहारों से जनभागीदारी और नमामि गंगे तक
The PM Mementos e-Auction 2026 offers citizens an opportunity to acquire selected gifts and souvenirs received by Prime Minister Narendra Modi. The eighth edition features 1,498 items reflecting India’s art, culture, heritage, sports and craftsmanship. Conducted online under the Ministry of Culture, the auction continues until October 31, 2026. Proceeds are contributed to the Namami Gange programme, linking public participation with conservation of the Ganga and cultural heritage.
– उषा रावत –
प्रधानमंत्री को देश-विदेश की यात्राओं, सरकारी कार्यक्रमों, खेल आयोजनों, सांस्कृतिक समारोहों और विभिन्न संस्थाओं तथा व्यक्तियों से समय-समय पर अनेक उपहार और स्मृति चिन्ह प्राप्त होते हैं। इनमें चित्र, मूर्तियां, धार्मिक एवं सांस्कृतिक कलाकृतियां, पारंपरिक हस्तशिल्प, वस्त्र, स्मारक प्रतिकृतियां और खिलाड़ियों द्वारा भेंट की गई वस्तुएं शामिल होती हैं। इन्हीं में से चयनित वस्तुओं को आम नागरिकों के लिए ऑनलाइन नीलामी में रखा जाता है। इस व्यवस्था को “पीएम मेमेंटोज ई-ऑक्शन” अर्थात प्रधानमंत्री स्मृति चिन्ह ई-नीलामी के नाम से जाना जाता है।
2026 में आठवां संस्करण
वर्ष 2026 में प्रधानमंत्री स्मृति चिन्ह ई-नीलामी का आठवां संस्करण आयोजित किया जा रहा है। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 16 सितंबर को इसकी शुरुआत की और ऑनलाइन नीलामी 17 सितंबर से आरंभ हुई। इस बार कुल 1,498 स्मृति चिन्ह नीलामी के लिए रखे गए हैं। पहले नीलामी 2 अक्टूबर तक निर्धारित थी, लेकिन अब इसकी अवधि 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।
नीलामी का संचालन संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत National Gallery of Modern Art द्वारा समन्वित किया जाता है। वस्तुओं के दस्तावेजीकरण, प्रदर्शन और नीलामी संबंधी व्यवस्थाओं के साथ तकनीकी सहायता में एनआईसी, भुगतान व्यवस्था में एसबीआई तथा वस्तुओं की पैकिंग और वितरण के लिए निर्धारित एजेंसी की भूमिका है।
क्या-क्या है नीलामी में?
2026 का संग्रह केवल प्रधानमंत्री को मिले व्यक्तिगत उपहारों का संकलन नहीं है, बल्कि इसमें देश के अलग-अलग राज्यों की कला, संस्कृति, धर्म, खेल और समकालीन उपलब्धियों की झलक भी दिखाई देती है। उत्तर प्रदेश से संबंधित संग्रह में अयोध्या के राम मंदिर का विस्तृत मॉडल भी शामिल है।
महाराष्ट्र से संबंधित 89 वस्तुओं में छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी कलाकृतियों के साथ वारली कला, खिलाड़ियों की वस्तुएं और वधावन बंदरगाह, ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल तथा नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसी परियोजनाओं के मॉडल शामिल हैं। पैरालंपिक खिलाड़ियों सुकांत कदम और सचिन खिलारी से जुड़ी खेल सामग्री भी संग्रह का हिस्सा है।
पंजाब से संबंधित वस्तुओं में स्वर्ण मंदिर की प्रतिकृतियां, गुरु नानक देव का चित्र, माता गुजरी और साहिबजादों की कलाकृति, भांगड़ा से संबंधित चित्र तथा गायक दिलजीत दोसांझ के ‘दिल-लुमिनाटी टूर’ से जुड़ा फोटो प्रिंट शामिल है। दिल्ली से संबंधित 30 वस्तुओं में सेंट स्टीफंस कॉलेज की कलाकृति, पुराने सचिवालय का क्रिस्टल स्मृति चिन्ह, नए संसद भवन से संबंधित वस्त्र कलाकृति और पैरालंपिक रजत पदक विजेता योगेश कथुनिया का डिस्कस शामिल है।
नीलामी की राशि कहां जाती है?
इस ई-नीलामी की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इससे मिलने वाली राशि नमामि गंगे कार्यक्रम को दी जाती है। यानी प्रधानमंत्री को मिले स्मृति चिन्हों को सरकारी संग्रह में सीमित रखने के बजाय नागरिकों को उन्हें हासिल करने का अवसर दिया जाता है और प्राप्त धनराशि गंगा संरक्षण और पुनर्जीवन कार्यक्रम से जोड़ी जाती है।
पिछली नीलामियों से कितनी राशि मिली?
लोकसभा में 10 अगस्त 2026 को सरकार द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2025 तक सात संस्करणों में क्रमशः 3.10 करोड़, 3.60 करोड़, 15.80 करोड़, 14.40 करोड़, 11.16 करोड़, 2.24 करोड़ और 1.89 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इन आंकड़ों को जोड़ने पर कुल राशि लगभग 52.19 करोड़ रुपये होती है। सरकार ने यह भी बताया कि एनजीएमए द्वारा 2019 से पहले इस तरह की नीलामी आयोजित नहीं की गई थी।
यहां एक बात ध्यान देने योग्य है कि सरकारी उत्तर में 2021 से 2025 के बीच सात संस्करणों का वित्तीय विवरण दिया गया है, जबकि प्रधानमंत्री स्मृति चिन्ह नीलामी की पहल 2019 से चली आ रही है। इसलिए अलग-अलग सरकारी दस्तावेजों में “संस्करण” और वर्ष की गणना देखते समय संबंधित अवधि को स्पष्ट रखना आवश्यक है।
आम नागरिक कैसे भाग ले सकते हैं?
नीलामी पूरी तरह ऑनलाइन है। इच्छुक व्यक्ति आधिकारिक पीएम मेमेंटोज पोर्टल पर उपलब्ध सूची में स्मृति चिन्ह देख सकते हैं और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बोली लगा सकते हैं। सफल बोली के बाद भुगतान, पैकिंग और वस्तु पहुंचाने की व्यवस्था निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होती है।
