गंगोत्री से शुरू पुलिस सेवा, बदरीनाथ की धरती पर पूरी

चार दशक की सेवा के बाद निरीक्षक देवेन्द्र सिंह रावत सेवानिवृत्त
गोपेश्वर/ज्योतिर्मठ, 30 सितम्बर (कपरुवाण)। गंगोत्री की पावन धरती से वर्ष 1986 में शुरू हुई निरीक्षक देवेन्द्र सिंह रावत की करीब चार दशक लंबी पुलिस सेवा भगवान बदरीविशाल की धरती चमोली में पूरी हुई। अधिवर्षता आयु पूरी करने पर बुधवार को पुलिस कार्यालय गोपेश्वर सभागार में पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार की उपस्थिति में आयोजित समारोह में उन्हें भावभीनी विदाई दी गई।
पुलिस अधीक्षक पंवार ने रावत के दीर्घ सेवाकाल की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस सेवा में निष्ठा, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ लंबे समय तक कर्तव्य निभाना गौरव की बात है। उन्होंने उनके स्वस्थ और सुखमय भविष्य की कामना की।
अपने विदाई संबोधन में रावत ने कहा कि चार दशक से अधिक की पुलिस सेवा के बाद वर्दी में उनकी यात्रा का यह अंतिम पड़ाव भावुक करने वाला है। वर्ष 1986 में उत्तर प्रदेश पुलिस में आरक्षी पद पर चयन के बाद उन्होंने सहारनपुर में प्रशिक्षण लिया और पहली नियुक्ति उत्तरकाशी में हुई। नियुक्ति के तत्काल बाद उन्हें गंगोत्री धाम में एस्कॉर्ट ड्यूटी पर भेजा गया। इसके बाद मनेरी और बड़कोट में तैनाती के दौरान उन्हें गंगोत्री और यमुनोत्री धाम क्षेत्र में सेवा का अवसर मिला।
उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की 100 मीटर राइफल शूटिंग प्रतियोगिता में उत्तरकाशी का प्रतिनिधित्व किया और बाद में गढ़वाल रेंज का प्रतिनिधित्व करने का अवसर भी मिला। विशेष शाखा अभिसूचना विभाग उत्तरकाशी और गोविन्दघाट आतंकवाद निरोधक सेल में भी उन्होंने करीब तीन वर्ष सेवाएं दीं।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद उनका स्थानांतरण स्थानीय अभिसूचना इकाई रुद्रप्रयाग में हुआ। गौरीकुंड इकाई में करीब चार वर्ष की तैनाती के दौरान उन्होंने केदारनाथ यात्रा क्षेत्र में सेवाएं दीं। उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस की प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण करने और प्रशिक्षण के बाद 2006-07 में उनका स्थानांतरण देहरादून हुआ। वर्ष 2010 के महाकुंभ के दौरान उन्होंने चन्द्रभागा क्षेत्र में थानाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
रावत ने वर्ष 2010 में ऋषिकेश क्षेत्र की बाढ़ को अपने सेवाकाल की चुनौतीपूर्ण घटनाओं में गिनाया। चन्द्रभागा और शीशमझाड़ी क्षेत्र में पुलिस टीम ने रात के समय संकट में फंसे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को सुरक्षित निकाला। इस कार्य के लिए उन्हें विभिन्न संस्थाओं से सम्मान मिला। तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूरी ने उन्हें यात्रा काल-2010 के सर्वश्रेष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मान से भी सम्मानित किया।
इसके बाद उन्होंने हरिद्वार जिले में विभिन्न चौकियों और थानों के प्रभारी के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2022 में चमोली स्थानांतरण के बाद बदरीनाथ कोतवाली में वरिष्ठ उपनिरीक्षक और थराली में थानाध्यक्ष रहे। निरीक्षक पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने थराली, कर्णप्रयाग और ज्योतिर्मठ में प्रभारी निरीक्षक के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
रावत ने कहा, “मेरी पुलिस सेवा की शुरुआत मां गंगोत्री की पावन भूमि से हुई और इसका समापन भगवान बदरीविशाल की भूमि चमोली में हो रहा है। इससे बड़ा सौभाग्य मेरे लिए और कुछ नहीं हो सकता।”
सेवाकाल में उन्हें चार सेवा पदकों के अलावा अनेक प्रशस्ति-पत्र और सम्मान मिले। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान जनता का विश्वास, वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन और सहकर्मियों का सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि वर्दी अधिकार के साथ उत्तरदायित्व भी देती है और पुलिस की पहचान भय से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से बननी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज और राष्ट्र के प्रति सेवा की भावना बनी रहेगी।
समारोह में पूर्व केदारनाथ विधायक मनोज रावत, पुलिस उपाधीक्षक कर्णप्रयाग त्रिवेन्द्र सिंह राणा, पुलिस उपाधीक्षक चमोली मदन सिंह बिष्ट सहित जनप्रतिनिधि, परिजन तथा पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
