कौन लेगा जनरल रावत की जगह ? थल सेनाध्यक्ष नरवणे का नाम सबसे आगे

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  जयसिंह रावत

तमिलनाडू की नीलगिरी पहाड़ियों पर हुयी दुर्भाग्यपूर्ण हेलीकाप्टर दुर्घटना में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत के निधन के बाद उनके स्थान पर नये सीडीएस की नियुक्ति को लेकर देश की निगाह अब मोदी सरकार के अगले कदम पर टिक गयी है। चूंकि जनरल रावत पहले सीडीएस थे, इसलिये नियुक्ति संबंधी कोई पूर्व परम्परा या उदाहरण नहीं है, इसलिये यह पूरी तरह मोदी सरकार पर निर्भर करेगा कि वह किसे तीनों सेनाओं का नया अग्रज बनाती है। बदलते जा रहे सुरक्षा परिदृष्य के अनुरूप सेना के आधुनिकीकरण और देश के समक्ष चीन तथा पाकिस्तान की ओर से आ रही नयी सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुये भी सरकार इस पद को लम्बे समय तक रिक्त नहीं रख सकती।

रक्षा मंत्री का प्रमुख सलाहकार होता है सीडीएस

सैन्य मामलों के विभाग का प्रमुख होने के अलावा चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ, चीफ ऑफ स्टॉफ कमेटी के अध्यक्ष भी होते हैं। वह सेना के तीनों अंगों के मामले में रक्षा मंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य करते हैं, लेकिन इसके साथ ही तीनों सेनाओं के अध्यक्ष रक्षा मंत्री को अपनी सेनाओं के संबंध में सीधे ही सलाह देते हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ तीनों सेनाओं के प्रमुखों का कमान नहीं करते और न हीं किसी अन्य सैन्य कमान के लिए अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं, ताकि राजनीतिक नेतृत्व को सैन्य मामलों में निष्पक्ष सुझाव दे सके।

तीनों सेनाओं के प्रमुखों में से चुना जायेगा सीडीएस

जनरल रावत की नियुक्ति के समय तय मानकों के अनुसार नये सीडीएस का चयन तीनों सेनाओं के प्रमुखों में से या तीनों सेनाओं में से किसी एक का प्रमुख बनने के पात्र अधिकारी में से किया जा सकता है, बशर्ते वह 65 साल से कम उम्र का हो। पहले सीडीएस जनरल रावत ने थल सेना अध्यक्ष के पद से सेवानिवृत होने के तत्काल बाद ही यह पद संभाला था, इसलिये तीनों सेनाओं के रिटायर हो चुके किसी सक्षम अधिकारी को भी सरकार इस पद पर नियुक्त कर सकती है। वैसे भी यह पद काम्बेट का न होकर सलाहकार और समन्वयक का ही है। इस पद पर नियुक्ति के समय सरकार को यह भी ध्यान रखना होगा कि कहीं नयी नियुक्ति से सेना के तीनों अंगों में से किसी के मनोबल पर असर न पड़े। इसलिये बहुत संभव है कि तीनों सेवारत सेनाध्यक्षों में से वरिष्ठतम सेनाध्यक्ष को इस पद पर बिठा दिया जाय ताकि अन्य समकक्षों के मन में कोई क्लेश न रह जाय या तीनों अंगों से कोई स्वयं को कमतर न मान ले।

वरिष्ठता के अनुसार नरवणे की ताजपोशी की संभावना ज्यादा

अगर वरिष्ठता को चयन का आधार बनाया गया तो थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुन्द नरवणे की इस पद पर ताजपोशी की सबसे अधिक संभावना है। परिस्थितियां भी उन्हीं के पक्ष में जा रही है। वर्तमान में जनरल नरवणे तीनों ही सेना प्रमुखों में सबसे वरिष्ठ हैं। वरिष्ठता के हिसाब से देखा जाय तो नोसेनाध्यक्ष एडमिरल आर0 हरिकुमार तीनों में सबसे जूनियर है। वह 30 नवम्बर 2021 को नोसेना प्रमुख बने हैं और उनकी नोसेना में कमिशनिंग भी सबसे बाद में जनवरी 1983 में हुयी है। उनसे वरिष्ठ वायुसेना के 27 वें प्रमुख विवेकराम चौधरी हैं जिन्होंने 30 सितम्बर 2021 को यह पद संभाला था और वायुसेना में उनकी कमिशनिंग 29 दिसम्बर 1982 को हुयी थी। इन दोनों सेवा प्रमुखों में सबसे वरिष्ट जनरल नरवणे ने जनरल बिपिन रावत के स्थान पर 27 वें आर्मी चीफ के बतौर 31 दिसम्बर 2019 को पद संभाला था। सेना में उनकी कमिशनिंग भी दोनों सेवा प्रमुखों से भी काफी पहले जून 1980 को हुयी थी। नरवणे का कार्यकाल अप्रैल 2022 तक का है।सेना के अधिकारियों की वरिष्ठता सेना में उनकी कमिशनिंग की तिथि से ही आंकी जाती है। इस लिहाज से देखा जाय तो जनरल नरवणे की चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के रूप में ताजपोशी अब महज औपचारिकता ही रह गयी है।

थल सेना के दसवें हिस्से के बाराबर भी नहीं नेवी और एयर फोर्स

यद्यपि तीनों ही सेनाओं का अपनी जगह विशिष्ट महत्व है। विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी के इस युग में अब परम्परागत युद्धों की जगह हाइटैक वार फेयर और प्रॉक्सी वार लेती जा रही है। पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक मरहूम डा0 ए.पी.जे. अब्दुल कलाम कहा करते थे कि भविष्य के युद्ध जमीन पर नहीं लड़े जायेंगे। ऐसी स्थिति में नेवी और एयर फोर्स के महत्व को किसी भी हाल में थल सेना से कमतर नहीं आंका जा सकता। फिर भी तीनों सेनाओं के आकार और व्यापकता के हिसाब से देखा जाय तो थल सेना विश्व की पांच सबसे बड़ी थल सेनाओं में से एक है, जिसके सभी रैंक के सैनिकों की संख्या 12,37,117 है। जबकि वायुसेना का आकार 1,39,576 सैनिकों का तथा नेवी का मात्र 67,228 सैनिकों का है। इसलिये ओहदे में भले ही तीनों सेना प्रमुख बराबर हों मगर नियंत्रण को लेकर आकार का सवाल सदैव खड़ा होता रहा है। संभवतः इसीलिये जनरल रावत को सीडीएस तो बना दिया गया मगर उनको भी चार समकक्षों में से प्रथम और चार सितारा जनरल ही रखा गया।

जनरल रावत ने भी नेवी-एयर फोर्स को मात्र सहायक फोर्स बताया था

जनरल रावत राजनीतिक सत्ताधारियों के काफी करीब माने जाते थे और नेवी तथा एयर फोर्स के बारे में उनकी राय छिपी नहीं थी। वह सेना के शेष दो अंगों, नेवी और एयर फोर्स को केवल सपोर्टिंग आर्म ही मानते थे। सपोर्टिंग आर्म का मतलब मुख्य सेना से इतर ही होता है। देखा जाय तो सारा झगड़ा जमीन का होता है और जमीन पर कब्जा थल सेना ही करती है। इस विचार से भी देखा जाय तो जनरल नरवणे का सीडीएस बनना लगभग तय है। लेकिन उनकी ताजपोशी से पहले सरकार को नरवणे के स्थान पर नये थलसेना प्रमुख की नियुक्ति करनी होगी ताकि नरवणे समय से पहले ही सेवा निवृत्ति ले कर नयी जिम्मेदारी संभाल सकें। इस पद के लिये सह थलसेनाध्यक्ष ले0 जनरल चण्डी प्रसाद मोहन्ती का नाम तय माना जा रहा है। इसीलिये वह अपनी विदेश यात्रा समय से पहले ही समाप्त कर वापस लौट गये हैं।

प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त 2019 को की थी घोषणा

15 अगस्त, 2019 को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया था। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था, ‘भारत में खंडित दृष्टिकोण नहीं होना चाहिए। हमारी पूरी सैन्य शक्ति को एकजुट होकर काम करना होगा और आगे बढ़ना होगा। सभी तीनों सेवाओं को एक साथ एक ही गति से आगे बढ़ना चाहिए। अच्छा सामंजस्य होना चाहिए और यह देशवासियों की आशा एवं आकांक्षाओं के लिए प्रासंगिक होना चाहिए। यह विश्व भर में बदलते युद्ध और सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप होना चाहिए। इस पद (सीडीएस) के सृजन के बाद तीनों ही सेनाओं को शीर्ष स्तर पर प्रभावशाली नेतृत्व सुनिश्चित होगा।’

कैबिनेट कमेटी ने 2019 में दी थी सीडीएस को मंजूरी

प्रधानमंत्री की ही अध्यक्षता में सुरक्षा संबंधी केन्द्रीय मंत्रिमण्डल की कमेटी ने 25 दिसम्बर 2019 को ऐतिहासिक फैसला करते हुए देश में उच्च रक्षा प्रबंधन में जबरदस्त सुधार के साथ 4 स्टार जनरल के रैंक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ का पद सृजित करने की मंजूरी दे दी थी  जिनका वेतन और अतिरिक्त सुविधाएँ सर्विस चीफ के बराबर रखा गया और उसे सैनिक मामलों के विभाग (डीएमए) का भी प्रमुख बनाया गया। सीडीएस गठन रक्षा मंत्रालय के भीतर किया गया जो कि अब उसके सचिव के रूप में कार्य करता है।

सीडीएस के कार्य क्षेत्र

चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ के नेतृत्व में सैन्य मामलों का विभाग को जिन क्षेत्रों में काम करना है उनमें:- संघ की सशस्त्र सेना यानि थल सेना, नौसेना और वायु सेना, रक्षा मंत्रालय के समन्वित मुख्यालय जिनमें सेना मुख्यालय, नौसेना मुख्यालय, वायु सेना मुख्यालय और डिफेंस स्टॉफ मुख्यालय शामिल है, प्रादेशिक सेना, सेना, नौसेना और वायु सेना से जुड़े कार्य और चालू नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार पूंजीगत प्राप्तियों को छोड़कर सेवाओं के लिए विशिष्ट खरीद का विषय शामिल है।

सीडीएस के अधिकार

उपरोक्त मामलों के अलावा सैन्य मामलों के विभाग के अधिकार क्षेत्र में निम्नलिखित बातें भी शामिल हैं जैसे:-(ए.) एकीकृत संयुक्त योजनाओं और आवश्यकताओं के माध्यम से सैन्य सेवाओं की खरीद, प्रशिक्षण और स्टॉफ की नियुक्ति की प्रक्रिया में समन्वय लाना, (बी.) संयुक्त संचालन के माध्यम से संसाधनों के तर्कसंगत इस्तेमाल के लिए सैन्य कमानों के पुनर्गठन और संयुक्त थिएटर कमानों के गठन की सुविधा एवं  (सी.) सेनाओं द्वारा स्वदेश निर्मित उपकरणों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना शामिल है।

 

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