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छतों पर सौर ऊर्जा अपनाने में छोटे शहर आगे, मेट्रो शहर टॉप-100 से भी बाहर

 

नई दिल्ली, 13 जुलाई। देश में छतों पर सौर ऊर्जा (रूफटॉप सोलर) अपनाने के मामले में टियर-II और टियर-III शहर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता जैसे बड़े महानगर शीर्ष 100 जिलों में भी स्थान नहीं बना सके हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत छोटे शहरों में रूफटॉप सोलर की बढ़ती लोकप्रियता देश के ऊर्जा संक्रमण को नई गति दे रही है।
योजना के तहत लखनऊ, नागपुर, सूरत, अहमदाबाद और राजकोट देश के शीर्ष पांच जिलों में शामिल हैं। इनके अलावा जलगांव, अमरावती, छत्रपति संभाजीनगर, जूनागढ़, महेसाणा, भावनगर, गंगानगर, कोल्लम और अलाप्पुझा जैसे कई टियर-II और टियर-III शहर भी शीर्ष 50 जिलों में जगह बना चुके हैं।
अप्रैल 2024 में शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कर 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना है। दिन में उत्पादित अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जाती है और आवश्यकता पड़ने पर उपभोक्ता उसे वापस उपयोग कर सकते हैं, जिससे कई परिवारों का बिजली बिल लगभग शून्य हो जाता है।
योजना की प्रमुख उपलब्धियां
27 जून 2026 तक योजना के तहत देशभर में 36.29 लाख रूफटॉप सोलर प्रणालियां स्थापित की जा चुकी हैं। इससे 44.13 लाख घर लाभान्वित हुए हैं और 13,022 मेगावाट की उत्पादन क्षमता विकसित हुई है। सरकार अब तक 25,460 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी कर चुकी है।
राज्यों में गुजरात अव्वल
रूफटॉप सोलर स्थापना के मामले में गुजरात पहले स्थान पर है, जहां 7.18 लाख से अधिक संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इसके बाद महाराष्ट्र (6.43 लाख), उत्तर प्रदेश (6.26 लाख), केरल (2.77 लाख) और राजस्थान (2.40 लाख) का स्थान है।
3-4 किलोवाट प्रणाली की अधिक मांग
अधिकारियों के अनुसार 60 प्रतिशत से अधिक स्थापनाएं 3 से 4 किलोवाट क्षमता की हैं। केंद्र सरकार 3 किलोवाट तक की प्रणाली पर 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी दे रही है, जबकि कई राज्य अतिरिक्त प्रोत्साहन भी प्रदान कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश और केरल में जागरूकता अभियान तथा जिला स्तर पर सक्रिय निगरानी के कारण योजना को अच्छा प्रतिसाद मिला है।
हर महीने तीन लाख से अधिक नई स्थापनाएं
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार योजना ने अभूतपूर्व गति पकड़ी है और औसतन हर महीने करीब तीन लाख नई रूफटॉप सोलर प्रणालियां स्थापित की जा रही हैं। अब सरकार का फोकस समूह आवासीय सोसायटियों तक योजना का विस्तार करने पर है, जहां एक साझा सौर संयंत्र से कई परिवारों और सामुदायिक सुविधाओं की बिजली जरूरतें पूरी की जा सकती हैं।
इसके साथ ही सरकार यूटिलिटी-आधारित एग्रीगेशन (यूएलए) मॉडल को भी बढ़ावा दे रही है, जिससे कम आय वाले और सब्सिडी वाली बिजली पाने वाले परिवार भी सौर ऊर्जा से जुड़ सकें। आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, बिहार, केरल, जम्मू-कश्मीर, त्रिपुरा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली में इस मॉडल को लागू किया जा रहा है।

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