राज्य आंदोलनकारियों का विधानसभा के सामने धरना; भू कानून और धारा 371 की मांग

देहरादून, 6 सितम्बर। उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दूसरे दिन बुधवार को आंदोलनकारी संयुक्त परिषद एवं विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों द्वारा राज्य आंदोलनकारियो की मांगों के संबंध में एक दिवसीय धरना विधानसभा के समक्ष दिया गया तथा मागो का ज्ञापन उप जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से मुख्यमंत्री को प्रेषित किया गया।

धरने में वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यदि राज्य आंदोलनकारीयो की मांगों पर गंभीरता पूर्वक विचार नहीं किया गया तो भविष्य में आंदोलनकारी संगठनों को संघर्ष का बिगुल बजाना पड़ेगा।
वक्ताओं ने कहा शीघ्र अति शीघ्र सरकार राज्य आंदोलनकारियो की मांगों पर गंभीरता पूर्वक विचार करते हुए राज्य आंदोलन की गंभीरता को समझते हुए मांगों पर शीघ्र नीतिगत निर्णय ले।
आंदोलनकारियो ने ज्ञापन में प्रदेश में भू कानून और मूल निवास कानून लाने के साथ ही प्रदेश को संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत लाने की मांग की गयी। ज्ञापन में शेष आंदोलनकारियो का शीघ्र चिन्हीकरण करने की मांग की गयी है।
धरने में शामिल होने वाले उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के संरक्षक नवनीत गोसाई, प्रदेश अध्यक्ष विपुल नौटियाल, जिला अध्यक्ष सुरेश कुमार, उत्तराखंड चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संगठन के अध्यक्ष जबर सिंह पावेल व उपाध्यक्ष लोक बहादुर थापा व उत्तराखंड महिला मंच की संयोजक निर्मला बिष्ट, विमला रावत, संगीता रावत, सत्या पोखरियाल, पुष्प लता सिल्माना, जनवादी महिला समिति की ओर से नुरसा अंसारी, शाकंभरी रावत, व मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी राजेंद्र पुरोहित, अनंत आकाश, प्रेम सिंह नेगी, जगमोहन रावत , बालेश बवानिया, धर्मानंद भट्ट, प्रभात डेंड्रियाल, लखन चीलवाल, द्वारिका डिमरी, कुसुम बिष्ट, गोदांबरी भट्ट, देवेश्वरी गोसाई, कल्पेश्वरी नेगी और बीना कुकरेती आदि उपस्थित रहे
