सीमांत क्षेत्र में पहली समुदाय आधारित “सोच स्टड़ी सेन्टर “

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पिथौरागढ़, 6 नवम्बर।

सीमांत क्षेत्र में पहली समुदाय आधारित “सोच स्टड़ी सेन्टर ” बांसबगड़ में खोली जा रही है। इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई है।  “एक किताब दुनियां बदल सकती है” के नारे के साथ मुनस्यारी तथा धारचूला में भी इसी तरह के सेंटर खोलने की योजना है।

जिपं सदस्य तथा सोसायटी फार एक्सन इन हिमालया के अध्यक्ष एवं निदेशक जगत मर्तोलिया ने लंबे समय से शोसियल साइटो में चर्चा में चल रही इस मुहिम को आज सार्वजनिक किया।

मर्तोलिया ने बताया कि समुदाय के सहयोग से इसका संचालन किया जायेगा। सोच संस्था के साथ जिला प्रशासन तथा शिक्षा विभाग को इस मुहिम का सहयोगी पार्टनर बनाया जा रहा है।

मर्तोलिया ने बताया कि चीन सीमा से लगे अति दुर्गम क्षेत्र बांसबगड़ में पहला इस तरह का स्टड़ी सेंटर खुलेगा। उसके बाद मुनस्यारी तथा धारचूला में खोला जायेगा। मर्तोलिया ने कहा कि यह यूनिक इस मामले में है , कि इसका संचालन समुदाय करेगा। स्कूल के बच्चो तथा गांवो में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओ के लिए यह सेंटर लाभदायी होगा।

अध्ययन के लिए ग्राम सुधार की किताबे भी रखी जायेगी, जो समाज का किसी उम्र का व्यक्ति भी पढ़ सकता है।

मर्तोलिया ने कहा कि जिला पंचायत के बजट को भी अब वे इन सेंटरो को सवारने के लिए खर्च करेंगे। समाज में पढ़ने की आदत पैदा करने के लिए इन सेंटरो की आने वाले समय में बड़ी भूमिका होगी।

मर्तोलिया ने कहा कि हमारा पहला लक्ष्य होगा कि हम इन सेंटरो से इंसान का निर्माण करे। बाद में वह नौकरी या रोजगार जो भी करेगा वह उसका लक्ष्य होगा। समुदाय आधारित इस मुहिम के लिए स्वयंसेवको को आगे आने की अपील की गई है। सोशियल साइट में इस अपील के वायरल होते ही युवा, महिलाएं, पूर्व सैनिक, शिक्षक, पंचायत प्रतिनिधि सहित सामाजिक कार्यकर्ता आगे आने लगे है।

इससे उत्साहित होकर मर्तोलिया ने कहा कि हमारा लक्ष्य तो हर न्याय पंचायत तक पहुंचने का है। उन्होंने सभी से सहयोग की अपील की है।

 

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