विकास की भेंट चढ़ा कालिंका देवी का यात्रा रूट , ऐतिहासिक स्थल हुए विलुप्त
गौचर, 28 अगस्त (गुसाईं)। हवाई पट्टी की चारदीवारी और रेल लाइन निर्माण के बाद जहां कालिंका देवी की पारंपरिक यात्रा मार्ग में बदलाव आ गया है, वहीं इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थल भी समय के गर्त में समा गए हैं।
जानकारी के अनुसार, पहले कालिंका देवी की यात्रा जिस मार्ग से निकलती थी, उस पर भटनगर तोक में एक स्थल था, जहां परंपरा के अनुसार देवी का एक गहना यात्रा के दौरान गिर गया था। अब यह स्थल रेल परियोजना की भूमि में समाहित हो गया है। इसी तरह पनाई सेरे में एक ऐसा स्थान था, जहां देवी को मूर्छा आने पर परंपरागत रूप से सुअर की बलि दी जाती थी। यह स्थान भी हवाई पट्टी की चारदीवारी के अंदर आने के कारण महत्वहीन हो गया है।
रेल लाइन और हवाई पट्टी क्षेत्र में प्रवेश पर रोक लगने से देवी यात्रा का मार्ग पूरी तरह बदल दिया गया है। अब यात्रा आने के समय हवाई पट्टी के बाज़ार छोर से मंदिर तक पहुंचती है और वापसी में दूसरे छोर से बंदरखंड होते हुए गुजरती है।
