खेल/मनोरंजन

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से दो लघु फ़िल्मों ‘द लास्ट रोडोडेंड्रॉन’ और ‘वेट् ब्लू टरपालिन’ का प्रदर्शन

देहरादून, 18 जून। दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर में शनिवार की शाम को यशस्वी जुयाल द्वारा द लास्ट रोडोडेंड्रॉन तथा अनुनय बरभुइया द्वारा निर्देशित वेट् ब्लू टरपालिन फिल्में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में प्रदर्शित की गयीं। इधर दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की पहल पर हर महीने दो शनिवार को फिल्में प्रदर्शित की जा रही हैं।

‘द लास्ट रोडोडेंड्रॉन’ फ़िल्म की कहानी उत्तराखंड के पहाड़ों के एक छोटे से गाँव से जुड़ी है। द लास्ट रोडोडेंड्रोन’ एक संघर्षमय यात्रा को चित्रित करती है। इसमे एक पीढ़ी शहर की संभावनाओं से जुड़ी हुई दिखती है तो दूसरी अपनी जमीन के अस्तित्व से संघर्षरत है ।

‘वेट् ब्लू टरपालिन’ फ़िल्म दरअसल महाराष्ट्र में काम करने वाले असम के एक व्यक्ति से सम्बंधित है जिसका सामना किसी एक शहर से होता है। जहां उसे अपनी नौकरी जारी रखने के लिए एक फर्जी आईडी कार्ड बनवाने के लिए जोर दिया जाता है।

यशस्वी जुयाल एक स्व-शिक्षित स्वतंत्र फिल्म निर्माता और पटकथा लेखिका हैं ।उनकी लघु डॉक्यूमेंट्री “ए वाइज क्रैब” का मुंबई के फिल्म फेस्टिवल 2015 में आधिकारिक रूप से चयन किया गया। उनकी दूसरी डॉक्यूमेंट्री “कॉन्फिडेंट इन बीइंग कन्फ्यूज्ड” ने सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार जीता
इंडियन सिने फिल्म फेस्टिवल (2016) में अवार्ड और दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल (2016), दिल्ली में स्पेशल जूरी अवार्ड।

बाद में उन्होंने “सिल्वरकॉर्ड फिल्म्स” नामक अपने स्वयं के फिल्म स्टूडियो और संगठन की स्थापना की – उत्तराखंड के क्षेत्रीय सिनेमा और स्थानीय रूप से निर्मित वृत्तचित्रों, प्रायोगिक फिल्मों, संगीत वीडियो, फिल्म कार्यशालाओं और कला समुदाय के समारोहों पर ध्यान केंद्रित किया। वह अपनी 2018 में रिलीज़ हुई डॉक्यूमेंट्री “आई स्टैमर व्हेन आई टॉक” के लिए जानी जाती हैं।
अनुनय बरभुइया असम, भारत के एक स्वतंत्र फिल्म निर्माता-कलाकार हैं। उन्होंने भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान में फिल्म निर्देशन और पटकथा लेखन का अध्ययन किया। उनकी अंतिम वर्ष की छात्र फिल्म, वेट ब्लू टरपालिन (2019, भारत), जिसे उन्होंने लिखा और निर्देशित किया है, का प्रीमियर 15 वें अंतर्राष्ट्रीय लघु और स्वतंत्र फिल्म महोत्सव, ढाका में, इसकी शुरुआती प्रदर्शन के एक भाग के रूप में किया गया।

वर्तमान में, वह असम में आधारित अपनी पहली फीचर-लेंथ हाइब्रिड डॉक्यूमेंट्री पर काम कर रहे हैं और प्रायोगिक ऑडियो-विजुअल शॉर्ट्स पर सहयोग कर रहे हैं।

अंकित थापा देहरादून, भारत के एक स्वतंत्र फिल्म निर्माता हैं। वह ध्वनि रिकॉर्डिंग और ध्वनि डिजाइन में विशेषज्ञता के साथ भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई), पुणे के पूर्व छात्र हैं।

फ़िल्म निर्देशक यशस्वी जुयाल तथा साउंड-डिजाइनर व रिकॉर्डिस्ट अंकित थापा ने फ़िल्म प्रदर्शन के बाद लोगों के समक्ष चर्चा भी की। देहरादून की फिल्म निर्देशिका शाश्वती तालुकदार द्वारा फिल्मों का परिचय और चर्चा का संचालन किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने फ़िल्म से जुड़े अनेक सवाल जबाब भी किये। इन लघु फ़िल्मों के प्रदर्शन के समय दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में अनेक फ़िल्म प्रेमी,फ़िल्म जगत से जुड़े कलाकार सहित साहित्यकार अरुण असफल, कर्नल वीके दुग्गल, फ़िल्म निर्देशक अजय गोविंद सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

 

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