नैनीताल जिले में भूजल की चोरी, ग्रामीण आन्दोलित

कई गावों के पेयजल श्रोत सूखने का खतरा

नैनीताल, 19 सितम्बर।

कुमाऊं में आवासीय प्रयोजन के बहाने बिल्डरों द्वारा भूजल की भी चोरी हो रही है। जमीन के अंदर पानी का यह घोटाला कुमाऊं की कमिश्नरी नैनीताल के रामगढ़ ब्लाक में हो रहा है जिसके खिलाफ आधा दर्जन गावों के निवासियों ने आरोही संस्था के नेतृत्व में आन्दोलन छेड  दिया है। ग्रामीणों को आशंका है कि इस तरह की गतिविधियों से भूजलतंत्र गड़बड़ा जायेगा और पाहड़ी गांवों के पेयजल के श्रोत सूख जायेगे।

नैनीताल जिले के ग्राम सतोली, प्यूड़ा, दियारी, छतौला, कफूड़ा, कुमाटी तथा आस-पास के क्षेत्रों के निवासी, युवा नेता तथा पर्यावरण कार्यकर्ता, गैर सरकारी संगठन और अन्य चिन्तित नागरिकों ने सतोली में आवासीय प्रयोजन के नाम पर बोरवेल से भूजल का व्यावसायिक उपयोग करने के खिलाफ आन्दोलन छेड़ दिया है।

आरोही संस्था की विज्ञप्ति के अनुसार यह बोरवेल ग्राम सतोली, पट्टी मल्ली कुटोली में अवैध रूप से आवासीय उपयोग की आड़ में लगाया गया है। जबकि यह बोरवेल व्यावसायिक उद्देश्यों के लिये, संचालित किया गया जो इस क्षेत्र के निवासियों में चिन्ता और जबरदस्त आक्रोश का कारण बन गया है। यह बोरवेल गलत तथ्यों के तहत खोदा गया है। यह बोरवेल विपिन चन्द्र के नाम से खोदा गया है, जो कि भवाली के निवासी हैं, न कि ग्राम सतोली के निवासी हैं। बोरवेल द्वारा निकाले गये पानी का दुरुप्रयोग बिल्डरों द्वारा विशाल कोठियों के निर्माण के लिये, किया जा रहा है।

यह इंगित करना महत्वपूर्ण है कि यह वही बिल्डर है जिन्होंने पास ही के गाँव छतौला में स्थित सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण किया है। इस अतिक्रमण की वजह से इन बिल्डरों के खिलाफ नैनीताल उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है और अदालत ने नोटिस भेजकर उन पर, तथा अन्य दोषियों पर लगे आरोपों का जवाब मांगा है।

कुमांऊ में पर्यावरण की दुर्दशा तथा प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के कारण यहाँ के निवासियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में एक जन आन्दोलन शुरू किया गया है तथा बहुत से निवासी इस आन्दोलन का बढ़ चढ़कर समर्थन कर रहे हैं।

हाल में ही ग्रामीणों के जीवन और आजीविका पर नुकसान का संज्ञान लेते हुये, सतखोल की ग्राम सभा ने एक बोरवेल की अनुमति को अस्वीकार कर दिया है। पर्यावरण पर पड़ने वाले दूरगामी और नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए, भू-जल को निकालने हेतु कानून अत्यधिक नियंत्रित किया गया है। हिमालय के पहाड़ और यहाँ का पर्यावरण बेहद संवेदनशील हैं। पहाड़ों की सतह के नीचे कोई अतिरिक्त जल तालिकाएं नही हैं । पहाड़ में बोरवेल द्वारा पानी निकालने की गतिविधियों से यहाँ के सम्पूर्ण जल तंत्र में बदलाव आयेगा तथा बहुत से जल स्रोत सूखते जायेंगे।विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि अवैज्ञानिक बोरिंग द्वारा भू-जल निकालने से भू-जल स्तर में अपूरणीय क्षति होती है। इस अवैध बोरवेल का खामियाजा सतोली, प्यूड़ा, दियारी, कफूड़ा, कुमाटी जैसे गाँव के कई घरों को भुगतना पड़ेगा।

आरोही एक प्रमुख और प्रतिष्ठित संस्था है, जिसका मुख्यालय सतोली गाँव में स्थित है। आरोही पिछले 30 वर्षों से शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आजीविका पर कार्य कर रही है ताकि ग्रामीण जनता के जीवन स्तर में सुधार आ सके। जल स्रोतों में  गिरावट आने से आरोही के स्वास्थ्य, शिक्षा व महिला सशक्तिकरण से लाभान्वित लोगों पर इसका अत्यधिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

खुलेआम पानी की चोरी को लेकर निवासियों में बहुत आक्रोश है। लगभग 150 निवासियों ने इस अवैध कार्य को उजागर करने के लिये, पत्रों के माध्यम से उत्तराखण्ड राज्य सरकार (सचिव के माध्यम से), पेयजल व स्वच्छता विभाग, केन्द्रिय भू-जल बोर्ड, जिलाधिकारी नैनीताल, परगना पदाधिकारी, नैनीताल और सिंचाई विभाग को भी अवगत कराया है।

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