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दोहा शांति वार्ता के बीच अमेरिका का बड़ा हमला: ईरान के तट पर दागीं मिसाइलें, जलमार्ग खोलने पर फंसा पेंच

 

दोहा/वाशिंगटन/तेहरान 26 मई (NT). मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए कतर की राजधानी दोहा में सोमवार को एक तरफ जहां राजनयिक बातचीत दोबारा शुरू हुई, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ने दक्षिण ईरान में उसके तटीय क्षेत्रों पर जोरदार मिसाइल हमले कर युद्ध की आग को और भड़का दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस कार्रवाई को ‘आत्मरक्षा’ बताते हुए कहा है कि यह कदम युद्धविराम के दौरान अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए उठाया गया था।

इस बीच, इजरायल ने भी लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के खिलाफ हमलों को और तेज करने का ऐलान किया है, जिससे शांति वार्ता खटाई में पड़ती दिख रही है।

1. दोहा में वार्ता, ईरान के तट पर अमेरिकी बमबारी

सोमवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल कतर की राजधानी दोहा पहुंचा। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से जारी युद्ध को रोकना है।

लेकिन वार्ताकारों के दोहा पहुंचते ही अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास स्थित प्रमुख नौसैनिक अड्डे बंदर अब्बास के पास भीषण हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिंस ने बयान जारी कर कहा:

“अमेरिकी बलों ने दक्षिण ईरान में मिसाइल लॉन्च साइटों और समुद्र में बारूदी सुरंगें (Mines) बिछाने की कोशिश कर रही ईरानी नौकाओं को निशाना बनाया है। सेंट्रल कमांड मौजूदा युद्धविराम के दौरान संयम बरतते हुए अपने बलों की रक्षा करना जारी रखेगा।”

2. होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा ठप

इस पूरे युद्ध का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी रहा है, जिसे ईरान ने फरवरी से बंद कर रखा है। युद्ध से पहले दुनिया का एक-चौथाई तेल और गैस इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता था।

  • क्रूड ऑयल की कीमतें: सोमवार को शांति वार्ता की खबरों के बीच वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 6.5% गिरकर 94 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया। हालांकि, यह कीमत युद्ध-पूर्व के स्तर ($72 प्रति बैरल) से अब भी 30% अधिक है।
  • शिपिंग संकट: विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आज समझौता हो भी जाए, तो खाड़ी क्षेत्र में फंसे लगभग 1,500 वाणिज्यिक जहाजों को निकालने और यातायात सामान्य करने में 30 से 45 दिन का समय लगेगा। ईरान द्वारा समुद्र में बिछाई गई अत्याधुनिक बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी को हफ्तों तक माइनस्वीपर्स (Surung Hataane Vaale Jahaaz) तैनात करने होंगे।

3. यूरेनियम और परमाणु कार्यक्रम पर डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि ईरान के साथ कोई भी समझौता तभी होगा जब वह बेहद सख्त शर्तों को मानेगा। ट्रंप ने कहा:

“ईरान के साथ सौदा या तो बहुत शानदार और सार्थक होगा, या फिर कोई सौदा नहीं होगा। ईरान को अपना संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) या तो अमेरिका को सौंपना होगा या फिर तटस्थ गवाहों के सामने उसे पूरी तरह नष्ट करना होगा।”

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान के पास इस समय 60% तक संवर्धित लगभग 970 पाउंड यूरेनियम का भंडार है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट किया कि फिलहाल बातचीत केवल युद्ध रोकने पर केंद्रित है और परमाणु कार्यक्रम के तकनीकी विवरणों पर कोई चर्चा नहीं हो रही है।

4. अब्राहम अकॉर्ड्स का विस्तार और रिपब्लिकन दबाव

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस शांति समझौते के तहत सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान जैसे देशों पर इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने के लिए ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ (Abraham Accords) में शामिल होने का दबाव बनाया है। उन्होंने कहा कि जो देश इसमें शामिल नहीं होंगे, उन्हें इस समझौते का हिस्सा नहीं होना चाहिए।

हालांकि, भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गाजा और लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों के चलते सऊदी अरब या कतर का अभी इजरायल को मान्यता देना लगभग असंभव है। लेकिन ट्रंप का यह प्रस्ताव अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के उन कट्टरपंथियों (Iran Hawks) को शांत करने के लिए है जो ईरान के साथ किसी भी नरम समझौते का विरोध कर रहे हैं। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप के इस विचार को “शानदार” बताया है।

5. इजरायल और लेबनान में हिजबुल्लाह का मोर्चा

एक तरफ अमेरिका ईरान से सीधे युद्ध रोकने की जुगत में है, वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान में ईरान के सहयोगी संगठन हिजबुल्लाह के खिलाफ युद्ध को और आक्रामक करने का संकल्प लिया है।

नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश में कहा:

“हम हिजबुल्लाह के साथ सीधे युद्ध में हैं। पिछले कुछ हफ्तों में हमारे बलों ने हिजबुल्लाह के 600 से अधिक लड़ाकों को ढेर किया है। हम अपना पैर एक्सीलेटर से हटाने नहीं जा रहे हैं, बल्कि इसे और दबाएंगे।”

इजरायली वायुसेना ने सोमवार को तटीय शहर टायर (Tyre) और नबातियेह सहित लेबनान में हिजबुल्लाह के 70 से अधिक ठिकानों पर बमबारी की। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मार्च से अब तक इजरायली हमलों में 3,185 लोग मारे जा चुके हैं और 9,600 से अधिक घायल हुए हैं। उधर, हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम ने अमेरिकी-इजरायली योजना के खिलाफ लेबनानी जनता से अपनी ही सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया है, जिसकी अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और मार्को रुबियो ने कड़ी निंदा की है।

6. वैश्विक कूटनीति: चीन और पाकिस्तान की भूमिका

इस पूरे संकट में पाकिस्तान और चीन पर्दे के पीछे से मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की।

चीन, जो ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, उसने अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता को सुगम बनाने में पाकिस्तान की सक्रिय और सकारात्मक भूमिका की सराहना की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत यात्रा के दौरान संकेत दिए कि स्थितियां बेहद नाजुक हैं और दोनों पक्ष एक ‘समय-सीमित’ अंतरिम समझौते की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन अंतिम हस्ताक्षर कब होंगे, यह अभी तय नहीं है।

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