पूर्व सैनिकों और वीर नारियों की समस्याओं के समाधान के लिए गढ़वाल राइफल्स का ‘सतत मिलाप’ अभियान
गढ़वाल मंडल में 30 नवंबर तक भ्रमण करेंगे 22 दल, पेंशन संबंधी समस्याओं के समाधान के साथ विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की देंगे जानकारी
देहरादून, 3 नवंबर। गढ़वाल राइफल्स ने पूर्व सैनिकों, वीर नारियों, पारिवारिक पेंशनभोगियों तथा शहीद सैनिकों के आश्रितों की समस्याओं के समाधान के लिए ‘सतत मिलाप’ अभियान शुरू किया है। इसके अंतर्गत गढ़वाल राइफल्स के 22 दल एक से 30 नवंबर तक गढ़वाल मंडल के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों से संपर्क स्थापित करेंगे। यह अभियान लैंसडौन स्थित गढ़वाल राइफल्स अभिलेख कार्यालय की देखरेख में संचालित किया जा रहा है।
गढ़वाल रेजिमेंट की इस विशेष पहल का उद्देश्य पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और शहीदों के आश्रितों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखना तथा उनकी पेंशन एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित समस्याओं का यथासंभव मौके पर समाधान करना है। अभियान के अंतर्गत गढ़वाल राइफल्स की विभिन्न बटालियनों के दल अपने आवंटित क्षेत्रों में जिला सैनिक कल्याण कार्यालयों और विकासखंड स्तर के प्रतिनिधियों के सहयोग से पेंशनभोगियों से संपर्क करेंगे।
अभियान के दौरान पूर्व सैनिकों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को जीवन प्रमाणपत्र भरने में सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त उनके बच्चों के लिए उपलब्ध शिक्षा अनुदान तथा अन्य कल्याणकारी सुविधाओं की जानकारी भी दी जाएगी। दल के सदस्य गढ़वाल राइफल्स अभिलेख कार्यालय द्वारा संचालित ‘प्रोजेक्ट समीक्षा’ और ‘संकल्प पोर्टल’ के संबंध में भी पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को जागरूक करेंगे।
अभियान में युद्ध के दौरान घायल हुए पूर्व सैनिकों की आवश्यकताओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिन युद्ध घायल पूर्व सैनिकों को चलने-फिरने के लिए सहायक उपकरणों की आवश्यकता है और अब तक ऐसे उपकरण उपलब्ध नहीं हो पाए हैं, उनसे आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर आगे की कार्रवाई के लिए अभिलेख कार्यालय भेजे जाएंगे।
गढ़वाल राइफल्स के प्रभारी अभिलेख अधिकारी और मुख्य अभिलेख अधिकारी ने गढ़वाल मंडल के सभी पूर्व सैनिकों, वीर नारियों, पारिवारिक पेंशनभोगियों तथा शहीदों के आश्रितों से इस अभियान का अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संबंधित क्षेत्रों में पहुंचने वाले सतत मिलाप दलों से संपर्क कर अपनी समस्याएं उनके समक्ष रखी जा सकती हैं, ताकि उनके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

