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बागवानी से 3 हजार करोड़ कमाने के लक्ष्य पर पानी फेर रहे जंगली जानवर

–दिग्पाल गुसांईं —
कास्तकारों की आय दोगुनी करने के बाद अब सरकार ने बागवानी से तीन हजार करोड़ की आमदनी का नारा देना शुरू कर दिया है। लेकिन पहाड़ों में हालात इतने नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं कि हाड़ तोड़ मेहनत करने के बाद फल मिलने से पहले ही बंदर व जंगली जानवर कास्तकारों के अरमानों में पानी फेर दे रहे हैं।

अलग राज्य बनने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि कास्तकारी के क्षेत्र में कास्तकारों की सुविधा के अनुसार ठोस कदम उठाए जाएंगे लेकिन राज्य बनने के 22 साल बीत जाने के बाद भी ऐसा होता नहीं दिखाई दे रहा है। राज्य में सरकार किसी की भी रही हो किसी ने भी कास्तकारों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया है। अब हालात इतने नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं कि पहाड़ का जनमानस जमीन से दूर भागने लगा है।

कुछ साल पहले सरकारों ने सिंचाई बढ़ाओ खुशहाली लाओ का नारा दिया। तब समझा जा रहा था कि सरकार कास्तकारी को गंभीरता से ले रही है। लेकिन अलग राज्य बनने के बाद सिंचाई नहरों की खस्ता हालत किसी से छिपी नहीं है। कास्तकार आज भी सिंचाई के लिए शासन प्रशासन से गुहार लगाते थक गए हैं लेकिन हर कोई धन का रोना रो रहा है। अब यह नरा भी केवल सिंचाई विभागों के कार्यालयों की शोभा बढ़ा रहा है। इसके बाद कास्तकारों की आय दोगुनी करने का नारा तो दिया गया लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में जिस प्रकार से बंदरों व जंगली जानवरों ने फसलों को बरबाद करना शुरू किया है उससे कास्तकारों की आय दोगुनी तो रही दूर कास्तकारों ने खेती से दूरी बना ली है।

हालात इतने नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं कि पहाड़ का कास्तकार भी राशन के लिए कंट्रोल की दुकानों पर लाइन लगाकर खड़ा होने को मजबूर है। सब्जियों के लिए मैदानी क्षेत्रों से आने बाली जहरीली सब्जियों पर निर्भर हो गया है। अब सरकार ने बागवानी से तीन हजार करोड़ रुपए की आमदनी का नारा देना शुरू कर दिया है। क्या यह नारा हकीकत में बदलेगा या सिंचाई बढ़ाओ खुशहाली लाओ और कास्तकारों की आमदनी दोगुनी करने के नारों के जैसे ही इस नारे का भी हश्र हो जाएगा। प्रगतिशील कास्तकार विजया गुसाईं, कंचन कनवासी,राजे सिंह कनवासी, जशदेई कनवासी, पूनम थपलियाल, उर्मिला धरियाल आदि का कहना है कि सरकार अगर सिंचाई नहरों की हालत ठीक करने के साथ ही बंदरों व जंगली जानवरों से निजात दिला दे तो कास्तकार पुनः खेती बाड़ी का रूख कर सकते हैं।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश नेगी का कहना है कि सरकार अंधेरे में ठोल पीट रही है पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों व जंगली जानवरों ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर गई है। इनके निवारण के बिना कोई भी योजना लागू करना बेईमानी होगा।

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