क्या आज़ादी के अमृत महोत्सव पर सरकार को आएगी गुमनाम हो चुके शहीदों की याद?

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-थराली से हरेंद्र बिष्ट

प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए एक वीर की शहादत के 104 वर्षों बीत जाने के बाद भी उसके परिजनों को गुमनामी की जिंदगी जीनी पढ़ रही हैं।आज जबकि देश आजादी की 75 वी वर्षगांठ मनाने की देहलीज पर आ गया हैं, ऐसे में भारत सरकार के आजादी के गुमनाम नायकों की याद में इस शहीद के परिजनों को भी नई पहचान मिल पाएंगे एक प्रश्न बन कर उभरने लगा हैं।
दरअसल थराली विकासखंड के अंतर्गत सोल पट्टी के गूमण गांव में जन्मे शीशराम पुत्र विश्वरूप देव ने 1914 से 19 तक जारी प्रथम विश्व युद्ध में भारत की ओर से विदेशी सरजमीं पर युद्ध लड़ने वाले 11 लाख भारतीय सैनिकों में सामिल थें। जिन्होंने ब्रिटिश सेना के साथ मिलकर देश को आजाद कराने के आश्वासन पर विश्व युद्ध में भाग लिया था। किंतु जब युद्ध समाप्त हुए तों करीब 74 हजार भारतीय सैनिक लापता थें। जिनमें शीशराम भी सामिल थें। युद्ध समाप्ति के बाद अन्य सैनिकों की तरह ही शीशराम को भी शहीद माना गया।और ब्रिटिश सरकार ने शहीद को फ्रीडम आफ होनर्स का खिताब देते हुए शीशराम के परिजनों को बकायदा एक मैडल भेजा था। जोकि आज भी शहीद के परिजनों के घर के अंदर स्थित पूजा घर में सुरक्षित हैं।
आजादी के 75 वर्षों के बाद भी शहीदों शीशराम के परिजनों को जो सम्मान मिलना चाहिए था, हमारी सरकार उसे आज तक भी नही दें पाई हैं। शहादत के 104 वर्षों के बाद अब शीशराम के प्रपौत्रों भगवती प्रसाद चंदोला एवं भानु चंदोला को अपने दादा की शहादत का पता चला तों उन्होंने शहीद की स्मृति की चिरस्थाई रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट,प्रदेश के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज आदि को पत्र भेजें हैं। शहीद के शहादत का प्रचार-प्रसार करने एवं परिजनों अन्य शहीदों की तरह ही अनुमन्य सरकार सहायता एवं सहयोग दिए जाने की मांग की हैं। शहीद प्रपौत्रों के पत्र पर मंत्री गणेश जोशी ने सचिव सैनिक कल्याण एवं मंत्री सतपाल महाराज के द्वारा केंद्रीय राज्य रक्षा मंत्री अजय भट्ट को शदीद परिजनों को अन्य शहीदों के परिजनों की भांति सम्मान व सहयोग राशि देने हेतु अपनी सिफारिशें की हैं।अब देखना है कि प्रथम विश्व युद्ध के गुमनाम नायकों को सरकार सम्मान दें पाती हैं या नही।

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