गढ़वाल विश्वविद्यालय में विश्व पर्यटन दिवस पर ‘सैर सलीका पुरस्कार’, जिम्मेदार पर्यटन के योगदानकर्ताओं का सम्मान

श्रीनगर (गढ़वाल), 27 सितंबर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में विश्व पर्यटन दिवस धूमधाम से मनाया गया। विश्वविद्यालय के पर्वतीय पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र की ओर से आयोजित तीन दिवसीय पर्यटन उत्सव के अंतिम दिन विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में मुख्य समारोह हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह का प्रमुख आकर्षण पर्यटन क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों और संस्थाओं का सम्मान रहा। जिम्मेदार और उद्देश्यपूर्ण पर्यटन को बढ़ावा देने तथा पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समाज, संस्कृति, पर्यावरण और आजीविका के क्षेत्र में योगदान के लिए चयनित व्यक्तियों और संस्थाओं को ‘सैर सलीका पुरस्कार’ प्रदान किए गए।

सम्मानित होने वालों में खोली होम स्टे देहरादून के शैलेंद्र रावत, ‘साइकिल सखी’ चांदनी अरोड़ा, विंसर पब्लिकेशन की कीर्ति नवानी, उत्तराखंडी टूरिज्म एसोसिएशन, उत्तरांश, चित्रकार मुकुल बडोनी, ‘पेड़ वाले गुरुजी’ धन सिंह, संदीप गुसाईं तथा ‘संवेदना से सेवा तक’ के अनुज प्रथम शामिल रहे। आयोजकों के अनुसार इन लोगों और संस्थाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में पर्यटन को केवल भ्रमण और व्यवसाय तक सीमित न रखकर उसे स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सरोकार और जिम्मेदार यात्रा से जोड़ने का प्रयास किया है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में देश के पहले ‘लेखक गांव’ की निदेशक विदुषी निशंक ने युवाओं के साथ संवाद किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे अपने जीवन में रचनात्मक और उद्देश्यपूर्ण लक्ष्य निर्धारित करें तथा सकारात्मक जीवनशैली अपनाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं को प्रकृति, संस्कृति और संस्कारों से जुड़कर अपने व्यक्तित्व को निखारना चाहिए और अपनी ऊर्जा को सदैव रचनात्मक कार्यों की दिशा में लगाना चाहिए।
विदुषी निशंक ने कहा कि व्यक्तित्व विकास केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। व्यक्ति की कार्यशैली, उसकी दिनचर्या, सोच और लक्ष्य के बीच बेहतर समन्वय सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने युवाओं से अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का उपयोग समाज और देश के लिए सार्थक कार्यों में करने का आग्रह किया।
तीन दिवसीय पर्यटन उत्सव के दौरान छात्र-छात्राओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों का आयोजन किया गया। अंतिम दिन इन प्रतियोगिताओं में चयनित प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रस्तुतियों ने समारोह को आकर्षक बनाया और छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ इनमें भागीदारी की।
आयोजकों ने कहा कि पर्यटन उत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यटन के बदलते स्वरूप से परिचित कराने के साथ ही उन्हें जिम्मेदार पर्यटन, स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन आधारित रोजगार की संभावनाओं के प्रति जागरूक करना भी था। पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन के विस्तार के साथ स्थानीय संसाधनों और संस्कृति के संरक्षण की जिम्मेदारी भी बढ़ती है। इसी सोच को ‘सैर सलीका पुरस्कार’ के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में पर्वतीय पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रोफेसर राकेश ड्योढ़ी, पर्यटन प्रबंधन की डीन प्रोफेसर रश्मि ड्योढ़ी, विश्वविद्यालय के नियुक्ति डीन प्रोफेसर मोहन पंवार, वित्त अधिकारी डॉ. अजय मोहंती सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, अधिकारी, छात्र संघ के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
