यूएपीए के तहत 23 और आतंकवादी घोषित, आतंक के नेटवर्क पर केंद्र सरकार का बड़ा प्रहार
17 पाकिस्तानी और छह भारतीय नागरिक सूची में शामिल; आतंकी फंडिंग, घुसपैठ और भर्ती नेटवर्क पर कसेगा शिकंजा
नई दिल्ली, 4 जुलाई । आतंकवाद के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत 23 और व्यक्तियों को आधिकारिक रूप से ‘आतंकवादी’ घोषित किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह कार्रवाई केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में की है। सरकार का कहना है कि इस कदम से आतंकी संगठनों के वित्तीय नेटवर्क, भर्ती तंत्र, सीमा पार संचालित मॉड्यूल तथा उनके सहयोगियों पर प्रभावी कानूनी कार्रवाई का रास्ता और मजबूत होगा।
गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े 23 खूंखार आतंकवादियों को यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश और देशवासियों की सुरक्षा के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, घोषित किए गए इन 23 आतंकवादियों में 17 पाकिस्तानी नागरिक हैं, जबकि छह भारतीय नागरिक हैं। हालांकि सभी वर्तमान में पाकिस्तान अथवा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) से भारत विरोधी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। इन पर आतंकी हमलों की साजिश रचने, सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ कराने, ड्रोन के माध्यम से हथियार एवं गोला-बारूद की तस्करी, आतंकवादी संगठनों के लिए धन जुटाने, युवाओं की भर्ती करने तथा भारत विरोधी प्रचार अभियान चलाने जैसे गंभीर आरोप हैं।
मंत्रालय के अनुसार सूची में शामिल अधिकांश आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जमात-उद-दावा (JuD), हरकत-उल-मुजाहिदीन (HuM), द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF), पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML), अल-कायदा तथा आईएसआईएस जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े रहे हैं। इनमें कई ऐसे नाम भी हैं, जिन पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हुए बड़े आतंकी हमलों की साजिश रचने, लॉन्चिंग पैड संचालित करने, आतंकियों को प्रशिक्षण देने और सीमा पार से आतंकी गतिविधियों का समन्वय करने के आरोप हैं।
गृह मंत्रालय का कहना है कि इन व्यक्तियों को औपचारिक रूप से आतंकवादी घोषित किए जाने से उनकी संपत्तियों को जब्त करने, वित्तीय लेन-देन पर रोक लगाने, यात्रा और आवाजाही पर नियंत्रण लगाने तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को गति मिलेगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिलेगी, जिससे आतंकी नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।
वर्ष 2019 में यूएपीए में संशोधन के बाद केंद्र सरकार को किसी संगठन के अलावा किसी व्यक्ति को भी आतंकवादी घोषित करने का अधिकार प्राप्त हुआ था। इस संशोधन के बाद अब तक कुल 57 व्यक्तियों को यूएपीए की धारा-35 के तहत आतंकवादी घोषित किया जा चुका है। ताजा अधिसूचना के साथ इस सूची में 23 नए नाम जुड़ गए हैं।
गृह मंत्रालय का मानना है कि यह कार्रवाई केवल कानूनी औपचारिकता नहीं है, बल्कि आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को कमजोर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का कहना है कि आतंकवाद, उसके वित्तपोषण और सीमा पार से संचालित नेटवर्क के खिलाफ आगे भी इसी प्रकार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
