पिछले साढे़ तीन सालों की 4244.5 करोड़ की सांसद निधि नहीं जारी हुई : 2022-23 की केवल 21 प्रतिशत सांसद निधि हुई जारी

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-उत्तराखंड हिमालय ब्यूरो

Advocate Nadim uddin RTI activist

देहरादून, 17 नवंबर । लोकसभा सांसदों के 2889 करोड़ व राज्यसभा सांसदों के 1355.5 करोड़ जारी होने को शेष
सभी राजनैतिक दल जितना ही जनसेवा का दावा करें लेकिन दलों के सांसदों की अपनी सांसद निधि के प्रति उदासीनता कुछ और ही बयान करती हैै। विभिन्न सांसदों की सांसद निधि की किस्ते पिछली सांसद निधि किस्त के खर्च सम्बन्धी प्रमाण, ऑडिट रिपोर्ट आदि प्राप्त न होने जारी नहीं हुई है। यह खुलासा सूचना अधिकार के अन्तर्गत सरकार के सांसद निधि के नोड विभाग संख्यिकी एवं क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुुआ हैै।

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम को उपलब्ध विवरण के अनुसार 9 नवम्बर 2022 तक जारी न होने वाली कुल 4244.5 करोड़ की सांसद निधि में 2889 करोड़ लोक सभा सांसदों की तथा 1355.5 करोड की राज्य सभा सांसदों की सांसद निधि शामिल है। श्री नदीम को उपलब्ध सूचना के अनुसार 2019-22 तक साढ़े तीन वर्ष की अवधि की 53.89 प्रतिशत सांसद निधि जारी हुई है जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष की 9 नवम्बर तक केवल 21 प्रतिशत सांसद निधि ही जारी हुुई हैै। सांसद निधि खर्च करने के मामले में राज्य सभा सांसदों से लोक सभा सांसद आगे है जहां राज्य सभा सांसदों की 49.66 प्रतिशत सांसद निधि जारी हुई है, वहीं लोकसभा सांसदोें की 55.65 प्रतिशत सांसद निधि जारी हुई हैै।

वर्ष 2019-22 की सांसद निधि 60 प्रतिशत से अधिक जारी होने वाले राज्यों में नागालैंड (79 प्रतिशत), मिजोरम (69), आसाम (68), छत्तीसगढ़ (66), मेघालय (65) मध्य प्रदेश (62) पंजाब (61 प्रतिशत) शामिल है। जबकि 51 से 60 प्रतिशत तक जारी होने वाले राज्यों में अरूणाचल प्रदेश (60 प्रतिशत), गुजरात (59), चण्डीगढ़ (58), दमन एवं दीव (58), सिक्किम (58), उड़ीसा (58), जम्मू कश्मीर (57), हिमाचल प्रदेश (56), उत्तराखंड (56), उ0प्र0 (56), कर्नाटक (54), मनोनीत सांसद (54), तमिलनाडु (53), झारखण्ड (53), मणिपुर (53), त्रिपुरा (53) तथा पश्चिम बंगाल (52 प्रतिशत) शामिल हैै।

जबकि 41 से 50 प्रतिशत तक जारी होने वाले राज्यों में राजस्थान (50 प्रतिशत), पण्डिचेरी (50), महाराष्ट्र (49), हरियाणा (48), तेलंगाना (46), आंध्र प्रदेश (45) तथा अण्डमान निकोबार द्वीप (42 प्रतिशत) शामिल हैै।
जबकि 40 व कम प्रतिशत तक जारी होने वाले राज्यों में गोवा (40 प्रतिशत), दिल्ली (38), दादर एवं नागर हवेली (37) तथा लक्ष्यद्वीप (21 प्रतिशत) शामिल हैै।

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