सुपरबग्स के खिलाफ भारत की बड़ी कामयाबी: स्वदेशी एंटीबायोटिक ‘ज़ैनिच’ ने खोला नया मोर्चा
नई दिल्ली: चिकित्सा और विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने एक ऐतिहासिक वैश्विक उपलब्धि हासिल की है। भारतीय फार्मा कंपनी वोकहार्ट द्वारा पूरी तरह से देश में ही खोजी और विकसित की गई एक नई एंटीबायोटिक दवा ‘ज़ैनिच’ (Zaynich) ने दुनिया के सबसे खतरनाक और जानलेवा सुपरबग्स के खिलाफ एक नया मोर्चा खोल दिया है। इस अभूतपूर्व स्वदेशी खोज को अमेरिकी दवा नियामक, यूएसएफडीए (USFDA) द्वारा ‘ब्रेकथ्रू ड्रग’ के रूप में मान्यता दी गई है, जो यह साबित करता है कि वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन चुके एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (दवाओं के बेअसर होने की स्थिति) से निपटने में यह दवा एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है।
यह पूरी रिपोर्ट उन मरीजों के लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आई है, जो अस्पतालों में लगने वाले ऐसे गंभीर संक्रमणों से जूझ रहे हैं जिन पर दुनिया की मौजूदा कोई भी एंटीबायोटिक दवा काम नहीं कर रही थी। तकनीकी रूप से यह दवा सेफेपाइम और जिडेबैक्टम का एक अनूठा संयोजन है। यह मुख्य रूप से उन मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट (MDR) बैक्टीरिया को निशाना बनाती है जो मूत्र मार्ग के गंभीर संक्रमण (UTI), निमोनिया और रक्त के संक्रमण (सेप्सिस) जैसी घातक बीमारियों का कारण बनते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) लंबे समय से चेतावनी दे रहा है कि सुपरबग्स के कारण आने वाले समय में मामूली संक्रमण भी जानलेवा हो सकते हैं, और ऐसे दौर में भारत की यह खोज वैश्विक चिकित्सा जगत को एक बड़ा संबल देने जा रही है।
इस खोज का एक और सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी लागत और आम लोगों तक पहुंच है। वर्तमान में अमेरिका और यूरोपीय देशों में इस तरह के अत्यधिक गंभीर संक्रमणों के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली विदेशी दवाओं का खर्च दस हजार से बारह हजार डॉलर यानी करीब आठ से दस लाख रुपये तक आता है, जो आम भारतीय मरीज की पहुंच से पूरी तरह बाहर है। चूंकि ‘ज़ैनिच’ का आविष्कार और विकास पूरी तरह भारत में हुआ है, इसलिए कंपनी इसे बेहद किफायती और कम कीमतों पर उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यह दवा न केवल हजारों मरीजों की जान बचाएगी, बल्कि भारत को केवल सस्ती जेनेरिक दवाएं बनाने वाले देश की छवि से बाहर निकालकर दुनिया के सामने एक प्रमुख वैज्ञानिक इनोवेटर के रूप में स्थापित करेगी। इस जीवन रक्षक दवा के अगले साल तक बाजार में पूरी तरह उपलब्ध होने की उम्मीद जताई जा रही है
