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उत्तराखंड में राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण की 81वीं आवृत्ति शुरू, प्रवासन, रोजगार और कृषि अर्थव्यवस्था पर जुटेंगे आंकड़े

देहरादून, 13 जुलाई। उत्तराखंड में सामाजिक एवं आर्थिक विकास से जुड़ी नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से अर्थ एवं संख्या निदेशालय (नियोजन विभाग) ने सोमवार से दून विश्वविद्यालय, मोथरोवाला में राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (एनएसएस) की 81वीं आवृत्ति के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं कार्यशाला का शुभारंभ किया। 13 से 15 जुलाई तक चलने वाली इस कार्यशाला का आयोजन भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सामाजिक-आर्थिक सांख्यिकी प्रभाग के सहयोग से किया जा रहा है।

कार्यशाला का उद्घाटन अर्थ एवं संख्या निदेशालय के निदेशक सुशील कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने बताया कि एनएसएस की 81वीं आवृत्ति के तहत प्रदेश के सभी 13 जनपदों में विभागीय कार्मिक सर्वेक्षण करेंगे। इसके माध्यम से प्रवासन, ऋण, निवेश और अन्य सामाजिक-आर्थिक पहलुओं से जुड़े विस्तृत आंकड़े एकत्र किए जाएंगे, जो राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों एवं विकास योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण आधार बनेंगे।

उप निदेशक डॉ. इला पंत बिष्ट ने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान तीन अलग-अलग अनुसूचियों के माध्यम से परिवारों से विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें परिवार के सदस्यों के प्रवासन की स्थिति, पिछले 365 दिनों में प्राप्त रेमिटेंस, रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियां, कृषि परिवारों की आय, उत्पादन परिसंपत्तियां, कृषि पद्धतियां, आधुनिक तकनीकों का उपयोग, गैर-वित्तीय परिसंपत्तियां तथा ऋणग्रस्तता से संबंधित आंकड़े शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि यह सर्वेक्षण जुलाई 2026 से 30 जून 2027 तक पूरे प्रदेश में संचालित किया जाएगा।

कार्यशाला में प्रदेश के सभी जनपदों, मंडलों और विकासखंडों से आए अधिकारियों के साथ भारत सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली, डिजिटल डेटा संकलन, गुणवत्ता नियंत्रण तथा अन्य तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

इस अवसर पर एफओडी के केदार नाथ वर्मा, अपर निदेशक पंकज नैथानी, संयुक्त निदेशक डॉ. दिनेश चंद बड़ोनी, उप निदेशक ललित मोहन जोशी एवं निर्मल कुमार शाह, अपर सांख्यिकीय अधिकारी नरेंद्र सिंह, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी नीरज प्रसाद सहित प्रदेश के सभी जनपदों, मंडलों और विकासखंडों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अर्थ एवं संख्याधिकारी अशोक कुमार ने किया।

सर्वेक्षण से राज्य में प्रवासन, रोजगार, कृषि अर्थव्यवस्था, आय, परिसंपत्तियों और ऋण की वास्तविक स्थिति का समग्र आकलन उपलब्ध होगा, जिससे भविष्य की विकास योजनाओं और नीति निर्माण को अधिक सटीक एवं प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

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