सुरक्षा

भारतीय नौसेना में माहे शामिल होने के लिए तैयार

 

With over 80 percent indigenous content, the Mahe-class showcases India’s growing mastery in warship design, construction and integration. Named after the historic coastal town of Mahe on the Malabar Coast, the ship’s crest features an ‘Urumi’, the flexible sword of Kalaripayattu, symbolising agility, precision, and lethal grace.

 

नयी दिल्ली, 23 नवंबर।  भारतीय नौसेना 24 नवंबर2025 को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में माहे श्रेणी के पहले पनडुब्बी रोधी युद्धक उथले जलयान (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) को शामिल करेगी ।

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2190563

पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन द्वारा आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी करेंगे ।

माहे का जलावतरण स्वदेशी उथले पानी के लड़ाकू विमानों की एक नई पीढ़ी के आगमन का प्रतीक होगा – आकर्षक, तेज़ और पूरी तरह से भारतीय। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ, माहे-श्रेणी युद्धपोत डिज़ाइन, निर्माण और एकीकरण में भारत की बढ़ती महारत को दर्शाता है।

वह पश्चिमी समुद्र तट पर एक साइलेंट हंटर के रूप में काम करेगी – जो आत्मनिर्भरता से प्रेरित होगी और भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए समर्पित होगी।

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