एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) : स्थानीय उत्पाद मुहल्लों से लेकर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक
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मुख्य विशेषताएं
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–A PIB FEATURE-
उत्तर प्रदेश के बीचों-बीच मुरादाबाद शहर बसा है, जहाँ पीढ़ियों से कारीगर पिघली हुई धातु से खूबसूरत पीतल का सामान बनाते आ रहे हैं। दशकों से, ये कारीगर अपने परिवार द्वारा चलाए जा रहे वर्कशॉप में अपनी कला को निखार रहे थे, आमतौर पर अपने शहर के अलावा बाहर की दुनिया के लिए अनजान थे।
एक नए अध्याय की 2018 में शुरुआत हुई। राज्य के एक नवोन्मेषी प्रयोग के अंतर्गत, एक नई साहसिक पहल के अंतर्गत मुरादाबाद के पीतल के सामान को जिले के प्रतीकात्मक उत्पाद के रुप में चुना गया : वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी)।
यह विचार सरल, फिर भी क्रांतिकारी था – राज्य के प्रत्येक जिले में एक अनोखे उत्पाद की पहचान करना, उसे ब्रांडिंग प्रदान करना, बाजार तक पहुंच, संस्थागत सहायता और पहचान देना, और उसके पीछे के समुदाय को सशक्त बनाना। आज, ये शिल्प अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनियों में दिखाए जाते हैं। स्थानीय गर्व बढ़ा, आमदनी बढ़ी, और एक ऐसा जिला जो कभी आर्थिक गुमनामी में था, वह आत्मनिर्भर समृद्धि का मॉडल बन गया।
मुरादाबाद कोई अपवाद नहीं था; यह एक बहुत बड़ी कहानी का पहला अध्याय बन चुका है। दिसम्बर 2025 तक, ओडीओपी, को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया गया है और 770 से ज़्यादा जिलों तक बढ़ाया गया है, जिससे लाखों उद्यमियों, कारीगरों और किसानों के जीवन पर असर पड़ा है। उत्तर प्रदेश में हुई शुरूआत, आज स्थानीय आर्थिक बदलाव में भारत की सबसे मशहूर पहल है।
| ओडीओपी विकास को बढ़ावा दे रहा है
• संतुलित क्षेत्रीय विकास • कारीगरों और उत्पादकों का सशक्तिकरण • निर्यात को बढ़ावा • विरासत का संरक्षण • आर्थिक प्रभाव • रोज़गार सृजन • वैश्विक पहचान |
ओडीओपी का मकसद हर ज़िले से एक अनोखे उत्पाद की पहचान करके और उसकी ब्रांडिंग करके संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना है, साथ ही समन्वय के साथ संस्थागत सहायता के ज़रिए कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों के लिए मार्केट तक पहुंच को मज़बूत करना है। इस पहल ने आमदनी बढ़ाकर, मार्केट तक पहुंच का विस्तार करके और ज़िला-स्तरीय मूल्य श्रृंखला में रोज़गार के अवसर पैदा करके ठोस आर्थिक प्रभाव डाला है। ब्रांडिंग, प्रदर्शनियों और ग्लोबल प्लेटफॉर्म के ज़रिए, ओडीओपी ने भारतीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई है, साथ ही टिकाऊ तरीकों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी सहयोग प्रदान किया है।
| विकास के इंजन के रूप में जिले |
डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआईआईटी) द्वारा शुरू की गई ओडीओपी पहल का मकसद हर जिले की अनोखी आर्थिक क्षमता को सामने लाना, संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना और स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों में मुकाबला करने के लिए तैयार करना है।
सांस्कृतिक विरासत को भारत की व्यापक विकास प्राथमिकताओं के साथ जोड़कर, यह पारंपरिक कौशलों को एक टिकाऊ आर्थिक इंजन में बदल देता है।
इस पहल का मकसद है:
| संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना | क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए हर जिले की आर्थिक ताकत को प्रकट करना। |
| रोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को सक्षम करना | किसानों, कारीगरों, बुनकरों और स्थानीय उत्पादकों को सशक्त बनाकर आजीविका के अवसर पैदा करना, जिससे आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को आगे बढ़ाया जा सके। |
| राष्ट्रीय विनिर्माण मिशनों के साथ मिलाना | घरेलू क्षमताओं और ग्लोबल प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए मेक इन इंडिया, वोकल फॉर लोकल और डिस्ट्रिक्ट्स ऐज़ एक्सपोर्ट हब जैसी पहलों से जोड़ना। |
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बाजार पहुंच बढ़ाना |
डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए मार्केट लिंकेज का विस्तार, जिसमें गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पर एक डेडिकेटेड ओडीओपी स्टोरफ्रंट और बिक्री और पहुंच बढ़ाने के लिए राज्य-स्तरीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म शामिल हैं। |
| ओडीओपी के तहत संस्थागत शासन और उत्पाद चयन ढांचा |
ओडीओपी की सफलता इसके लचीले लेकिन स्ट्रक्चर्ड गवर्नेंस मॉडल में है। इसे केन्द्र सरकार के मंत्रालयों, राज्य सरकारों और ज़िला प्रशासनों के मिलकर किए गए प्रयासों से लागू किया जाता है।
ओडीओपी पहल के तहत, राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा ज़मीनी स्तर पर मौजूदा इकोसिस्टम के आधार पर उत्पाद चुने जाते हैं और अंतिम सूची डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआईआईटी) को भेजी जाती है।
डीपीआईआईटी के डिजिटल पोर्टल पर 1,200 से ज़्यादा ओडीओपी उत्पादों की सूची रखी गई है, जिनमें टेक्सटाइल और खाने-पीने की चीज़ों से लेकर हस्तशिल्प और खनिज तक के क्षेत्र शामिल हैं।
| उत्तर प्रदेश: देश के लिए एक मॉडल |
गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम)-ओडीओपी बाज़ार जैसी ई-कॉमर्स पहल के ज़रिए, भारत के बेहतरीन ओडीओपी उत्पाद बड़े बाज़ार में दिखाए जा रहे हैं, जिससे कारीगर सशक्त बन रहे हैं और बाज़ार तक उनकी पहुँच बढ़ रही है।
उत्तर प्रदेश, जो ओडीओपी पहल का अग्रणी राज्य है, ने इस कार्यक्रम के तहत महत्वपूर्ण आर्थिक बदलाव देखे हैं। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2025 में, ओडीओपी को अभूतपूर्व राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान मिली, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बताया कि कैसे इस पहल ने उत्तर प्रदेश के ज़िला-विशिष्ट उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचाने में मदद की है। यूपीआईटीएस 2025 में ओडीओपी पवेलियन में 466 स्टॉल थे, जिनसे ₹20.77 करोड़ के बिज़नेस लीड्स और डील हुईं।
इसी तरह, प्रयागराज में महाकुंभ 2025 के दौरान, ओडीओपी पारंपरिक कारीगरी के लिए एक प्रमुख प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा। एक खास 6,000 वर्ग मीटर के प्रदर्शनी क्षेत्र में देश भर के कारीगर एक साथ आए, जिन्होंने बनारसी ब्रोकेड, कुशीनगर कालीन, फिरोजाबाद कांच के बर्तन, वाराणसी के लकड़ी के खिलौने, मेटल हैंडीक्राफ्ट और उत्तर प्रदेश के 75 जीआई-टैग वाले उत्पादों का एक बड़ा कलेक्शन दिखाया, जिसमें काशी क्षेत्र के 34 उत्पाद शामिल थे।
| उत्तर प्रदेश में असर
• निर्यात में 76 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो 2017-18 में ₹ 88,967 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹ 1.71 लाख करोड़ हो गया है। • ओडीओपी मार्जिन मनी स्कीम के तहत ₹ 6,000 करोड़ के प्रोजेक्ट मंज़ूर किए गए हैं। • ओडीओपी स्किल डेवलपमेंट और टूलकिट डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम के तहत 1.25 करोड़ से ज़्यादाओडीओपी कारीगरों को प्रशिक्षित किया गया है और उन्हें आधुनिक ओडीओपी टूलकिट दिए गए हैं।. |
| पीएम एकता मॉल्स: भारत की कारीगरी विरासत के लिए शानदार प्रवेश द्वार |
पीएम एकता मॉल्स (यूनिटी मॉल्स) को ओडीओपी, जीआई और हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने और बेचने के लिए खास रिटेल और डिस्प्ले हब के तौर पर बनाया गया है। हर मॉल में हर राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश को अपने उत्पाद दिखाने के लिए तय जगह देने की योजना है, जिससे जिला स्तर के उत्पाद को बड़े पैमाने पर बाजार पहुंच, बेहतर पहचान और ज़्यादा उपभोक्ताओं तक पहुंच मिल सके।
मुख्य बातें
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ये फ्लैगशिप केन्द्र सिर्फ़ बाज़ार ही नहीं, बल्कि कारीगरी के मंदिर हैं, ऐसी जगहें जहाँ ग्रामीण कारीगरों के सपने सच होते हैं, जहाँ हर उत्पाद विरासत की कहानी कहता है, और आत्मनिर्भर, सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी भारत की कल्पना का एक ठोस, जीवंत रूप लेता है।
| ओडीओपी की वैश्विक पहुंच |
| ओडीओपी भारत के ज़िलों को इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर अनोखे, हाई-क्वालिटी और सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स दिखाकर ग्लोबल इकॉनमी में मज़बूत योगदान देने में भी मदद कर रहा है.
मुख्य बातें :
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| निष्कर्ष: जिले की कहानी विश्व मंच पर चमक रही है। |
ओडीओपी की कहानी भारत की कहानी है, उन शिल्पों की कहानी है जो मुश्किलों के बावजूद ज़िंदा रहे, उन कारीगरों की कहानी है जिन्होंने परंपराओं को ज़िंदा रखा, और एक ऐसे देश की कहानी है जिसने आखिरकार उन्हें ग्लोबल मंच पर जगह दी। मुरादाबाद के चमकते पीतल से लेकर पीएम एकता मॉल्स की अलमारियों और इंटरनेशनल गिफ्ट हैंपर्स तक, ओडीओपी ने लोकल हुनर को राष्ट्रीय गौरव और ग्लोबल मौके में बदल दिया है। अब यह सिर्फ़ “एक ज़िला, एक उत्पाद” तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाखों आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है जिन्हें उनके गाँवों से बहुत दूर पहचान मिल रही है। जैसे-जैसे नए बाज़ार खुल रहे हैं और पीएम एकता मॉल्स बन रहे हैं, भारत की लोकल गलियाँ आत्मविश्वास के साथ दुनिया के मंच पर कदम रख रही हैं, और हर कारीगर अपने शिल्प को चमकते हुए देखने के करीब है, जैसा कि वह हमेशा से हकदार था।
