आम की खेती में द्विवार्षिक फलन की समस्या पर आईसीएआर के वैज्ञानिक अध्ययन
नई दिल्ली, 11 फरवरी। देश भर में आम की खेती सामान्य रूप से द्विवार्षिक (वैकल्पिक) फलन की समस्या से प्रभावित नहीं है। यह समस्या मुख्य रूप से उत्तर भारत के कुछ हिस्सों तक सीमित है, जबकि दक्षिण भारत में इसका असर अपेक्षाकृत कम देखा जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से जुड़े विभिन्न संस्थानों द्वारा आम में द्विवार्षिक फलन की प्रवृत्ति, उसके कारणों और क्षेत्रीय प्रभावों पर वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं।
आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली, आईसीएआर-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (आईआईएचआर), बेंगलुरु तथा आईसीएआर-केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान (सीआईएसएच), लखनऊ द्वारा किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि दशहरी, लंगड़ा, चौसा, फजली और अल्फोंसो जैसी लोकप्रिय किस्में मुख्य रूप से द्विवार्षिक फलन की प्रवृत्ति वाली हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समस्या के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें आनुवंशिक गुणों से जुड़े शारीरिक लक्षण, नाइट्रोजन और कार्बन का भंडारण, पुष्प निर्माण में हार्मोनल नियंत्रण, जलवायु परिस्थितियां, कृषि प्रबंधन पद्धतियां तथा अधिक फसल भार प्रमुख हैं।
द्विवार्षिक फलन की समस्या से निपटने के लिए आईसीएआर ने नियमित फल देने वाली किस्मों और संकरों के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। इनमें आम्रपाली, मल्लिका, पूसा अरुणिमा, पूसा लालिमा, पूसा प्रतिभा, पूसा श्रेष्ठ, पूसा मनोहरी, अर्का उदय, अर्का सुप्रभात, अवध अभया, सीआईएसएच-अरुणिका, सीआईएसएच-अंबिका, अवध समृद्धि, नीलम, तोतापुरी, बंगनपल्ली और सोनपरी जैसी किस्में शामिल हैं। इनकी गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री आईसीएआर संस्थानों और पंजीकृत नर्सरियों के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराई जा रही है।
इसके अलावा, बागवानी के एकीकृत विकास मिशन के तहत रोगमुक्त और गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करने के लिए स्वच्छ पौध कार्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है। साथ ही, बेहतर बागवानी प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिनमें चंदवा प्रबंधन, उच्च घनत्व रोपण, संतुलित पोषक तत्व एवं जल प्रबंधन तथा जलवायु-लचीली तकनीकों का उपयोग शामिल है। नियमित पुष्पन के लिए नैनोफ्लोरिन और अगले मौसम में बेहतर फलन के लिए मटर अवस्था में पैक्लोबुट्राज़ोल के प्रयोग को भी उपयोगी बताया गया है।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने यह जानकारी लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।
