आपदा जोखिम कम करने के लिए उत्तराखण्ड में अर्ली वार्निंग सिस्टम होगा और मजबूत
- विभिन्न जनपदों में स्थापित होंगे एडब्ल्यूएस व डॉप्लर रडार
देहरादून, 21 फरबरी। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा राज्य में आपदा जोखिम को कम करने तथा समय पर सटीक चेतावनी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अर्ली वार्निंग सिस्टम को लगातार सशक्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अगले कुछ माह में राज्य के विभिन्न जनपदों में आधुनिक तकनीक आधारित उपकरण स्थापित किए जाएंगे, जिससे मौसम और संभावित आपदाओं की जानकारी पहले से मिल सके और जनहानि व नुकसान को कम किया जा सके।
प्रत्येक उपकरण की होगी जीआईएस मैपिंग
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य में आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों के लिए उपलब्ध सभी उपकरणों की जीआईएस मैपिंग भी की जाएगी। इसके लिए सभी जनपदों और विभागों को आईडीआरएन पोर्टल पर उनके पास उपलब्ध उपकरणों का पूरा विवरण जल्द से जल्द अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मानसून से पहले यह कार्य पूरा होने से किसी भी आपदा के समय संसाधनों की सही जानकारी तुरंत मिल सकेगी और राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी आएगी।
हर जनपद में होगी डीडीआरएन की स्थापना
राज्य में आपदा के दौरान संचार व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए रुद्रप्रयाग जनपद की तर्ज पर अन्य जनपदों में भी डीडीआरएन (Disaster Dedicated Radio Network) नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने सभी जनपदों को इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि डीडीआरएन एक लंबी दूरी तक काम करने वाला सुरक्षित संचार नेटवर्क है, जिसमें उच्च गति इंटरनेट, वॉयस एवं वीडियो कम्युनिकेशन जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। आपदा के समय जब सामान्य मोबाइल या इंटरनेट सेवाएं बाधित हो जाती हैं, तब यह नेटवर्क प्रशासन, आपातकालीन सेवाओं और राहत एजेंसियों के बीच निर्बाध संपर्क बनाए रखने में मदद करता है।
एसईओसी व डीईओसी की तर्ज पर टीईओसी की स्थापना
राज्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए अब तहसील स्तर पर भी आपातकालीन परिचालन केंद्र (टीईओसी) स्थापित किए जाएंगे। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि जिस प्रकार राज्य स्तर पर एसईओसी और जनपद स्तर पर डीईओसी कार्य कर रहे हैं, उसी तरह तहसील स्तर पर भी त्वरित प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए टीईओसी विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान उपयोग में आने वाले विभिन्न प्रकार के आधुनिक उपकरण तहसीलों को उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि स्थानीय स्तर पर ही राहत एवं बचाव कार्य तेजी से शुरू किए जा सकें।
