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अधिकृत वित्त समिति की बैठक में करोड़ों की विकास योजनाओं पर मुहर

 

मुख्य सचिव ने परियोजनाओं की लागत और उपयोगिता पर उठाए सवाल, सार्वजनिक धन की मितव्ययिता पर सख्त संदेश

 

देहरादून,  25 फरबरी। सचिवालय सभागार में मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में हुई अधिकृत वित्त समिति की बैठक में राज्य के विभिन्न हिस्सों से जुड़ी आधारभूत ढांचा और पेयजल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। बैठक में जहां कई महत्वपूर्ण योजनाओं को स्वीकृति मिली, वहीं कुछ परियोजनाओं की बढ़ती लागत को लेकर मुख्य सचिव ने कड़ा रुख भी अपनाया।
बैठक में यूआईडीएफ फंड के तहत देहरादून के न्यू कैंट क्षेत्र में दिलाराम बाजार से विजय कॉलोनी पुल तक मार्ग को दो लेन से तीन लेन में उन्नत करने से जुड़े कार्यों को हरी झंडी दी गई। इस परियोजना में विद्युत लाइनों को यूटिलिटी डक्ट में शिफ्ट करने और पेयजल आपूर्ति लाइनों के स्थानांतरण के कार्य शामिल हैं। इन कार्यों पर लगभग 12.58 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इसके अलावा जनपद पिथौरागढ़ में घाट पंपिंग पेयजल योजना को सुदृढ़ करने का फैसला लिया गया। योजना के अंतर्गत जर्जर पाइपलाइन और राइजिंग मेन को बदला जाएगा तथा पुनर्संरेखण किया जाएगा। इस पर करीब 13.38 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिससे क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या के समाधान की उम्मीद है।
बैठक में मसूरी राज्य राजमार्ग संख्या-1 पर सहसपुर क्षेत्र में क्षतिग्रस्त एकल लेन पुल के स्थान पर नए पुल के निर्माण को भी स्वीकृति दी गई। लगभग 60 मीटर स्पैन वाले इस दो लेन स्टील बॉक्स पुल पर 12 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। यह पुल यातायात सुरक्षा और आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि रामनगर बस टर्मिनल निर्माण परियोजना के पुनरीक्षित आकलन को लेकर मुख्य सचिव ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने परियोजना की कुल लागत के अनुपात में फाउंडेशन वर्क और साइट विकास पर प्रस्तावित खर्च को असामान्य बताते हुए पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता और पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक को संयुक्त समिति गठित करने के निर्देश दिए। समिति को प्रारंभिक लागत, बढ़ी हुई लागत, साइट चयन और नींव खर्च की व्यावहारिकता व उपयोगिता की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
मुख्य सचिव ने बैठक में स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन का उपयोग पूरी मितव्ययिता और जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि केवल कंसलटेंट की रिपोर्ट के आधार पर प्रस्ताव आगे न बढ़ाए जाएं और हर परियोजना की विभागीय स्तर पर गहन जांच की जाए। बिना पर्याप्त परीक्षण के किसी भी प्रस्ताव को उच्चस्तरीय समिति में भेजने पर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए गए।
बैठक में स्वीकृत परियोजनाओं के शीघ्र, पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश भी दिए गए। बैठक में सचिव पंकज पांडेय, एस.ए. अडन्नकी, बृजेश संत सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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