सोशल मीडिया के अपने विश्वकर्मा और ब्रह्मा हैं

– गोविंद प्रसाद बहुगुणा –
आजकल सोशल मीडिया में photoshopping का धंधा
फेसबुकी राजनीतिक नेताओं की वजह से उनका धंधा मालामाल हो गया है जो नेताओं के काल्पनिक चित्र और चरित्र रोज फेसबुक पर पोस्ट करते हैं, दुनियां के बड़े नेताओं के संग नेता विशेष कीअंतरंग मैत्री दिखाते हैं जो लगभग झूठ ही होता है।किसी का सिर किसी के धड़ पर लगा देते हैं ..
कार्टून की बात अलग है, वे हाथ से बने रेखाचित्र होते हैं , जो पत्रकारिता की एक स्वतंत्र और पृथक विधा है । अपने देश में कभी
केशव शंकर पिल्लई, आर. के. लक्ष्मण, कुट्टी,मेनन, रंगा, मारियो मिरांडा, अबू अब्राहम, मीता रॉय,सुधीरधर, सुधीर तैलंग और शेखर गुरेरा अदि प्रतिष्ठित कार्टून जर्नलिस्ट थे जिनकी वजह से अखवार हाथों -हाथ बिक जाते थे ,वे लोग अच्छे पत्रकार भी होते थे जिन्हें बड़े नेता बहुत सम्मान देते थे । वे अच्छे लेखक और कहानीकार भी थे।
शंकर एक कार्टून पत्रिका भी निकालते थे जिसका नाम * The Shankar’s Weekly * था, उसमें कभी पंडित जवाहरलाल नेहरू भी *चाणक्य* उपनाम से व्यंग्य लेख लिखते थे जिसमें वे अपनी आलोचना खूब करते थे ,इस राज का खुलासा स्वयं शंकर ने ही किया था।
आरे० के० लक्ष्मण का एक कहानी संग्रह चित्र सहित मेरे पास है “Sorry, No room ” बहुत मजेदार कहानियां हैं। उन्होंने अपने भाई RKNarayan की सभी कहानियों में Illustrations बनाये हैं ….
कार्टून कला के बारे में एक दिलचस्प किस्सा याद आ रहा है । भूतपूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह जी ने एक बार कार्टूनिस्ट लोगों से एक सवाल पूछा कि दुनियां के पहले कार्टूनिस्ट लेखक का नाम बताएं? तो सबने देश- विदेश के जाने- माने कार्टूनिस्टों के नाम गिना दिए। ज्ञानी जी ने कहा- तुम सब फेल हो गए। अरे सबसे पहला कार्टूनिस्ट तो महर्षि बाल्मीकि थे, जिन्होंने राजा रावण के दस सिर बना दिए। अब बताईए कि इसके दस मुखों से निकला कौन सा स्टेटमेन्ट सही होगा?…. यही सत्ताधारियों का चरित्र होता है, जो आज भी दिखाई देता है भले ही उनके दस सिर न हों….।
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