श्रमिकों के हित की बातें करना सिर्फ एक फैशन बन कर रह गया

–गोविंद प्रसाद बहुगुणा-
“A conference is a gathering of people who singly can do nothing, but together can decide that nothing can be done.” यह जिसने भी कहा होगा , बिल्कुल सही कहा । प्रधानमन्त्री बाजपेई जी के कार्य काल में गठित द्वितीय राष्ट्रीय श्रम आयोग की सिफारिशें कभी कार्यान्वित नहीं हुई । उदारीकरण-निजीकरण के दबाव में वे सिफारिशें सिर्फ ideal superfluity बन कर रह गई।
उस समय उत्तराखण्ड राज्य का जन्म हुआ ही था, जब यह आयोग साक्ष्य एकत्र करने के लिए देहरादून में भी आया था। दो दिन चली इस बैठक में प्रतिभागिता करने का मौका मुझे भी मिला था। इस आयोग के चेयरमैन प्रसिद्ध श्रमिक नेता और भूतपूर्व केन्द्रीय श्रम मंत्री श्री रवीन्द्र वर्मा जी थे। वे बहुत अच्छे जुझारू श्रमिक नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे उनका जन्म केरल प्रांत में एक राज परिवार में हुआ था इसलिए उन्हें राजा रविन्द्र वर्मा कहते थे … प्रधानमन्त्री मोरारजी भाई के कार्यकाल में वह केंद्रीय श्रम मंत्री थे …
