ईरान पर हमला : भारत ने तेल की मांग अनुसार तैयार किया आकस्मिक प्लान

-उषा रावत–
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर हाल ही में एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें वैश्विक अस्थिरता के बीच देश की तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखने की तैयारियों का विवरण दिया गया है। रविवार के ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित अतुल माथुर की खबर के अनुसार, सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित आपूर्ति बाधाओं को देखते हुए अपनी आकस्मिक योजना (contingency plan) को सक्रिय कर दिया है। वर्तमान में भारत अपनी कच्चा तेल आवश्यकताओं का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों से होकर गुजरता है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत की नई रणनीति
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक संकट को देखते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए कई मोर्चों पर काम शुरू किया है। सरकार की इस आकस्मिक योजना का मुख्य उद्देश्य तेल आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी तरह के व्यवधान को रोकना है। इसके तहत भारत ने अपने आयात स्रोतों में विविधता लाने पर जोर दिया है और अब देश लगभग 41 अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है। इसके अलावा, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और रूस जैसे देशों से आपूर्ति बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है ताकि केवल एक क्षेत्र या मार्ग पर निर्भरता कम की जा सके। रणनीतिक रूप से, भारत अब संयुक्त अरब अमीरात (ADNOC) और सऊदी अरामको द्वारा संचालित वैकल्पिक पाइपलाइनों के उपयोग की संभावनाएं भी तलाश रहा है जो संकट के समय लाल सागर और अन्य मार्गों तक सुरक्षित पहुंच प्रदान कर सकती हैं।
74 दिनों का सुरक्षित तेल भंडार
इस रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारत के पास मौजूद तेल का वह ‘बफर स्टॉक’ है, जो किसी भी आपात स्थिति में देश की जीवनरेखा बन सकता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में कुल 74 दिनों की खपत के बराबर तेल भंडार उपलब्ध है। यह भंडार केवल भूमिगत गुफाओं (strategic caverns) में जमा तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रिफाइनरियों के पास मौजूद स्टॉक और बंदरगाहों पर खड़े जहाजों (floating storage) में रखा गया तेल भी शामिल है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) हालांकि 90 दिनों के भंडार की सिफारिश करती है, लेकिन भारत का मौजूदा 74 दिनों का बैकअप किसी भी अल्पकालिक वैश्विक संकट या युद्ध जैसी स्थिति से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच माना जा रहा है।
भविष्य की तैयारियां और रणनीतिक विस्तार
भारत अपनी इस क्षमता को और अधिक विस्तार देने की योजना पर भी तेजी से काम कर रहा है। वर्तमान में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम और कर्नाटक के मंगलुरु व पादुर में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) की सुविधाएं मौजूद हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है। सरकार अब ओडिशा के चांदीखोल और पादुर के दूसरे चरण में नए भंडार गृह बनाने की प्रक्रिया में है। इन नई सुविधाओं के तैयार होने के बाद भारत की रणनीतिक भंडारण क्षमता काफी बढ़ जाएगी, जिससे देश अंतरराष्ट्रीय मानकों के और करीब पहुंच सकेगा। साथ ही, ‘मिशन समुद्र मंथन’ जैसे घरेलू अन्वेषण अभियानों के जरिए देश के भीतर ही तेल उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि भविष्य में आयात पर निर्भरता को कम किया जा सके और आर्थिक स्थिरता को बरकरार रखा जा सके।
क्या आप चाहेंगे कि मैं इन रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों (SPR) की विशिष्ट क्षमताओं या भविष्य में बनने वाले नए केंद्रों के विवरण के बारे में और जानकारी दूँ?
India’s Petroleum Reserves Adequate for 74 Days
यह वीडियो भारत के पेट्रोलियम मंत्री द्वारा संसद में दी गई जानकारी को साझा करता है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि देश के पास 74 दिनों का पर्याप्त तेल भंडार है।
