उद्यान सचल केन्द्र पोखरी का भवन जर्जर, पुनर्निर्माण की उठी मांग

स्टोर व आवासीय भवन खंडहर में तब्दील, 57.50 लाख का प्रस्ताव स्वीकृत
– राजेश्वरी राणा की रिपोर्ट –
पोखरी, 1 मार्च। नगर पंचायत क्षेत्र सहित विकासखंड की 72 ग्राम सभाओं में उद्यानिकी को बढ़ावा देने और किसानों को विभागीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से 1960 के दशक में स्थापित उद्यान विभाग का सचल केन्द्र पोखरी आज बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। विभागीय उपेक्षा और प्रशासनिक लापरवाही के चलते मुख्य कार्यालय भवन जर्जर हो गया है, जबकि स्टोर रूम और कर्मचारियों के आवासीय भवन पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।

खंड विकास अधिकारी कार्यालय के समीप स्थित इस केन्द्र का निर्माण उस समय लाखों रुपये की लागत से किया गया था, ताकि पूरे विकासखंड और नगर पंचायत क्षेत्र में उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके तथा काश्तकारों को विभागीय योजनाओं का लाभ सुगमता से मिल सके।
उद्यान विभाग द्वारा किसानों को आम, सेब, आड़ू, आंवला, नीम, संतरा और कीवी सहित विभिन्न फलदार एवं छायादार पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके अतिरिक्त प्याज, राई, फ्रेंचबीन, आलू और मटर जैसी सब्जियों के बीज, रबी व खरीफ फसलों के बीज, खाद, कीटनाशक दवाइयां तथा कृषि उपकरण भी वितरित किए जाते हैं, जिससे किसान उद्यानिकी अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकें।
जर्जर भवन में काम करने को मजबूर कर्मचारी
वर्तमान में विभाग का मुख्य भवन अत्यंत खराब स्थिति में पहुंच चुका है। दरवाजों और खिड़कियों की लकड़ियां सड़ चुकी हैं तथा छत पर लगी पुरानी चादरों से बरसात के दौरान पानी टपकता रहता है। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को कार्यालय के भीतर बैठकर कार्य करना मुश्किल हो जाता है और उन्हें अधिकांश समय बरामदे में बैठकर काम करना पड़ता है। कार्यालय में पेयजल और बिजली की भी समुचित व्यवस्था नहीं है।
भवन के भीतर रखे बीज, खाद, कृषि उपकरण, कीटनाशक और रोगनाशक दवाइयां सुरक्षित भंडारण के अभाव में खराब हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि वह कभी भी धराशायी हो सकता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
आवासीय सुविधा और स्टोर का अभाव
कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवासीय भवन और स्टोर रूम कई वर्ष पहले ही खंडहर बन चुके हैं। आवासीय सुविधा न होने के कारण कर्मचारी बाजार क्षेत्र में किराये के मकानों में रहने को विवश हैं। वहीं, समुचित स्टोर व्यवस्था न होने से विभागीय सामग्री सुरक्षित नहीं रह पाती, जिससे किसानों तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने में बाधा आ रही है।
वर्तमान में केन्द्र पर छह कर्मचारी तैनात हैं, जो सीमित संसाधनों के बीच अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
57.50 लाख का प्रस्ताव स्वीकृत, निरीक्षण रिपोर्ट का इंतजार
उद्यान सचल केन्द्र के प्रभारी एवं ब्लॉक उद्यान अधिकारी इंद्रजीत टम्टा ने बताया कि कार्यालय भवन, स्टोर रूम और आवासीय भवनों के पुनर्निर्माण के लिए नाबार्ड से 57.50 लाख रुपये का प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है। निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पूर्व वन विभाग, राजस्व विभाग और उद्यान विभाग द्वारा भूमि का संयुक्त निरीक्षण कर रिपोर्ट भेजी जानी है। उन्होंने बताया कि भवन निर्माण के समय भूमि विभाग के नाम दर्ज नहीं की गई थी, जिसके कारण प्रक्रिया लंबित है।
क्षेत्र पंचायत प्रमुख राजी देवी, नगर पंचायत अध्यक्ष सोहन लाल, निवर्तमान अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद पंत, जिला पंचायत सदस्य बीरेंद्र राणा, पूर्व प्रमुख नरेंद्र रावत, मंगल सिंह नेगी, टैक्सी यूनियन अध्यक्ष विजयपाल सिंह रावत, राज्य आंदोलनकारी संगठन ब्लॉक अध्यक्ष कुंवर सिंह खत्री, राज्य महिला आयोग सदस्य वत्सला सती, प्रधान संगठन ब्लॉक अध्यक्ष तेजपाल निर्मोही, विधायक प्रतिनिधि धीरेन्द्र राणा, भाजपा वरिष्ठ नेता बीरेंद्र पाल सिंह भंडारी सहित अनेक जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर मुख्य भवन, स्टोर रूम और आवासीय भवनों के शीघ्र पुनर्निर्माण की मांग की है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि भवनों का पुनर्निर्माण होने से उद्यानिकी योजनाओं का लाभ क्षेत्र के किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंच सकेगा और विभागीय कार्यों में भी तेजी आएगी।
