वित्त वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय दलों की आय-व्यय रिपोर्ट: भाजपा सबसे आगे

नई दिल्ली, 5 मार्च । एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने चुनाव आयोग को सौंपी गई वार्षिक ऑडिट रिपोर्टों के आधार पर राष्ट्रीय राजनीतिक दलों की आय-व्यय का विश्लेषण जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में छह राष्ट्रीय दलों—भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी), आम आदमी पार्टी और नेशनल पीपुल्स पार्टी—की कुल आय 7,960.099 करोड़ रुपये रही।
इनमें भाजपा की आय सबसे अधिक 6,769.1498 करोड़ रुपये (कुल का 85.03 प्रतिशत) दर्ज की गई, जबकि कांग्रेस ने 918.2865 करोड़ रुपये की आय घोषित की।
रिपोर्ट जमा करने में देरी
एडीआर के अनुसार दलों को अपनी ऑडिट रिपोर्ट 31 अक्टूबर 2025 तक जमा करनी थी। एनपीपी, आप और बसपा ने समय पर रिपोर्ट सौंपी, जबकि कांग्रेस, सीपीआई(एम) और भाजपा ने देरी से दस्तावेज जमा किए। भाजपा ने 56 दिन की देरी से रिपोर्ट दाखिल की।
आय और व्यय की स्थिति
- भाजपा ने 6,769.14 करोड़ रुपये की आय के मुकाबले 3,774.58 करोड़ रुपये खर्च किए, जो उसकी आय का करीब 55.76 प्रतिशत है।
- कांग्रेस ने 918.28 करोड़ रुपये की आय के मुकाबले 1,111.94 करोड़ रुपये खर्च किए, यानी आय से लगभग 193 करोड़ रुपये अधिक।
- सीपीआई(एम) को 172.60 करोड़ रुपये की आय हुई और 173.86 करोड़ रुपये खर्च हुए।
- बसपा की आय 58.58 करोड़ रुपये रही, जबकि खर्च 106.30 करोड़ रुपये रहा।
- आप की आय 39.28 करोड़ रुपये और व्यय 36.46 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
पिछले वर्ष की तुलना
रिपोर्ट के अनुसार भाजपा की आय में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई। आम आदमी पार्टी की आय में भी 73 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं कांग्रेस और बसपा की आय में कमी आई है।
आय के प्रमुख स्रोत
राष्ट्रीय दलों की कुल आय का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा दान और अंशदान से प्राप्त हुआ, जबकि शेष आय अन्य स्रोतों से आई। भाजपा को अपनी आय का 90 प्रतिशत से अधिक दान से मिला। कांग्रेस को दान के अलावा कूपन बिक्री से भी बड़ी राशि प्राप्त हुई। बसपा ने अपनी पूरी आय अन्य स्रोतों से दिखाई है।
खर्च के मुख्य मद
अधिकांश दलों ने सबसे ज्यादा खर्च चुनाव और सामान्य प्रचार पर किया। भाजपा और कांग्रेस दोनों के व्यय का बड़ा हिस्सा चुनावी गतिविधियों में गया, जबकि प्रशासनिक और सामान्य खर्च दूसरा प्रमुख मद रहा।
एडीआर की सिफारिशें
एडीआर ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए दानदाताओं के पूर्ण विवरण सार्वजनिक करने, समय पर आयकर रिटर्न जमा न करने वाले दलों की कर छूट समाप्त करने और सभी राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाने की सिफारिश की है।
रिपोर्ट राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण संकेत देती है। विस्तृत रिपोर्ट एडीआर की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
