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जन औषधि में सस्ती दवाएँ कम पैसे होने के बावजूद गुणवत्‍तापूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य सेवा सुनिश्चित करती हैं

 

-A PIB FEATURE-

दिल्ली की एक शांत गली में, एक छोटी सी फार्मेसी सिर्फ़ एक मेडिकल स्टोर से कहीं अधिक हो गई है। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केन्‍द्र स्‍वास्‍थ्‍य सेवा पर रोज़ाना होने वाले खर्च को बचत, आत्मनिर्भरता और सम्मान की कहानी में बदल रहे हैं। वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए, ये केन्‍द्र सिर्फ़ दवाएँ ही नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आज़ादी, आत्मविश्वास और सम्मान भी देते हैं।    

सस्ती दवाएं, 60 की उम्र में एक बार फिर आत्‍मविश्‍वास जगाया’

श्वेता जी 60 साल की उम्र में अकेली रहती हैं। फिर भी, वह अपने घर के पास मौजूद जन औषधि केन्‍द्र तक आत्‍मविश्‍वास के साथ पैदल जाती हैं। पिछले आठ वर्षों से, यह स्टोर उनका भरोसेमंद सहायता व्‍यवस्‍था रहा है। वह केन्‍द्र से नियमित तौर पर डायबिटीजएसिडिटीकैल्शियमविटामिन और इंसुलिन की दवाइयाँ खरीदती हैं।

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वह बताती हैं, “पहले दवाएँ महंगी थीं, और महीने के खर्चों का प्रबंध करना तनावपूर्ण कार्य होता था।” “अब, मैं हर महीने अच्छी-खासी रकम बचाती हूँ।” श्वेता जी के लिए, इसका केवल वित्‍तीय फायदा नहीं है। स्टोर के नजदीक होने से उन्हें अकेले बाहर निकलने और अपने स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल अच्‍छी तरह करने में मदद मिलती है। वह पक्के तौर पर कहती हैं, क्वालिटी में कोई मुकाबला नहीं है।” “दवाएँ असरदार हैंऔर मैं पूरी तरह से संतुष्‍ट हूँ।” उनकी कहानी दिखाती है कि कैसे सस्ती स्‍वास्‍थ्‍य सेवा आत्‍मविश्‍वास वापस ला सकती है, खासकर अकेले रहने वाले वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए।

अब दूर जाने की जरूरत नहींकोई भारी बिल नहींबस सम्मानजनक देखभाल’

 

गोवर्धन जी के लिए यह केन्‍द्र एक आशीर्वाद जैसा लगता है। पिछले छह सालों से, वह यहीं से ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की दवाएँ खरीद रहे हैं।

वह कहते हैं, यह हमारे घर के नजदीक हैइसलिए हम किसी पर निर्भर हुए बिना खुद आ सकते हैं।” “हमें अच्छी क्वालिटी की दवाएँ सस्ते दामों पर मिलती हैं। यह अपने आप में ताकत देने वाला है।” पहुँच और किफायती, दोनों ने उन्हें आज़ादी का एहसास दिलाया है। अब कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं, कोई भारी बिल नहीं, बस भरोसेमंद दवाएँ पहुँच में।

‘7,000 रुपये के बिल से वित्तीय राहत तक’

कुछ ही कदम दूर, संजीव कुमार काउंटर पर इंतज़ार कर रहे हैं। पिछले सात वर्षों से, वह अपने और अपनी पत्नी के लिए इसी केन्‍द्र से दवाएं खरीद रहे हैं। वह बताते हैं, “मुझे अपने और अपनी पत्नी के लिए दवाइयाँ ₹2,000 में मिल जाती हैं। अगर हमें वही दवाइयाँ बाहर से खरीदनी पड़ेंतो हमें हर महीने लगभग ₹6,000-7,000 खर्च करने पड़ सकते हैं।”

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बचत से उनके घर के बजट में साफ़ फ़र्क पड़ा है। वह कहते हैं, “अब हम जो पैसे बचाते हैंवे परिवार की दूसरी ज़रूरी ज़रूरतों पर खर्च होते हैं।” पुरानी बीमारियों से जूझ रहे परिवारों के लिए, कम मेडिकल खर्च का मतलब है कम तनाव और बेहतर वित्‍तीय नियोजन।

जेब पर बोझ डाले बिना स्वास्थ्य सेवा’

 

अशोक कुमार, जो एक मैकेनिकल वर्कर हैं, भी कुछ ऐसा ही सोचते हैं। जब भी उन्हें या उनके परिवार को दवाओं की ज़रूरत होती है, तो जन औषधि केन्‍द्र उनकी पहली पसंद होता है।

वे कहते हैं, “हमें यहाँ सस्ती दवाएँ मिलती हैं। वे हमारी जेब पर कोई बोझ नहीं डालतीं।” उनके जैसे कामकाजी परिवारों के लिए, हर रुपया मायने रखता है। सस्ती दवाएँ यह पक्का करती हैं कि सेहत वित्‍तीय बोझ न बने।

‘डॉक्‍टर द्वारा लिखे गए पर्चे से उत्‍पन्‍न चिंता को राहत में बदलना’

 

सुनील कुमार इलाके में केन्‍द्र की मौजूदगी के बड़े असर के बारे में भी बताते हैं। वह बताते हैं कि यहां दवाएं काफी सस्ती हो गई हैं। पहले, सिर्फ डॉक्टर का पर्चा देखने से ही लोगों की चिंता बढ़ जाती थी क्योंकि बड़े खर्च की उम्मीद रहती थी। अब, जन औषधि केन्‍द्र पर सस्ती, अच्छी क्वालिटी की दवाएं मिलने से वह चिंता राहत में बदल गई है।

एक दिव्यांग उद्यमी अपने समुदाय को सशक्त बना रहा है’

राम आधार एक दिव्यांग उद्यमी हैं जो जन औषधि केन्‍द्र चलाते हैं। लेग लेंथ डिसक्रिप्शन (एलएलडी) के साथ जी रहे, जिसमें एक पैर दूसरे से छोटा होता है, उन्होंने अपनी चुनौती को ताकत में बदलने का फैसला किया। शारीरिक कमियों को खुद को परिभाषित करने देने के बजाय, वह पक्के इरादे और एक साफ मकसद के साथ आगे बढ़े: घर के पास अच्छी, सस्ती दवाइयाँ देकर अपने समुदाय की सेवा करना।

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वह पूरे आत्‍मविश्‍वास के साथ कहते हैं “मैं अपने इलाके के लिए कुछ काम का करना चाहता था”। आज, उनका केन्‍द्र रोज़ाना लगभग 30 से 40 ग्राहकों को सेवा देता है। इलाके के कई लोगों के लिए, उनका स्टोर सिर्फ़ एक फार्मेसी से कहीं ज़्यादा है; यह हिम्मत और सर्विस की निशानी है। उनका सफ़र दिखाता है कि कैसे मौका, जब हिम्मत के साथ मिल जाए, तो न सिर्फ़ एक ज़िंदगी बल्कि पूरे समुदाय को बदल सकता है।

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वरिष्‍ठ नागरिकों, कामकाजी पेशेवरों, दिव्यांग उद्यमियों और लंबी बीमारियों से जूझ रहे परिवारों के लिए, सस्ती स्‍वास्‍थ्‍य सेवा हेल्थकेयर कोई विलासिता नहीं हैयह एक आवश्‍यकता है। और ये मेडिकल ज़रूरतें जेएके में बिना किसी भारी पैसे के बोझ के पूरी होती हैं। इन रोज़मर्रा की कहानियों से एक बात साफ़ है: जनऔषधि केन्‍द्र सिर्फ़ दवाएँ बेचने वाली दुकानें नहीं हैं; ये भरोसेराहत और अधिकार प्रदान करने के स्‍थान हैं।

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