एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर भ्रामक दावों से बचें, E20 पूरी तरह वैज्ञानिक और सुरक्षित: केंद्र सरकार
नई दिल्ली, 23 जून। केंद्र सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे भ्रामक दावों और पुराने वीडियो-तस्वीरों पर चिंता जताते हुए कहा है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है तथा इसकी निरंतर निगरानी की जा रही है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कुछ लोग दर्शकों को आकर्षित करने के लिए पुराने वीडियो और तस्वीरों को नए संदर्भ में साझा कर रहे हैं, जिससे जनता में अनावश्यक भ्रम और आशंकाएं पैदा हो रही हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारत में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम वर्ष 2003 में कच्चे तेल के आयात को कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से शुरू किया गया था। तकनीकी तैयारियों और विशेषज्ञ परामर्श के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया तथा वर्ष 2023 से 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) उपलब्ध कराया जा रहा है।
मंत्रालय के अनुसार E20 पेट्रोल के उपयोग से इंजन खराब होने या वाहनों में व्यापक तकनीकी दिक्कतों की कोई समस्या सामने नहीं आई है। सरकार तेल विपणन कंपनियों, वाहन निर्माताओं और परीक्षण एजेंसियों के साथ मिलकर कार्यक्रम की लगातार समीक्षा करती है।
सोशल मीडिया पर गन्ने के रस को सीधे पेट्रोल में मिलाने वाले वीडियो भी प्रसारित किए जा रहे हैं। मंत्रालय ने इन्हें पूरी तरह भ्रामक बताया है। उसने कहा कि ईंधन में उपयोग होने वाला एथेनॉल गन्ने के रस, गुड़, टूटे चावल या मक्का जैसे कच्चे माल से विशेष औद्योगिक प्रक्रियाओं, किण्वन (फर्मेंटेशन) और आसवन (डिस्टिलेशन) के माध्यम से तैयार किया जाता है तथा यह सख्त गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है।
हाल ही में एक वाहन के फ्यूल टैंक के पास चींटियों के दिखाई देने वाले वायरल वीडियो पर भी सरकार ने सफाई दी है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के अनुसार ईंधन-ग्रेड एथेनॉल में कोई अवशिष्ट शर्करा नहीं होती और उसमें ऐसे रसायन मिलाए जाते हैं जो कीटों को दूर रखते हैं। इसलिए E20 ईंधन और चींटियों के आकर्षण के बीच संबंध का दावा वैज्ञानिक रूप से निराधार है।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल के उपयोग से वाहन बीमा की वैधता प्रभावित होने संबंधी दावे भी गलत पाए गए हैं। एथेनॉल मिश्रण विश्वभर में स्वीकृत तकनीक है और अमेरिका, ब्राजील तथा जापान सहित कई देशों में सफलतापूर्वक अपनाई जा चुकी है। ब्राजील में तो E27 मिश्रण लंबे समय से मानक ईंधन के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
सरकार के अनुसार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से अब तक देश को कच्चे तेल के आयात में कमी के कारण 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। साथ ही कृषि आधारित कच्चे माल की मांग बढ़ने से किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिला है।
मंत्रालय ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है तथा सरकार इसे सुरक्षित, पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी तरीके से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
