बसंत के स्वागत का लोक पर्व फूलदेई शुरू, बच्चों ने घर-घर बिखेरे फूल
पोखरी, 15 मार्च। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक आठ दिनों तक मनाया जाने वाला पारंपरिक लोक पर्व फूलदेई रविवार से क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ शुरू हो गया। बसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार, आपसी प्रेम, सौहार्द, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
पर्व के पहले दिन गांवों में सुबह से ही नौनिहाल रिंगाल की टोकरियों में फ्यूंली, बुरांश सहित विभिन्न प्रकार के सुंदर और सुगंधित फूल एकत्रित कर घर-घर पहुंचे। बच्चों ने लोगों के घरों की दहलीज पर फूल बिखेरते हुए परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान बच्चों की टोलियां पारंपरिक लोकगीत गाती हुई गांव की गलियों में घूमती रहीं।
दहलीज पर फूल बिखेरते समय बच्चे पारंपरिक गीत—
“फुलफुल माई दाअ, दे चौंअ दे,
फूल्या-फूल्या, खाजा दे”
गाकर घर के लोगों को शुभकामनाएं देते हैं। बच्चों की मधुर आवाज और फूलों की खुशबू से गांवों का वातावरण पूरी तरह उत्सवमय हो उठा।
ग्रामीणों ने भी इस लोक परंपरा को निभाते हुए बच्चों को गुड़, चावल, दाल, मिठाई सहित अन्य खाद्य सामग्री भेंट स्वरूप प्रदान की।
लोक परंपरा के अनुसार यह पर्व लगातार आठ दिनों तक मनाया जाता है। अंतिम दिन घोगा पूजा के बाद बच्चे एकत्रित होकर सामूहिक रूप से भोजन करते हैं और इसके साथ ही फूलदेई पर्व का समापन होता है। क्षेत्र में फूलदेई पर्व के आगमन से गांवों में बसंत की रौनक के साथ पारंपरिक संस्कृति की सुंदर झलक भी देखने को मिल रही है।
