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जोशीमठ : शादी व्याह में नहीं चलेगी दारू पार्टी

ज्योतिर्मठ में शादी-समारोहों में शराब परोसने पर रोक की पहल, ग्रामीण क्षेत्रों के बाद नगर वार्ड भी जुड़े


प्रकाश कपरुवाण-
ज्योतिर्मठ, 15 मार्च। शराब के बढ़ते प्रचलन से हो रही दुर्घटनाओं और समाज में फैल रही विकृतियों से परेशान सीमांत क्षेत्र के लोगों ने एक बार फिर इसके विरोध का संकल्प लिया है। इसकी शुरुआत शादी-बारात और अन्य सामाजिक समारोहों में शराब परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से की गई है। जोशीमठ ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों से शुरू हुआ यह अभियान अब नगर क्षेत्र में भी विस्तार पाने लगा है। नगर के सुनील वार्ड के बाद अब रविग्राम वार्ड ने भी समारोहों में शराब परोसने पर प्रतिबंध लगाने की पहल की है।
सीमांत विकासखंड जोशीमठ (ज्योतिर्मठ) में इस पहल की शुरुआत ढाक, कुंडी खोला, लामबगड़ और थैंग ग्राम पंचायतों से हुई थी। बाद में यह अभियान अन्य ग्राम पंचायतों तक पहुंचा और अब नगर क्षेत्र में भी इसका प्रभाव दिखाई देने लगा है। शराबबंदी की इस पहल की शुरुआत शादी-विवाह और अन्य समारोहों में शराब परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध से हुई, जिसका असर भी अब दिखने लगा है। हाल के विवाह समारोहों में इसका स्पष्ट प्रभाव देखा गया और महिला मंगल दलों की निगरानी टीमें भी सक्रिय रूप से व्यवस्था पर नजर रखती दिखाई दीं।
जोशीमठ प्रखंड की कई ग्राम सभाओं में शराब के विरोध में शुरू हुई इस मुहिम का अनुसरण अब नगर क्षेत्र में भी होने लगा है। ज्योतिर्मठ नगर पालिका के सुनील वार्ड के बाद अब रविग्राम वार्ड ने भी शराब परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने की शपथ ली है।
वास्तव में यदि शराब और शराब परोसने के विरोध में शुरू हुई यह पहल आने वाले वर्षों तक मजबूती से कायम रहती है, तो सीमांत ब्लॉक जोशीमठ को चिपको आंदोलन के बाद शराब के खिलाफ नई पहल शुरू करने वाले क्षेत्र के रूप में भी जाना जा सकता है। हालांकि यह तभी संभव होगा जब लोग इस संकल्प का निरंतर पालन करें और महिला मंगल दल निगरानी, अर्थदंड और सामाजिक बहिष्कार जैसे कड़े नियमों को प्रभावी ढंग से लागू कराएं।
उत्तराखंड में शराब के विरोध में आंदोलन पहले भी होते रहे हैं। वर्ष 1970 के दशक में शुरू हुए आंदोलनों ने 1984 में “नशा नहीं, रोजगार दो” जैसे नारों के साथ जोर पकड़ा था, जिसमें महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। लेकिन बाद के वर्षों में इन आंदोलनों में शिथिलता आ गई। राज्य गठन के बाद तो स्थिति यह हो गई कि कई स्थानों पर शराब की दुकानों की लॉटरी भी महिलाओं के नाम से खुलने लगी।
शराब के विरोध में शुरू हुए इस नए अभियान का एक बड़ा कारण यह भी है कि नशे की प्रवृत्ति ने युवा पीढ़ी को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले लिया है। शादी-विवाह जैसे समारोहों में शराब के सेवन के कारण कई बार दुर्घटनाएं और विवाद भी हो चुके हैं। इन परिस्थितियों से निजात दिलाने के उद्देश्य से समारोहों में शराब परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध की यह पहल एक सकारात्मक शुरुआत मानी जा रही है, जिसका दायरा लगातार बढ़ रहा है और इसमें महिलाओं की भूमिका भी सक्रिय बनी हुई है।
इधर सरकार की ओर से शराब की दुकानों का दायरा नगरों से बढ़ाकर गांव और कस्बों तक फैलाया जा रहा है। इसके विरोध में उठने वाली आवाजों का भी सरकारों पर विशेष असर नहीं दिखता। योगनगरी ऋषिकेश में शराब की दुकान को लेकर हुआ विवाद पूरे देश में चर्चा का विषय बना था, लेकिन इसके बावजूद दुकान बंद नहीं हो सकी।
सरकारों के शराब के प्रति झुकाव को देखते हुए सीमांत क्षेत्र के लोगों ने शराब की दुकानों को बंद कराने के लिए सरकार के सामने गुहार लगाने के बजाय स्वयं ही शराब पीने-पिलाने पर रोक लगाने की पहल की है, जिसे सराहनीय और अनुकरणीय कदम माना जा रहा है।
यदि सीमांत पैनखंडा जोशीमठ से शुरू हुई यह नई पहल सफल रहती है, तो विश्व विख्यात चिपको आंदोलन के बाद शराबबंदी की दिशा में शुरू हुए इस प्रयास के कारण जोशीमठ को एक नई पहचान मिल सकती है। संभव है कि भविष्य में राज्य के अन्य क्षेत्रों के लोग भी इसका अनुसरण करें।
अब देखना यह होगा कि शराब परोसने पर प्रतिबंध के इस संकल्प पर ग्रामीण और नगर क्षेत्र के लोग कितनी मजबूती से कायम रहते हैं। इस पहल पर न केवल शराब माफियाओं बल्कि पूरे राज्य के लोगों की नजरें भी टिकी रहेंगी।

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