स्टोन क्रशर पर अनियमितताओं के आरोप, राजस्व को नुकसान की आशंका

– हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट
थराली, 1 अप्रैल। विकासखंड थराली के अंतर्गत सुनला स्थित स्टोन क्रशर पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि क्रशर संचालक रवन्ना (परिवहन प्रपत्र) में हेराफेरी कर प्रतिदिन सरकार को हजारों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं। हाल ही में थराली के उपजिलाधिकारी पंकज भट्ट द्वारा डंपरों की गई जांच में कई अनियमितताएं उजागर होने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
जानकारी के अनुसार, सुनला स्थित यह स्टोन क्रशर स्थापना के समय से ही विवादों में रहा है और समय-समय पर नियमों की अनदेखी के आरोप लगते रहे हैं। ताजा मामला उस समय सामने आया जब बिना पानी के छिड़काव के क्रशर संचालन और अत्यधिक धूल प्रदूषण की शिकायत पर 30 मार्च को एसडीएम ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में शिकायत सही पाए जाने पर संचालकों को कड़ी चेतावनी देते हुए नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान ग्वालदम–सिमली राष्ट्रीय राजमार्ग पर खड़े कोर सेंट से लदे एक डंपर की जांच में पाया गया कि वास्तविक लोड के मुकाबले कम टन का रवन्ना जारी किया गया था। इस पर संबंधित डंपर का चालान किया गया। इसके अगले दिन 31 मार्च को भी एक अन्य डंपर की जांच में इसी प्रकार की अनियमितता सामने आई, जिसमें 3 टन का रवन्ना होने के बावजूद वाहन में 5 टन से अधिक सामग्री लदी मिली। इस मामले में भी कार्रवाई करते हुए चालान किया गया।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अधिकांश डंपरों और ट्रालों में निर्धारित मात्रा से अधिक गिट्टी और सेंट लादे जाने तथा कम मात्रा का रवन्ना काटे जाने का खेल लंबे समय से जारी है। वाहन स्वामियों और चालकों से पूरी मात्रा का भुगतान लिया जाता है, जबकि सरकारी अभिलेखों में कम मात्रा दर्शाई जाती है। इससे जहां संचालकों को अतिरिक्त लाभ होता है, वहीं सरकार को राजस्व की हानि उठानी पड़ रही है।
एसडीएम पंकज भट्ट की सख्ती के बाद पिछले दो दिनों में इस तरह की गतिविधियों में कुछ कमी आई है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि यह गोरखधंधा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों ने खनन विभाग और पुलिस प्रशासन से इस मामले में संयुक्त रूप से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि राजस्व चोरी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
बिना धर्मकांटे के तौल का भी आरोप
डंपर चालकों का कहना है कि अधिकांश वाहनों का वजन धर्मकांटे पर किए बिना ही अनुमान के आधार पर रवन्ना जारी कर दिया जाता है। इससे अनियमितताओं की गुंजाइश और बढ़ जाती है तथा पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
