भारत की बहु-आपदा पूर्व चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली: डिजिटल परिवर्तन से आपदा सुरक्षा तक
The Multi-Hazard Early Warning Decision Support System represents a decisive transformation in India’s approach to weather forecasting and disaster risk reduction. By integrating real-time observations, advanced modelling, GIS-based analysis, and structured dissemination within a single digital framework, the system converts weather and climate information into timely, preventive action.MHEW-DSS has strengthened preparedness across environment, energy, health, agriculture, livelihoods, and governance. It has reduced loss of life, limited economic damage, improved service delivery, and enhanced public trust through consistent and impact-focused warnings. The system demonstrates how technology-driven early warning delivers measurable public value at the national-scale and positions India as a global leader in multi-hazard early warning systems.
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-A PIB Feature edited by Usha Rawat-
भारत एक आपदा-प्रवण देश है। लंबी तटरेखा, विविध भूगोल और मानसून पर निर्भर जलवायु के कारण चक्रवात, बाढ़, लू, सूखा और भूस्खलन जैसी घटनाएँ हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया है – बहु-आपदा पूर्व चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली (Multi-Hazard Early Warning Decision Support System – MHEW-DSS)।
यह प्रणाली भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित की गई है और जनवरी 2024 में औपचारिक रूप से लॉन्च की गई। यह सिर्फ एक और मौसम ऐप नहीं है, बल्कि मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन में पूर्ण डिजिटल परिवर्तन का प्रतीक है।
डिजिटल क्रांति: क्या बदल गया?
पहले मौसम पूर्वानुमान तैयार करने में घंटों लगते थे और अक्सर मैनुअल प्रक्रियाएँ शामिल होती थीं। अब MHEW-DSS ने इस पूरी प्रक्रिया को स्वचालित और एकीकृत कर दिया है।
मुख्य उपलब्धियाँ:
- पूर्वानुमान तैयार करने का समय 50 प्रतिशत कम हो गया (6 घंटे से घटकर 3 घंटे)।
- पूर्वानुमान की सटीकता में 30 प्रतिशत सुधार हुआ।
- भारत और पड़ोसी क्षेत्रों की लगभग 80 प्रतिशत आबादी अब प्रभाव-आधारित, स्थान-विशिष्ट चेतावनियाँ प्राप्त कर रही है।
- 1999 से 2024 के बीच चक्रवातों के समय लोगों को सुरक्षित निकालने की लागत एक-तिहाई रह गई है, क्योंकि लैंडफॉल (टकराने के स्थान) की भविष्यवाणी में काफी सुधार हुआ है।
- प्रणाली ने लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत बचाई और विदेशी सॉफ्टवेयर पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त कर दी।
MHEW-DSS की मुख्य विशेषताएँ
यह प्रणाली कई आधुनिक तकनीकों को एक छत के नीचे लाती है:
- स्वचालित डेटा प्रसंस्करण: रडार, उपग्रह, स्वचालित मौसम स्टेशन और समुद्री ब buoy से आने वाले 90 प्रतिशत से अधिक डेटा की गुणवत्ता जाँच और एकीकरण अब स्वचालित है।
- बेहतर मॉडल उपयोग: 95 प्रतिशत से अधिक संख्यात्मक मौसम मॉडलों का उपयोग हो रहा है।
- लंबी अग्रिम सूचना: पूर्वानुमान की अवधि 5 दिनों से बढ़कर 7 दिनों तक हो गई है।
- प्रभाव-आधारित चेतावनियाँ: सिर्फ यह नहीं बताया जाता कि बारिश होगी या तूफान आएगा, बल्कि यह भी बताया जाता है कि इससे कृषि, स्वास्थ्य, सड़कें, बिजली या मछली पकड़ने पर क्या असर पड़ेगा।
- रंग-आधारित आसान अलर्ट: जोखिम के स्तर को सरल रंगों (हरा, पीला, नारंगी, लाल) से दिखाया जाता है।
- बहु-आपदा कवरेज: चक्रवात, भारी बारिश, लू, आंधी-बिजली, सूखा आदि कई खतरों के लिए एक साथ चेतावनी।
मौसमग्राम: हर घर तक मौसम की जानकारी
MHEW-DSS का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है मौसमग्राम पोर्टल। यह हाइपर-लोकल पूर्वानुमान देता है – यानी 1.5 लाख से अधिक पिन कोड, 5,700 ब्लॉक और 6.2 लाख से ज्यादा गांवों तक।
10 दिनों तक का पूर्वानुमान उपलब्ध है, जिसमें प्रति घंटे (36 घंटे तक), 3 घंटे के अंतराल (5 दिन तक) और 6 घंटे के अंतराल (10 दिन तक) का डेटा शामिल है। यह जानकारी ‘मौसम’ मोबाइल ऐप, वेबसाइट, एसएमएस, ई-पंचायत और एपीआई के जरिए आम लोगों, किसानों, मछुआरों और पंचायत प्रतिनिधियों तक पहुँचती है।
विभिन्न क्षेत्रों पर सकारात्मक प्रभाव
1. चक्रवात और तटीय सुरक्षा बिपरजॉय और दाना जैसे चक्रवातों के दौरान सटीक पूर्वानुमानों की वजह से गुजरात और ओडिशा में शून्य जनहानि दर्ज की गई। मछुआरों को हवा की गति 45 किमी/घंटा से ज्यादा होने पर विशेष अलर्ट मिलते हैं।
2. कृषि और किसान कृषि-मौसम सलाह का उपयोग करने वाले किसानों की आय 52.5 प्रतिशत ज्यादा पाई गई है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में अगर ये सलाह ठीक से पहुँच जाए तो अनुमानित वार्षिक आर्थिक लाभ 13,331 करोड़ रुपये तक हो सकता है।
3. स्वास्थ्य लू की चेतावनी से गर्मी संबंधी बीमारियाँ कम हुई हैं। वेक्टर जनित रोगों (डेंगू, मलेरिया) की भविष्यवाणी में भी मदद मिल रही है।
4. ऊर्जा और पर्यावरण नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बेहतर नियोजित हो रहा है। डिजिटल प्रक्रिया से हर साल 210,240 किलोवाट बिजली और 63 किलोलीटर पानी की बचत हो रही है। कागज की बचत से 23.4 टन कागज प्रति वर्ष बच रहा है, जिससे 2.57 टन CO₂ उत्सर्जन कम हुआ है।
5. शासन 40 पूर्वानुमान कार्यालयों में मैनुअल कार्य लगभग खत्म हो गया है। मानवशक्ति की लागत में सालाना 57.6 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। 200 से अधिक सरकारी संगठन, जिनमें NDMA और NDRF शामिल हैं, इस प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं।
संस्थागत ढाँचा और अंतरराष्ट्रीय योगदान
यह प्रणाली मिशन मौसम (सितंबर 2024 में कैबिनेट द्वारा मंजूर) का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) और IMD के नेतृत्व में चल रही यह पहल “हर हर मौसम, हर घर मौसम” के विजन को साकार कर रही है।
क्षेत्रीय स्तर पर भारत अब उत्तर भारतीय महासागर क्षेत्र के कई देशों – बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, श्रीलंका, ओमान आदि – को चक्रवात पूर्वानुमान और चेतावनियाँ प्रदान करता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के तहत भारत की भूमिका और मजबूत हुई है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता
2025-26 में MHEW-DSS और IMD को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं:
- राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025
- UNDRR सासाकावा पुरस्कार 2025 (IMD महानिदेशक श्री मृत्युंजय मोहापात्र को)
- इकोनॉमिक टाइम्स गवटेक अवॉर्ड 2026
- डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन समिट उत्कृष्टता पुरस्कार
ये सम्मान दर्शाते हैं कि भारत आपदा पूर्व चेतावनी प्रौद्योगिकी में अब विश्व स्तर पर अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।
निष्कर्ष
MHEW-DSS सिर्फ एक तकनीकी प्रणाली नहीं है। यह जीवन बचाने, आजीविका संरक्षण करने और आर्थिक नुकसान कम करने का एक सशक्त माध्यम है।
डिजिटल परिवर्तन, स्वदेशी नवाचार और प्रभाव-आधारित चेतावनियों के जरिए भारत ने साबित कर दिया है कि सटीक और समय पर जानकारी से सबसे बड़ी आपदाओं को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
“मौसम के लिए तैयार, जलवायु-स्मार्ट राष्ट्र” का सपना अब धीरे-धीरे हकीकत बन रहा है। MHEW-DSS न सिर्फ भारत को मजबूत बना रहा है, बल्कि पड़ोसी देशों और वैश्विक आपदा प्रबंधन को भी नई दिशा दे रहा है।
यह प्रणाली याद दिलाती है कि प्रौद्योगिकी जब सही मकसद के साथ इस्तेमाल की जाए, तो वह सबसे बड़े खतरे को भी अवसर में बदल सकती है – अवसर जीवन बचाने और एक सुरक्षित, समृद्ध भारत बनाने का।
