सुरक्षा

सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए ‘सीमा दर्शन टूर’ का आयोजन

अल्मोड़ा, 23 मई। भारतीय सेना की ओर से युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों की सामरिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परिस्थितियों से परिचित कराने के उद्देश्य से सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय (एसएसजे), अल्मोड़ा के विद्यार्थियों एवं एनसीसी कैडेट्स के लिए विशेष ‘सीमा दर्शन टूर’ का आयोजन किया गया।

मुख्यालय उत्तर भारत क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा, अति विशिष्ट सेवा मेडल ने शनिवार को इस फॉरवर्ड एरिया एवं फील्ड एरिया भ्रमण दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 80 यूके एनसीसी बटालियन के 20 एनसीसी कैडेट्स इस अभियान में शामिल हैं।

पंचशूल गनर्स द्वारा आयोजित इस भ्रमण का उद्देश्य युवाओं को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में संचालित सामरिक अभियानों की प्रत्यक्ष जानकारी देना, उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करना तथा भारत सरकार के वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इसके साथ ही सीमांत एवं दूरस्थ क्षेत्रों में पर्यटन संभावनाओं को प्रोत्साहित करने का प्रयास भी किया जा रहा है।

यह पहल हाल ही में 119 (स्वतंत्र) इन्फैंट्री ब्रिगेड ग्रुप और सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के बीच हुए एमओयू का प्रत्यक्ष परिणाम है। इस समझौते के तहत प्रौद्योगिकी, साइबर अध्ययन, सतत विकास, जनसंचार और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग एवं ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के साथ सिविल-मिलिट्री समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

भ्रमण के दौरान कैडेट्स वाइब्रेंट विलेज गुंजी में तैनात भारतीय सशस्त्र बलों के जवानों के साथ समय बिताएंगे और उनकी कार्यशैली तथा चुनौतियों को करीब से समझेंगे। इसके अलावा दल काली माता मंदिर, ओम पर्वत, आदि कैलाश पर्वत और पार्वती कुंड झील जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण करेगा।

सेना के अनुसार यह पहल सीमावर्ती क्षेत्रों में रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य युवाओं को अपने मूल क्षेत्रों में पर्यटन, स्थानीय संसाधनों और सरकारी योजनाओं के माध्यम से रोजगार एवं सतत विकास की संभावनाओं से जोड़ना है।

कार्यक्रम के माध्यम से कैडेट्स को परिवर्तन के दूत के रूप में तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे सीमांत गांवों के पुनर्जीवन और संतुलित क्षेत्रीय विकास में योगदान दे सकें। भारतीय सेना का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम युवाओं को देश की विविध संस्कृतियों और सीमावर्ती समुदायों से जोड़ते हैं तथा राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होते हैं।

साथ ही, ग्रामीणों के साथ संवाद और सीमांत जीवन को निकट से देखने का अवसर कैडेट्स को देश के सीमावर्ती क्षेत्रों के सामरिक और सांस्कृतिक महत्व को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।

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