एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का आह्वान—सहानुभूति, सत्यनिष्ठा और सेवा से करें राष्ट्र निर्माण

ऋषिकेश, 23 अप्रैल। देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए नवदीक्षित चिकित्सकों से सहानुभूति, सत्यनिष्ठा और राष्ट्र निर्माण की भावना के साथ सेवा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धि का उत्सव नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति बड़ी जिम्मेदारी निभाने की शुरुआत भी है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऋषिकेश केवल उपचार का केंद्र ही नहीं, बल्कि हिमालय का प्रवेश द्वार और आध्यात्मिक व सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। ऐसे वातावरण में दीक्षांत समारोह का आयोजन विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रेरणा का स्रोत बनता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करने वाले युवाओं से समाज को बड़ी अपेक्षाएँ होती हैं और उन्हें अपने कर्तव्यों का निर्वहन समर्पण और सेवा भाव से करना चाहिए।
कोविड-19 महामारी के अनुभवों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने कठिन परिस्थितियों में भी नवाचार और प्रतिबद्धता का परिचय दिया। उन्होंने देश में व्यापक टीकाकरण अभियान और ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराकर वैश्विक जिम्मेदारी का भी निर्वहन किया।
स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में देश भर में नए एम्स संस्थानों की स्थापना से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच मजबूत हुई है। उन्होंने एम्स ऋषिकेश की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान नैदानिक सेवाओं, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।
उन्होंने टेलीमेडिसिन सेवाओं, हेली एम्बुलेंस और ड्रोन के माध्यम से दवाओं की आपूर्ति जैसी पहलों को स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। साथ ही, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सहित क्षेत्र में तेजी से हो रहे बुनियादी ढांचे के विकास की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की सराहना की।
इस अवसर पर राज्यपाल गुरमीत सिंह ने युवा चिकित्सकों से पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों को अवसर में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच अभी भी चुनौतीपूर्ण है, ऐसे में युवा डॉक्टरों को दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा देकर समाज में विश्वास और आशा का संचार करना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता का क्षेत्र है। मरीज चिकित्सक के पास केवल उपचार के लिए नहीं, बल्कि विश्वास और उम्मीद लेकर आता है। ऐसे में डॉक्टरों का व्यवहार, करुणा और समर्पण ही मरीज को सुरक्षा और संतोष प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र मानवता की सेवा का सर्वोच्च माध्यम है, जिसे निष्ठा, संवेदनशीलता और करुणा के साथ निभाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा स्थापित एम्स ऋषिकेश आज प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रक्षक संस्थान बन चुका है। यहां कैंसर उपचार, न्यूरोसर्जरी, रोबोटिक सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ऊधमसिंह नगर में एम्स ऋषिकेश के सैटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे कुमाऊं क्षेत्र की जनता को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जनपद में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, टेलीमेडिसिन नेटवर्क के विस्तार, जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाओं की उपलब्धता और निःशुल्क जांच सुविधाओं को बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा पेशा केवल करियर नहीं, बल्कि मानव सेवा का सर्वोच्च माध्यम है। उन्होंने नवदीक्षित चिकित्सकों से मरीजों के विश्वास को बनाए रखने और हर परिस्थिति में उनके हित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट, एम्स ऋषिकेश के अध्यक्ष प्रो. राज बहादुर, कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, डीन (अकादमिक) प्रो. सौरभ सहित अनेक गणमान्य अतिथि, संकाय सदस्य और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
दीक्षांत समारोह में नवदीक्षित चिकित्सकों को चिकित्सा सेवा के माध्यम से समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश देते हुए सेवा, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को जीवन में सर्वोपरि रखने का आह्वान किया गया।
