वे दिन भी क्या दिन थे जब मशहूर फिल्मकार ऋत्विक घटक से हमारी मुलाक़ात हुई थी

-गोविंद प्रसाद बहुगुणा –
दिल्ली में रहते समय १९७१ में एक दिन मित्र मंगलेश डबराल मुझे मैक्समूलर भवन की लाइब्रेरी में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में प्रदर्शित कुछ यादगार फ़िल्में दिखाने ले गए थे। उस दिन हमने वहां पर भरतीय कला फिल्म के प्रमुख हस्ताक्षर ऋत्विक घटक की बहुचर्चित फिल्म* अजांत्रिक* देखी थी, जो पारम्परिक फिल्मों से हटकर विज्ञान विषय पर आधारित एक कॉमेडी- फिल्म थी। इस फिल्म में एक ऑटोमोबाइल को कहानी के एक चरित्र के रूप में पेश किया गया था।
फिल्म देखने के दो तीन दिन बाद फिर ऐसा संयोग बना कि उस समय दिनमान साप्ताहिक पत्रिका में कार्यरत फिल्म समीक्षक एक दूसरे मित्र नेत्र सिंह रावत जी हमें बिठ्ठल भाई पटेल भवन में टिके मशहूर फिल्मकार ऋत्विक घटक से मिलाने ले गये थे। नेत्र सिंह जी तो उस दिन ऋत्विक घटक का इंटरव्यू दिनमान के खातिर लेने जा रहे थे, तो मैं भी मंगलेश डबराल के साथ लग गया ।
हम बैठक कक्ष में अन्दर बुलाये जाने की प्रतीक्षा करने लगे। सबसे पहले नेत्र सिंह जी को अंदर बुलाया गया क्योंकि उन्हें साक्षात्कार लेना था।
हम दोनों बाद में बुलाये गये , तभी वहां पर एक तीसरे सज्जन का आगमन हुआ। उन्होंने अपना नाम सोनरेक्सा बताया और कहा कि वह किसी समय टिहरी गढ़वाल में डिप्टी कलेक्टर रह चुके हैं,सेवा से त्यागपत्र देकर अब वह स्वतंत्र लेखन करते हैं और फोटोग्राफी करते हैं। उनके हाथ में एक अलबम था, जिसे वह ऋत्विक घटक को दिखाने लाये थे । उस एल्बम में निराला जी का एक जीवंत फ़ोटो था । उन्होंने बताया कि यही फोटो रामविलास शर्मा जी ने *निराला की साहित्य साधना* नामक पुस्तक में भी प्रयोग किया है।
थोड़ी देर बाद हमें भी अन्दर बुलाया गया।
अन्दर जाकर हमने देखा ऋत्विक घटक साधारण कुर्ता पैजामा पहने अपने सामने टेबल पर रखे एक लस्सी पीने वाले गिलास की साईज में रम डालकर पी रहे थे, बातें भी करते जा रहे थे। हमारे साथ अन्दर गये तीसरे सज्जन सोनरेक्सा बड़ी ललचाई नजरों से उन्हें ताके जा रहे थे तो घटक जी ने उनसे पूछ लिया -पिओगे ? उन्होंने हामी भरी तो फिर एक गिलास उनकी तरफ बढ़ा दिया था ….
घटक जी से मिलने के लिए मैं इसलिए उत्सुक था क्योंकि *मधुमति* फिल्म की कहानी की पटकथा भी उन्होंने ही लिखी थी जिसको सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला था। फिल्म की कुछ शूटिंग कुमायूं के घने जंगलों में की गई थी। नेत्र सिंह रावत भी कुमायूं क्षेत्र के मूल निवासी थे, तो स्वाभाविक था कि वह भी ऋत्विक घटक का इंटरव्यू लेने में बहुत उत्सुक थे। इस फिल्म का निर्देशन बिमल राय ने किया था और यह फिल्म उस दौर की सबसे हिट फिल्म साबित हुई ।
ऋत्विक घटक का जन्म पूर्वी बंगाल में ढाका शहर में हुआ था, जो अब बांग्लादेश का क्षेत्र है । ऋतिक घटक का परिवार फिर पश्चिम बंगाल में कलकत्ता में स्थानांतरित हो गया था।उनके बारे में एक अफवाह यह भी खूब चली कि ऋतिक घटक विश्वविख्यात फिल्मकार सत्यजीत राय से बड़ी प्रतिस्पर्धा रखते थे। ..
