थराली से लापता किशोर हरिद्वार से बरामद , पुलिस ने किया परिजनों के सुपुर्द
थराली, 2 मई (हरेंद्र बिष्ट)। थाना थराली पुलिस ने ‘ऑपरेशन सकुशल घर वापसी’ के तहत आठ दिन तक चले सघन अभियान के बाद दो नाबालिगों को हरिद्वार से सकुशल बरामद कर उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। बच्चों की सुरक्षित वापसी पर परिजनों ने उत्तराखंड पुलिस का आभार व्यक्त किया है।
पुलिस के अनुसार, पढ़ाई के दबाव और परिजनों की नाराजगी के डर से घर छोड़कर हरिद्वार पहुंचे दोनों नाबालिगों को संवेदनशील व सटीक कार्रवाई के जरिए ढूंढ निकाला गया। 24 अप्रैल को अलग-अलग परिवारों ने थाना थराली में सूचना दी थी कि ग्राम चौण्डा निवासी 14 वर्षीय मोहन सिंह (पुत्र गौर सिंह) और देव सिंह (पुत्र भुवन बिष्ट) 23 अप्रैल को स्कूल ड्रेस में घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। परिजनों ने रिश्तेदारों व आसपास काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
सहपाठियों से पूछताछ में सामने आया कि दोनों बच्चे स्कूल से नाम कटने और डांट के डर से मानसिक तनाव में थे और घर न लौटने की बात कह रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना थराली में बीएनएस की धारा 137(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पंवार ने तत्काल संज्ञान लेते हुए विशेष टीम गठित की। पुलिस उपाधीक्षक कर्णप्रयाग त्रिवेन्द्र सिंह राणा के पर्यवेक्षण और थानाध्यक्ष विनोद चौरसिया के नेतृत्व में अभियान शुरू किया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने ग्वालदम से अल्मोड़ा तक करीब 30 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिससे बच्चों के बस से अल्मोड़ा जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद टीम ने हल्द्वानी और देहरादून तक बस चालकों व परिचालकों से पूछताछ की। देहरादून में जानकारी मिली कि बच्चे हरिद्वार में उतर गए थे। इसके बाद पुलिस टीम परिजनों के साथ हरिद्वार पहुंची और श्रवणनाथ नगर, शांतिकुंज व भूपतवाला क्षेत्र में व्यापक सर्च अभियान चलाया।
1 मई को भूपतवाला क्षेत्र के एक ढाबे में भोजन करते समय दोनों बच्चों की पहचान हुई। परिजनों द्वारा पुष्टि के बाद उन्हें सकुशल बरामद कर लिया गया। बच्चों ने बताया कि वे पॉकेट मनी के सहारे हरिद्वार में छिपकर रह रहे थे।
पुलिस ने दोनों नाबालिगों को सुरक्षित उनके परिजनों को सौंप दिया। अपनों को सकुशल पाकर परिवार भावुक हो उठा और पुलिस टीम का आभार जताया। चमोली पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार रखें और पढ़ाई का अनावश्यक दबाव बनाने के बजाय उनकी भावनाओं को समझें, क्योंकि मानसिक तनाव में बच्चे गलत कदम उठा सकते हैं।
