पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में स्वरोजगार बढ़ाने पर सरकार का जोर

देहरादून, 7 मई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को देहरादून के निरंजनपुर में प्रदेशभर से आए पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों के साथ संवाद करते हुए राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार को नई दिशा देने का संकल्प दोहराया। इस अवसर पर उन्होंने मत्स्य पालन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से रेफ्रिजरेटेड फिशरीज वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन को स्वरोजगार का मुख्य आधार बना रही है। केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’, ‘राष्ट्रीय पशुधन मिशन’ और ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के माध्यम से किसानों को हर संभव सहायता दी जा रही है। उन्होंने विशेष रूप से ‘मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन’ का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक ऋण अनुदान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि पिछले चार वर्षों में गौ, बकरी और भेड़ पालन के माध्यम से 11,500 से अधिक लोगों को स्वरोजगार मिला है, जबकि राज्य पशुधन मिशन से 4,000 से अधिक युवा और महिलाएं जुड़ी हैं।
पशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में सरकार के प्रयासों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 60 विकासखंडों में मोबाइल वेटरनरी यूनिट संचालित की जा रही हैं और हर जिले में मॉडल पशु चिकित्सालय बनाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि उत्तराखंड को वर्ष 2030 तक खुरपका-मुंहपका रोग से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे पशुपालकों का आर्थिक नुकसान कम होगा। दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में दुग्ध उत्पादन में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और पिछले वर्ष सहकारी समितियों के माध्यम से उत्पादकों को 380 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ बताया कि उत्तराखंड की बद्री गाय के घी को देश का पहला जीआई टैग मिला है, जिससे इसे वैश्विक पहचान मिली है। मत्स्य पालन के क्षेत्र में उन्होंने ट्राउट फार्मिंग को स्वरोजगार का बड़ा माध्यम बताया और कहा कि सरकार उत्तराखंड को ‘हाई वैल्यू फिश प्रोडक्शन’ और ‘एक्सपोर्ट हब’ बनाने के लिए प्रयासरत है, जिसके लिए 170 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना शुरू की गई है।
संवाद के दौरान पशुपालकों ने भी अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं। हरिद्वार के हरिकिशन लखेड़ा ने बताया कि साहिवाल नस्ल की गायों के पालन से वे प्रतिमाह 1.15 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त कर रहे हैं और आठ लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। वहीं डोईवाला के अमित सिंह ने बताया कि उनके द्वारा स्थापित एफपीओ का कारोबार तीन वर्षों में 10 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। कार्यक्रम में मौजूद कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि पिछले चार वर्षों में पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में गोट वैली जैसे कई नवाचार किए गए हैं जिनसे हजारों लाभार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। इस अवसर पर गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अंथवाल, पशु कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष सुरेंद्र मोघा, मत्स्य पालक विकास अभिकरण के उपाध्यक्ष उत्तम दत्ता सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में क्षेत्र के पशुपालक व किसान उपस्थित रहे।
