इरविन एलन सीली की पुस्तक “फ्लाइंग योगिनीज़” का लोकार्पण एवं परिचर्चा आयोजित

देहरादून, 16 मई, 2026। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र (डीएलआरसी) द्वारा आयोजित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत शनिवार को दून पुस्तकालय सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार इरविन एलन सीली की नई पुस्तक “फ्लाइंग योगिनीज़” का लोकार्पण एवं उस पर एक विस्तृत परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति, इतिहास और स्त्री विमर्श से जुड़े अनेक बुद्धिजीवी, लेखक, शोधार्थी तथा साहित्य-प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि “फ्लाइंग योगिनीज़” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति, सांस्कृतिक स्मृति, आध्यात्मिकता और प्रतिरोध की चेतना पर आधारित एक गहन वैचारिक यात्रा है। पुस्तक में उन योगिनियों की कथा और सांस्कृतिक उपस्थिति को केंद्र में रखा गया है, जिनकी प्राचीन प्रतिमाएँ भारत के मंदिरों से विस्थापित होकर आज विदेशी संग्रहालयों में संरक्षित हैं।
अपने वक्तव्य में इरविन एलन सीली ने पुस्तक की रचना-प्रक्रिया, योगिनी परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक स्मृतियों के संरक्षण के प्रश्नों पर विस्तार से विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि इतिहास और संस्कृति केवल अभिलेखों में नहीं, बल्कि लोगों की स्मृतियों, मिथकों और कलात्मक अभिव्यक्तियों में भी जीवित रहते हैं।
परिचर्चा में प्रख्यात कवि, अनुवादक एवं साहित्य आलोचक अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा ने पुस्तक को भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य की विशिष्ट परंपरा का महत्वपूर्ण विस्तार बताते हुए कहा कि सीली की लेखन शैली भारतीय अनुभवों को वैश्विक संदर्भों से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में इतिहास, दर्शन और साहित्य का अत्यंत संवेदनशील समन्वय दिखाई देता है।
लेखिका, फिल्मकार एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता गीता सहगल ने पुस्तक में उपस्थित स्त्री विमर्श और प्रतिरोध की चेतना को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि योगिनियों की अवधारणा केवल धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीक नहीं, बल्कि स्त्री स्वतंत्रता और आत्म-अभिव्यक्ति की सशक्त प्रतीक है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रोताओं ने भी पुस्तक और उसके विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे तथा अपने विचार साझा किए। परिचर्चा का वातावरण अत्यंत संवादपरक और विचारोत्तेजक रहा।
इरविन एलन सीली का जन्म वर्ष 1951 में इलाहाबाद में हुआ। वे भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य के महत्वपूर्ण कथाकारों में गिने जाते हैं। उनकी चर्चित कृतियों में The Trotter-Nama, Hero, The Everest Hotel और Asoca: A Sutra आदि शामिल हैं। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार, कॉमनवेल्थ राइटर्स प्राइज, क्रॉसवर्ड बुक अवॉर्ड तथा पद्मश्री सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
अंग्रेजी साहित्य के लेखक / कवि प्रो.अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा का जन्म 1947 में लाहौर में हुआ। उन्होंने अंग्रेज़ी में कविता के छह संग्रह तथा अनुवाद की दो महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित की हैं। उनकी चर्चित कृतियों में The Absent Traveller तथा Songs of Kabir शामिल हैं। वर्ष 1992 में प्रकाशित Oxford India Anthology of Twelve Modern Indian Poets अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
वर्ष 2009 में उन्हें ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ‘प्रोफेसर ऑफ पोएट्री’ पद हेतु नामित किया गया था। उन्होंने प्राकृत, हिंदी, बंगाली और गुजराती भाषाओं से 200 से अधिक साहित्यिक कृतियों का अनुवाद किया है।
वहीं गीता सहगल लेखिका, पत्रकार, फिल्म निर्देशक, नारीवादी चिंतक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। वे अनेक महिला संगठनों की सह-संस्थापक एवं सक्रिय सदस्य रही हैं।
गीता सहगल अपनी चर्चित फिल्मों Women Leaving Islam (2021), Dispatches (1987) तथा London is Burning (2012) के लिए विशेष रूप से जानी जाती हैं
कार्यक्रम के प्रारम्भ में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी ने सभी लोगों का स्वागत किया.अंत में आभार श्री निकोलस हॉफलैण्ड ने दिया.
कार्यक्रम में शहर के अनेक साहित्य प्रेमी, लेखक व साहित्यकार, हिमांशु आहूजा, शांता एन रविशंकर,अरविन्दर सिंह, नादिर बिलमोरिया, काशीसिंह, इरा सिंह, योगेन्द्र सिंह नेगी, आलोक सरीन, . मंजरी मेहता, कुल भूषण, आलोक बी लाल, विजय भट्ट, ओमप्रकाश जमलोकी, सुंदर सिंह बिष्ट,व अन्य प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे.
