खाड़ी संघर्ष नहीं थमा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकते हैं गंभीर प्रभाव : प्रधानमंत्री मोदी
नीदरलैंड्स में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए बोले प्रधानमंत्री, कहा— हालात नहीं बदले तो विकासशील देशों पर सबसे अधिक पड़ेगा असर
नई दिल्ली/एम्स्टर्डम। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को गंभीर चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि खाड़ी क्षेत्र का संघर्ष जल्द नहीं थमा और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में दुनिया ने जो आर्थिक और सामाजिक उपलब्धियां हासिल की हैं, वे खतरे में पड़ सकती हैं और करोड़ों लोग फिर से गरीबी की दहलीज पर पहुंच सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह बातें नीदरलैंड्स के हेग शहर में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहीं। अपने संबोधन में उन्होंने कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और अब पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष को वैश्विक अस्थिरता का बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया अभी महामारी के प्रभावों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि नए भू-राजनीतिक संकट सामने आ गए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत सफल होता है तो पूरी मानवता को उसका लाभ मिलता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत केवल अपने विकास की बात नहीं करता, बल्कि वह वैश्विक स्थिरता, शांति और मानव कल्याण को भी प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया अनेक चुनौतियों से जूझ रही है और ऐसे समय में भारत आशा और समाधान का केंद्र बनकर उभरा है।
“दशकों की उपलब्धियों पर फिर सकता है पानी”
प्रधानमंत्री मोदी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हालात तेजी से नहीं बदले, तो बीते वर्षों में गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में हुई प्रगति प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से विकासशील देशों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ेगा, क्योंकि ऊर्जा और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी सीधे आम जनता के जीवन को प्रभावित करती है।
उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी आबादी फिर से आर्थिक संकट और असमानता के दौर में जा सकती है। ऊर्जा संकट के कारण उत्पादन लागत बढ़ेगी, परिवहन महंगा होगा और महंगाई का दबाव आम नागरिकों पर पड़ेगा। इसका असर रोजगार और निवेश पर भी दिखाई देगा।
भारतीय समुदाय की सराहना
प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड्स में बसे भारतीय समुदाय की भी सराहना की और कहा कि भारतीय जहां भी जाते हैं, वहां अपनी मेहनत, ईमानदारी और प्रतिभा से नई पहचान बनाते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासी केवल आर्थिक योगदान नहीं देते, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता के संदेश को भी दुनिया तक पहुंचाते हैं।
उन्होंने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया भारत को नए विश्वास और उम्मीद के साथ देख रही है। भारत की आर्थिक प्रगति, डिजिटल क्रांति और नवाचार क्षमता ने विश्व में उसकी अलग पहचान बनाई है।
प्रधानमंत्री के चार प्रमुख लक्ष्य
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के भविष्य से जुड़े चार प्रमुख लक्ष्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत को खेल, प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा और वैश्विक नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
1. ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को खेल महाशक्ति बनाने के लिए युवाओं को बड़े स्तर पर अवसर दिए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य भविष्य में भारत को ओलंपिक खेलों में शीर्ष देशों की श्रेणी में पहुंचाना है।
2. वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनना
उन्होंने कहा कि “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों के माध्यम से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, चिप निर्माण, रक्षा उत्पादन और दूरसंचार क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत को विश्वस्तरीय विनिर्माण केंद्र बनाने के प्रयास जारी हैं।
3. हरित ऊर्जा में नेतृत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए भारत सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े निवेश कर रहा है। भारत का लक्ष्य केवल आत्मनिर्भर बनना नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाना है।
4. वैश्विक नवाचार और डिजिटल विस्तार
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और डिजिटल भुगतान प्रणाली जैसे क्षेत्रों में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत की डिजिटल सार्वजनिक संरचना आज दुनिया के लिए एक मॉडल बन चुकी है।
विश्व शांति और सहयोग पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया को टकराव नहीं, बल्कि सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत हमेशा संवाद, कूटनीति और शांति का समर्थक रहा है। भारत का मानना है कि युद्ध और संघर्ष किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकते। इसलिए सभी देशों को मिलकर स्थिरता और विकास के लिए काम करना चाहिए।
खाड़ी संकट का भारत पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का तनाव लंबा खिंचता है, तो भारत सहित अनेक देशों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में तेल कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ सकती है और परिवहन, उद्योग तथा कृषि क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं।
इसके अलावा खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार भी कार्यरत हैं। क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ने पर उनके रोजगार और सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ सकती हैं। यही कारण है कि भारत लगातार शांति और संवाद की वकालत कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले महीनों में विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
