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असम में वायुसेना का एएन-32 विमान दुर्घटनाग्रस्त, देहरादून के स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह समेत पांच वीर जवान शहीद

जोरहाट/देहरादून, 14 जून। भारतीय वायुसेना का एएन-32 परिवहन विमान शनिवार सुबह असम के जोरहाट एयरबेस पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस भीषण हादसे में उत्तराखंड के देहरादून जनपद स्थित सेलाकुई निवासी स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह सहित पांच वायुसेना कर्मियों का निधन हो गया। दुर्घटना के बाद विमान में आग लग गई और वह दो हिस्सों में टूट गया। घटना में सह-पायलट घायल हुए हैं, जिन्हें सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दुर्घटना सुबह लगभग 10 बजे उस समय हुई जब एएन-32 विमान नियमित उड़ान के बाद जोरहाट एयरबेस पर उतर रहा था। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार रनवे को छूने के बाद विमान अनियंत्रित होकर फिसल गया और समानांतर टैक्सी ट्रैक की ओर बढ़ते हुए दो हिस्सों में टूट गया। इसके तुरंत बाद विमान में भीषण आग लग गई।
भारतीय वायुसेना ने दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दे दिए हैं। तकनीकी विशेषज्ञों और सुरक्षा अधिकारियों की टीम हादसे के सभी पहलुओं की जांच करेगी।
शहीद हुए पांच वायुयोद्धा
इस दुर्घटना में जिन पांच वायुसेना कर्मियों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, उनमें शामिल हैं—
स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह
फ्लाइट लेफ्टिनेंट रघुम कुमार
सार्जेंट जितेंद्र शर्मा
अग्निवीर वायु खेमराम कुमावत
अग्निवीर वायु दानिश आलम
राष्ट्र सेवा के दौरान इन जवानों के बलिदान से पूरे देश में शोक की लहर है।
सेलाकुई में पसरा मातम
दुर्घटना में शहीद हुए स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह मूल रूप से देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र के निवासी थे। उनकी शहादत की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों के अनुसार प्रशांत सिंह एक होनहार और अनुशासित अधिकारी थे, जिन्होंने लगभग आठ वर्षों तक भारतीय वायुसेना में सेवाएं दीं।
बताया जा रहा है कि प्रशांत सिंह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। उनका विवाह लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व हुआ था। परिवार में पत्नी और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। शहादत की खबर मिलते ही परिजन असम के लिए रवाना हो गए।
मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने जताया शोक
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह सहित सभी दिवंगत वायुसेना कर्मियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि देश इन वीर सैनिकों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता। राज्यपाल ने भी हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति और परिजनों को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
वायुसेना की रीढ़ माना जाता है एएन-32
एएन-32 भारतीय वायुसेना का महत्वपूर्ण परिवहन विमान है, जिसका उपयोग सैनिकों, रसद सामग्री और आपदा राहत सामग्री को दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। यह विमान सोवियत संघ में डिजाइन किया गया था और लंबे समय से भारतीय वायुसेना के बेड़े का हिस्सा है। विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी क्षेत्रों तथा सीमावर्ती इलाकों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
वायुसेना के पास अभी भी बड़ी संख्या में एएन-32 विमान सेवा में हैं, हालांकि इन्हें चरणबद्ध तरीके से आधुनिक विमानों से प्रतिस्थापित करने की प्रक्रिया भी चल रही है।
राष्ट्र ने खोए पांच जांबाज
जोरहाट की यह दुर्घटना केवल एक विमान हादसा नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। देश की सुरक्षा और सेवा के लिए समर्पित पांच युवा वायुयोद्धाओं ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। उनकी शहादत सदैव याद रखी जाएगी।

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