आखिर क्यों और किसने जलाई सीएचसी थराली में दवाओं की होली ?, जांच के आदेश

हजारों-लाखों रुपये की दवाएं नष्ट किए जाने की आशंका, अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल
– हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट –
थराली, 20 जून। एक ओर सरकार सरकारी अस्पतालों में मरीजों को पर्याप्त और निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर चमोली जिले के थराली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में बड़ी मात्रा में दवाओं के डिब्बे और कथित रूप से दवाइयां जलाए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सीएचसी थराली परिसर के समीप गत दिनों बड़ी संख्या में जले हुए दवा पैकेट और डिब्बे पड़े मिले। इन पर सरकारी आपूर्ति की मुहरें भी दिखाई दीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि ये दवाएं सरकारी स्टॉक का हिस्सा थीं तो यह जांच का विषय है कि इन्हें किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में नष्ट किया गया।

लोगों का कहना है कि यदि दवाओं की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी तो उन्हें समय रहते उन अस्पतालों को क्यों नहीं भेजा गया, जहां उनकी आवश्यकता थी। वहीं यदि दवाएं उपयोग योग्य थीं तो उनका निस्तारण क्यों किया गया। इससे सरकारी धन की भारी बर्बादी होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
क्षेत्रवासियों ने यह भी सवाल उठाया है कि एक लाख से अधिक आबादी वाले थराली परगने में मरीजों को अक्सर आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हो पातीं, ऐसे में बड़ी मात्रा में दवाओं को जलाने का मामला चिंताजनक है। लोगों का कहना है कि यदि दवाओं का समुचित प्रबंधन किया जाता तो इन्हें जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाया जा सकता था।
मामले का एक अन्य पहलू पर्यावरणीय प्रभाव से भी जुड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार दवाओं को खुले में जलाना वैज्ञानिक और सुरक्षित निस्तारण की प्रक्रिया नहीं मानी जाती। इससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
क्या कहते हैं सीएचसी प्रभारी
“दवाओं के डिब्बों में आग लगाने के संबंध में जानकारी मांगी गई है। प्रारंभिक तौर पर बताया गया है कि चिकित्सालय के डस्टबिन में खाली दवाओं के डिब्बे अधिक मात्रा में एकत्र हो गए थे, जिन्हें जलाया गया। हालांकि कुछ डिब्बों में दवाओं की स्ट्रिप्स दिखाई देने की बात सामने आई है। यह जांच का विषय है।”
— डॉ. संजय गुप्ता, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, सीएचसी थराली
चीफ फार्मासिस्ट का पक्ष
“पिछले रविवार को दवाओं के खाली डिब्बे और रैपर जलाए गए थे। दवा स्टोर के डस्टबिन में काफी मात्रा में खाली पैकेजिंग सामग्री जमा हो गई थी तथा कूड़ा उठाने वाला वाहन भी नहीं आया था। अस्पताल में केवल एक सफाई कर्मचारी है, जो बीमार चल रही है। इसी कारण मजबूरी में खाली रैपर जलाने पड़े। किसी ने साजिशन जलाए जा रहे खाली डिब्बों के ऊपर कुछ दवाओं से भरे डिब्बे डाल दिए, ताकि सीएचसी को बदनाम किया जा सके।”
— गिरीश टम्टा, प्रभारी चीफ फार्मासिस्ट, सीएचसी थराली
सीएमओ ने गठित की जांच टीम
“दवाओं से भरे डिब्बों को खुले में जलाना नियमों के विरुद्ध है। दवाओं का इस प्रकार निस्तारण नहीं किया जा सकता। उपलब्ध तस्वीरों में कुछ डिब्बों में दवाइयां दिखाई पड़ रही हैं। मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। उप जिला चिकित्सालय कर्णप्रयाग के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तथा चीफ फार्मासिस्ट को जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
— डॉ. अभिषेक गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चमोलीफिलहाल मामला जांच के दायरे में है और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जलाए गए डिब्बों में वास्तव में केवल खाली पैकेजिंग सामग्री थी या फिर उपयोग योग्य अथवा एक्सपायरी दवाओं का भी निस्तारण किया गया था।
