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मिजोरम और असम में डीआरआई की बड़ी कार्रवाई, 15 किलो मेथम्फेटामाइन व 11 टन अफीम के बीज जब्त

नई दिल्ली/आइजोल, 7 अगस्त। सीमा पार तस्करी और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई जारी रखते हुए राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने मिजोरम और असम में खुफिया सूचना के आधार पर अलग-अलग अभियान चलाकर 15 किलोग्राम मेथम्फेटामाइन (याबा) टैबलेट, लगभग 11 मीट्रिक टन विदेशी मूल के अफीम के बीज तथा 10 मीट्रिक टन तस्करी की विदेशी सुपारी जब्त की है।

डीआरआई के अनुसार, गुरुवार को मिजोरम में चलाए गए एक अभियान के दौरान आइजोल-चम्फाई मार्ग पर आइजोल से करीब 40 किलोमीटर दूर सकेई बंगला के पास एक एम्बुलेंस को रोका गया। सूचना थी कि चिकित्सा आपातकाल की आड़ में मादक पदार्थों की तस्करी की जा रही है।

तलाशी के दौरान एम्बुलेंस में रखे एक सफेद एचडीपीई बैग से ईंट के आकार के 15 पैकेट बरामद हुए, जिनमें कुल 15 किलोग्राम गुलाबी-नारंगी रंग की मेथम्फेटामाइन टैबलेट मिलीं। ये पैकेट एक नकली मरीज के बिस्तर के पास छिपाकर रखे गए थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि प्रतिबंधित पदार्थ को म्यांमार से चम्फाई-ज़ोखावथर सेक्टर के रास्ते मिजोरम लाया गया था और वहां से असम भेजे जाने की तैयारी थी।

डीआरआई ने बरामद मेथम्फेटामाइन तथा तस्करी में प्रयुक्त एम्बुलेंस को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत जब्त कर लिया है। मामले में एम्बुलेंस चालक सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

मेथम्फेटामाइन टैबलेट, जिन्हें आमतौर पर ‘याबा’ कहा जाता है, एक कृत्रिम उत्तेजक (सिंथेटिक स्टिमुलेंट) मादक पदार्थ है, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। इसका अवैध उत्पादन और तस्करी मुख्य रूप से म्यांमार से की जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके सेवन से लत लगना, आक्रामक व्यवहार, मानसिक विकार और तंत्रिका तंत्र को दीर्घकालिक नुकसान जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसी कारण यह पदार्थ एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत नियंत्रित श्रेणी में शामिल है।

इस बीच, 5 और 6 अगस्त की रात डीआरआई ने असम राइफल्स की सहायता से असम के करीमगंज जिले के बदरपुर स्थित एक गोदाम में छापेमारी की। तलाशी के दौरान व्यावसायिक चाय की खेप के रूप में चिह्नित एचडीपीई बैग, कार्टन और खुले भंडार में छिपाकर रखे गए लगभग 11 मीट्रिक टन विदेशी मूल के अफीम के बीज बरामद किए गए।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, इन अफीम के बीजों की तस्करी भारत-म्यांमार सीमा के रास्ते की गई थी और इन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में भेजने की तैयारी थी। जब्त अफीम के बीजों की अनुमानित कीमत करीब 1.67 करोड़ रुपये आंकी गई है। इन्हें सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत जब्त कर लिया गया है। डीआरआई पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

 

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खसखस का उपयोग कई व्यंजनों में एक खाद्य सामग्री और मसाले के रूप में व्यापक रूप से किया जाता है; हालांकि, भारत में इसके आयात पर कड़े नियामक नियंत्रण लागू हैं। भारत की विदेश व्यापार नीति के तहत, खसखस ​​का आयात केवल निर्दिष्ट देशों से और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा संचालित पंजीकरण तंत्र के माध्यम से ही किया जा सकता है। इन सुरक्षा उपायों का उद्देश्य अवैध रूप से उगाए गए उत्पादों के वैध आपूर्ति श्रृंखलाओं में प्रवेश को रोकना और उनकी पहचान सुनिश्चित करना है। अनियमित विदेशी मूल के खसखस ​​की तस्करी न केवल इन नियंत्रणों को दरकिनार करती है, बल्कि वैध व्यापार और नियामक निगरानी पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

इससे पहले, 05.08.2026 को, डीआरआई के अधिकारियों ने रंगिया रेलवे स्टेशन पर ट्रेन संख्या 22411 से आ रही एक खेप को रोका और ट्रेन के पार्सल वैन से 10 मीट्रिक टन विदेशी मूल की सुपारी से भरे 120 बोरे बरामद किए। प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह खेप म्यांमार से भारत में तस्करी करके लाई गई थी और इसे पूर्वोत्तर क्षेत्र के बाहर के बाजारों में भेजा जा रहा था। जब्त की गई सुपारी, जिसकी कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये है, को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत जब्त किया गया है।

 

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सुपारी, जिसे आमतौर पर अरेका नट के नाम से जाना जाता है, भारत की पूर्वोत्तर सीमाओं के पार सबसे अधिक तस्करी की जाने वाली वस्तुओं में से एक है। विदेशी मूल की सुपारी की बड़े पैमाने पर तस्करी से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होता है और घरेलू उत्पादकों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय संगठित तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने के कारण सुपारी का अवैध व्यापार एक गंभीर समस्या बन गया है।

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