शिक्षा/साहित्य

विदेश में पढ़ाई के बाद 81 फीसदी भारतीय छात्र लौटना चाहते हैं स्वदेश

 

नई दिल्ली। विदेश की डिग्री हासिल करने का आकर्षण भले ही बरकरार हो, लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिकांश भारतीय छात्र स्वदेश लौटकर अपना करियर बनाने की योजना बना रहे हैं। ऑक्सफोर्ड इंटरनेशनल के सर्वेक्षण के अनुसार, विदेश में पढ़ाई करने की योजना बना रहे 81 फीसदी भारतीय विद्यार्थियों ने कहा कि वे अपना कोर्स पूरा करने के बाद भारत लौटना चाहते हैं।
यह जानकारी स्टूडेंट ग्लोबल मोबिलिटी इंडेक्स के तीसरे संस्करण में सामने आई है। रिपोर्ट के लिए 17,925 लोगों की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया गया, जबकि करीब 2,400 प्रतिभागियों से पाठ्यक्रम, पारिवारिक पृष्ठभूमि, सूचना के स्रोत और पढ़ाई के बाद की योजनाओं से जुड़े अतिरिक्त सवाल पूछे गए। रिपोर्ट में मनाश गोहैन की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 10 में से नौ विद्यार्थी अपने परिवार में विदेश जाकर शिक्षा हासिल करने वाले पहले सदस्य हैं। वहीं, लगभग आधे विद्यार्थियों ने कहा कि विदेश जाने का निर्णय उन्होंने स्वयं लिया।
पढ़ाई के बाद की योजनाओं में 15 फीसदी विद्यार्थियों ने नौकरी के लिए आवेदन करने को अपना अगला कदम बताया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे नौकरी भारत में करना चाहते हैं या विदेश में।
परिवार के प्रभाव में कमी, आत्मनिर्णय बढ़ा
रिपोर्ट में पिछले तीन सर्वेक्षण चक्रों के दौरान विद्यार्थियों के निर्णय लेने के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किया गया है। विदेश जाकर पढ़ाई करने का निर्णय स्वयं लेने वाले विद्यार्थियों का अनुपात 2023-24 में 29 फीसदी से बढ़कर 2024-25 में 34 फीसदी और 2025-26 में 49 फीसदी हो गया।
इसके विपरीत, परिवार के प्रभाव में लिए गए निर्णयों का अनुपात 59 फीसदी से घटकर 37 फीसदी और फिर 36 फीसदी रह गया। रिपोर्ट के मुताबिक, युवा विद्यार्थी परिवार की सलाह पर अपेक्षाकृत अधिक निर्भर हैं, जबकि उम्र बढ़ने के साथ विद्यार्थी अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेने लगते हैं। आत्मनिर्णय की प्रवृत्ति उत्तर और दक्षिण भारत में सबसे अधिक, जबकि पश्चिम और मध्य भारत में पारिवारिक प्रभाव अपेक्षाकृत मजबूत पाया गया।
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की सबसे अधिक मांग
विदेशी शिक्षा के लिए विद्यार्थियों की पसंद मुख्य रूप से उच्च शिक्षा और विशेष रूप से स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों पर केंद्रित है। 10 में से सात विद्यार्थी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन कर रहे हैं। इनमें 75 फीसदी ने बिजनेस और मैनेजमेंट को अपना प्रमुख अध्ययन क्षेत्र बताया। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 8 फीसदी, विज्ञान की 2 फीसदी और इंजीनियरिंग की 1 फीसदी रही।
शिक्षा संबंधी जानकारी में गूगल सबसे भरोसेमंद
विदेशी शिक्षा के बारे में जानकारी जुटाने के लिए गूगल सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला माध्यम रहा। करीब 39 फीसदी विद्यार्थियों ने अपने संस्थान की जानकारी हासिल करने के लिए गूगल सर्च का इस्तेमाल किया। इसके बाद 35 फीसदी ने एजेंटों को सूचना का स्रोत बताया।
विश्वसनीयता के मामले में भी गूगल सबसे आगे रहा। 56 फीसदी विद्यार्थियों ने शिक्षा संबंधी जानकारी के लिए गूगल को सबसे भरोसेमंद स्रोत माना। इसके मुकाबले कॉलेज के आयोजनों को 20 फीसदी और इंस्टाग्राम को केवल 9 फीसदी विद्यार्थियों ने भरोसेमंद माना। वहीं, एआई टूल्स पर भरोसा 6 फीसदी और यूट्यूब पर 5 फीसदी विद्यार्थियों ने जताया।
रिपोर्ट से स्पष्ट है कि भारतीय विद्यार्थियों के लिए विदेश जाकर पढ़ाई करना अब केवल स्थायी रूप से विदेश में बसने का माध्यम नहीं रह गया है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और अनुभव हासिल करने के बाद भारत लौटकर अपने करियर को आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

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