आपदा/दुर्घटना

जोशीमठ ट्रीटमेंट कार्यों की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग

 

ज्योतिर्मठ, 11 अगस्त (प्रकाश कपरूवाण)। जोशीमठ भू-धंसाव के बाद नगर को बचाने के लिए शुरू किए गए ट्रीटमेंट कार्यों को लेकर भू-धंसाव प्रभावित नगरवासी अब मुखर होने लगे हैं। प्रभावितों ने ट्रीटमेंट कार्यों में कथित अनियमितताओं और गुणवत्ता मानकों के उल्लंघन की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक संबंधित कार्यदायी संस्थाओं और ठेकेदारों के भुगतान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
इस संबंध में एसडीएम ज्योतिर्मठ के माध्यम से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) को भेजे ज्ञापन में जोशीमठ के लिए 1,640 करोड़ रुपये की धनराशि जारी किए जाने पर आभार जताया गया। साथ ही कहा गया कि इस धनराशि का समुचित और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रभावितों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए उच्चस्तरीय तकनीकी समिति का गठन किया जाना आवश्यक है। समिति गठित करने की मांग पूर्व में भी की जाती रही है।
ज्ञापन में कहा गया है कि जोशीमठ सामरिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। ऐसे में आपदा प्रबंधन के तहत आवंटित धनराशि का सही उपयोग सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है। एनडीएमए और राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत परियोजना का उद्देश्य लोगों के जीवन, परिसंपत्तियों तथा इस ऐतिहासिक और धार्मिक नगर के अस्तित्व की रक्षा करना है। आरोप लगाया गया है कि वर्तमान में धरातल पर चल रहे कार्यों में व्यापक अनियमितताएं, तकनीकी लापरवाही और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आ रही हैं।
ज्ञापन में माइक्रो पाइलिंग, एंकरिंग, सॉयल नेलिंग और जल निकासी व्यवस्था में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि कई स्थानों पर सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। साथ ही स्वीकृत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के प्रावधानों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है।
प्रभावितों ने कहा कि भू-तकनीकी दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य भविष्य में पुनः बड़े भू-धंसाव अथवा आपदा का कारण बन सकते हैं। इससे स्थानीय निवासियों के जीवन पर एक बार फिर गंभीर संकट पैदा होने की आशंका है। ज्ञापन में बिना पारदर्शी गुणवत्ता जांच और निष्पक्ष तृतीय-पक्ष ऑडिट के कार्यदायी संस्थाओं और ठेकेदारों को भुगतान किए जाने पर भी सवाल उठाया गया है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, तकनीकी निरीक्षकों और संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध सख्त कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। साथ ही घटिया पाए गए कार्यों को संबंधित ठेकेदारों की लागत पर निर्धारित मानकों के अनुरूप दोबारा कराया जाए।
प्रभावितों ने जोशीमठ के स्थिरीकरण के लिए प्रस्तावित जल निकासी और सीवेज व्यवस्था में पूरे नगर को शामिल करने तथा इसके लिए आवंटित बजट बढ़ाने की मांग भी की। इसके अलावा प्रभावित परिवारों के संपूर्ण पुनर्वास को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने, मुआवजा भुगतान और पुनर्वास में बरती जा रही कथित शिथिलता को गंभीरता से लेने की मांग की गई।
ज्ञापन में जोशीमठ के लिए आईआईटी रुड़की द्वारा डिजाइन किए गए भवन निर्माण ढांचे को शीघ्र मंजूरी देकर लागू करने की मांग भी की गई, ताकि प्रभावित परिवार अपने लिए सुरक्षित आवास का निर्माण कर सकें।
ज्ञापन की प्रतियां मुख्य सचिव उत्तराखंड, सचिव आपदा प्रबंधन और जिलाधिकारी चमोली को भी भेजी गई हैं। ज्ञापन देने वालों में जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती, प्रवक्ता कमल रतूड़ी, उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता अरुण शाह और कुशला डिमरी आदि शामिल रहे।

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