माता मूर्ति मंदिर पहुंचे नर-नारायण, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत

बदरीनाथ/ज्योतिर्मठ, 16 अगस्त (कपरुवाण)। बदरीनाथ धाम में रविवार को श्रावण मास शुक्ल पक्ष षष्ठी के अवसर पर भगवान नर-नारायण जन्मोत्सव पर्व उल्लास और श्रद्धा के साथ शुरू हुआ। दो दिवसीय नर-नारायण जयंती पर्व के पहले दिन भगवान नर-नारायण की उत्सव मूर्ति को देवडोली में विराजमान कर माता मूर्ति मंदिर ले जाया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान नर-नारायण ने माता मूर्ति के मंदिर पहुंचकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
प्रातः श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती की उपस्थिति में बदरीनाथ धाम के रावल अमरनाथ नंबूदरी ने भगवान नर-नारायण की उत्सव मूर्ति को देवडोली में विराजमान कराया। इसके बाद देवडोली को धार्मिक विधि-विधान और समारोहपूर्वक माता मूर्ति मंदिर के लिए रवाना किया गया। देवडोली के माता मूर्ति मंदिर पहुंचने पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान नर-नारायण के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की।
आईटीबीपी कैंप के निकट महिला मंगल दल माणा की महिलाओं ने भगवान नर-नारायण की देवडोली का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। इसके बाद नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी, धर्माधिकारी, वेदपाठी और पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान नर-नारायण की पूजा-अर्चना और अभिषेक कराया। दिन के भोग के बाद शाम को भगवान नर-नारायण की देवडोली पुनः श्री बदरीनाथ धाम लौट आई।
बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने बताया कि भगवान नर-नारायण की देवडोली के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता मूर्ति मंदिर पहुंचे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सतयुग से भगवान नर और नारायण श्री बदरीनाथ धाम में तपस्यारत हैं और उन्हें भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। इसी मान्यता के चलते प्रत्येक वर्ष बदरीनाथ धाम में नर-नारायण जयंती का पर्व विशेष श्रद्धा और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाता है।
बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि नर-नारायण जयंती के दूसरे दिन सोमवार को प्रातः भगवान नर-नारायण भगवान बदरीविशाल के जन्मस्थल लीला ढूंगी पहुंचेंगे। वहां धार्मिक परंपराओं और विधि-विधान के साथ विशेष पूजा-अर्चना तथा अभिषेक किया जाएगा। इससे पहले भगवान नर-नारायण बामणी गांव सहित बदरीनाथ धाम का भ्रमण करेंगे और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करेंगे।
नर-नारायण जयंती के अवसर पर बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती के अलावा पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, प्रधान पीतांबर मोल्फा, धर्माधिकारी स्वयंवर सेमवाल, वेदपाठी रवींद्र भट्ट, वेदपाठी वाणी विलास डिमरी, सहायक प्रोटोकॉल अधिकारी संदीप कपरुवाण, माता मूर्ति मंदिर के पुजारी हनुमान प्रसाद डिमरी, जगमोहन बर्त्वाल, लेखाकार भूपेंद्र रावत, राकेश झिंक्वाण, योगंबर नेगी और विकास सनवाल सहित आईटीबीपी एवं पुलिस के जवान, तीर्थ पुरोहित और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
