मधुमेह की दवा BGR-34 सरकारी अस्पतालों में भी है उपलब्ध
नई दिल्ली, 16 अगस्त। देश में मधुमेह के उपचार में इस्तेमाल होने वाली आयुर्वेदिक औषधि BGR-34 वर्ष 2015 से मरीजों के लिए उपलब्ध है। इस औषधि का फॉर्मूलेशन वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI) और केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पौधा संस्थान (CIMAP) ने विकसित किया है। इसके विकास के दौरान आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के आधार पर कई परीक्षण और अध्ययन किए गए हैं।
आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पिछले दिनों राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि BGR-34 के मानकीकरण, उत्पाद सत्यापन, एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि, हर्बल घटकों के अनुकूलन, मधुमेह-रोधी गतिविधि तथा सुरक्षा संबंधी अध्ययन किए गए हैं।
सरकारी अस्पतालों में उपलब्धता के लिए निविदा जरूरी
मंत्रालय के अनुसार सरकारी अस्पतालों और औषधालयों में BGR-34 की उपलब्धता संबंधित राज्य सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों, केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS), नगर निकायों, कर्मचारी राज्य बीमा (ESI), नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) तथा अन्य संबंधित खरीद एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में आती है।
BGR-34 को प्रोपराइटरी आयुर्वेदिक मेडिसिन श्रेणी में लाइसेंस प्राप्त है। इसलिए सरकारी संस्थानों में इसकी उपलब्धता सामान्यतः निविदा प्रक्रिया के माध्यम से होती है। किसी सरकारी खरीद में इस औषधि को शामिल किया जाना संबंधित एजेंसी की खरीद शर्तों, निविदा में प्राप्त बोली के अनुरूपता, कीमत और निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को पूरा करने जैसे कारकों पर निर्भर करता है।
इसका अर्थ है कि BGR-34 का देश के सभी सरकारी अस्पतालों में स्वतः उपलब्ध होना जरूरी नहीं है। किसी राज्य या सरकारी स्वास्थ्य संस्था में इसकी उपलब्धता वहां की संबंधित खरीद एजेंसी द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर निर्भर करती है।
दिल्ली में अलग-अलग योजनाओं के तहत उपलब्धता
आयुष मंत्री के अनुसार NDMC और दिल्ली नगर निगम (MCD) दिल्ली के निवासियों के लिए दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। वहीं कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) व्यवस्था के तहत BGR-34 की उपलब्धता व्यक्ति और उसके परिवार के वैध ESI स्वास्थ्य कार्ड पर निर्भर करती है।
CGHS के लाभार्थियों के लिए यह औषधि स्थानीय केमिस्ट के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है, क्योंकि इसकी आपूर्ति वहां निविदा के माध्यम से नहीं होती।
एक ही केंद्र पर विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों का विकल्प
केंद्र सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और जिला अस्पतालों में आयुष सुविधाओं को सह-स्थित (Co-location) करने की रणनीति अपनाई है। इसका उद्देश्य मरीजों को एक ही स्वास्थ्य केंद्र पर विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों में उपचार का विकल्प उपलब्ध कराना है।
आयुष चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मियों की नियुक्ति तथा उनके प्रशिक्षण में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग सहयोग करता है। वहीं आयुष ढांचे, उपकरण, फर्नीचर और औषधियों के लिए आयुष मंत्रालय राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) के तहत केंद्रीय प्रायोजित योजना के माध्यम से सहायता प्रदान करता है।
मंत्रालय के अनुसार आयुष औषधालयों और मौजूदा उप-स्वास्थ्य केंद्रों को उन्नत कर आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में संचालित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसके लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सहयोग से काम किया जा रहा है।
सरकार का जोर इस व्यवस्था के माध्यम से मरीजों को उनकी जरूरत और पसंद के अनुसार विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों का विकल्प उपलब्ध कराने पर है। BGR-34 जैसे लाइसेंस प्राप्त आयुर्वेदिक उत्पादों की सरकारी संस्थानों में वास्तविक उपलब्धता हालांकि संबंधित संस्थान की खरीद प्रक्रिया और निविदा में उसके चयन पर निर्भर रहेगी।
